Profile Of Manohar Parrikar: मैं काजल की कोठरी में जाने से नहीं डरता...साफ था, साफ रहूंगा
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नई दिल्ली। गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का निधन हो गया। लंबी बीमारी के बाद 63 साल की उम्र में मनोहर पर्रिकर का निधन हो गया है। मनोहर पर्रिकर अग्नाशय कैंसर से पीड़ित थे। इस गंभीर बीमारी से लड़ने के बावजूद भी वो लगातार अपने काम को लेकर सक्रिय रहे। उन्होंने अपने काम से कभी छुट्टी नहीं ली और ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ और नाक में लगाकर भी उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर परह अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह किया। मनोहर पार्रिकर की छवि एक बेदाग, बेबाक और सौम्य नेता की रही। राजनीति में जहां ज्यादातर नेता अपने तीखे तेवर के साथ पेश आते हैं तो वहीं मनोहर पर्रिकर एक ऐसा नेता है जो बेहद सौम्य और शालीन तरीके से व्यवहार करने के लिए जाने जाते हैं।

सादगी का परिचय
मनोहर पर्रिकर की छवि बेहद शांत और सौम्य स्वभाव के नेता के तौर पर रही है। उनकी सादगी का आलम यह था कि वह मुख्यमंत्री रहते हुए भी बेहद साधारण जीवन जीते थे। सीएम होने के बावजूद वो अपने ऑफिस स्कूटी से जाते थे। अपने बच्चों को स्कूटर से स्कूल छोड़ने जाते है। लोग उन्हें 'स्कूटी वाला मुख्यमंत्री' कहने लगे थे। वो मुख्यमंत्री होते हुए भी वीआईपी कल्चर के सख्त खिलाफ थे। एयरपोर्ट पर आम लोगों के साथ लाइन में लग कर सिक्योरिटी चेक से गुजरना हो या साधारण कपड़े और चप्पल पहनकर जीवन जीना उनकी आदत में शुमार था।

देश के पहले आईआईटीयन मुख्यमंत्री
पर्रिकर देश के पहले ऐसे भारतीय मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने आईआईटी से स्नातक किया था। 1978 में आईआईटी मुंबई से स्नातक की डिग्री हासिल की थी। मनोहर पर्रिकर ने 14 मार्च 2017 को गोवा के मुख्यमंत्री पद पर आसीन थे। इससे पहले वह 2000 से 2005 तक और फिर 2012 से 2014 तक गोवा के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद उनके काम को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें केंद्र में बुलाया और देश का रक्षा मंत्री नियुक्त किया।

मैं काजल की कोठरी में जाने से नहीं डरता...साफ था, साफ रहूंगा
मनोहर पर्रिकर का जन्म साल 1955 में गोवा के मापुसा गांव में हुआ। उन्होंने शुरुआती शिक्षा लोयोला हाई स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने मुंबई में आईआईटी में दाखिला लिया। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने छात्र जीवन में ही संघ का रास्ता चुन लिया था। इसके बाद संघ के रास्ते से ही उन्होंने बीजेपी की टिकट पर पहला चुनाव लड़ा। उन्होंने 1994 में गोवा की पणजी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। साल 2000 में उन्हें गोवा का मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन उनके मुख्यमंत्री बनने के 1 साल बाद ही उनकी पत्नी की कैंसर के चलते मौत हो गई। साल 2002 में उन्हें यह पद भी छोड़ना पड़ा। फिर साल 2002 से लेकर साल 2005 तक गोवा के मुख्यमंत्री रहे। साल 2012 में उन्होंने एक बार फिर से गोवा के मुख्यमंत्री पद को संभाला। भारतीय राजनीति में मनोहर पर्रिकर को 'मिस्टर क्लीन' के तौर पर जाना जाता है। बेहद सरल और शांत स्वभाव के पर्रिकर सादगी से जीवन जीते थे।

सर्जिकल स्ट्राइक कर दिखाई ताकत
बतौर रक्षा मंत्री रहते हुए मनोहर पर्रिकर ने भारतीय सेना ने दो बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया था। साल 2017 के नंवबर में उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर 'सर्जिकल स्ट्राइक' को अंजाम दिया। सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए मनोहर पर्रिकर ने पाकिस्तान के साथ-साथ आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब दिया। इससे पहले म्यांमार सीमा में भारतीय पैराकमांडो ने घुसकर उग्रवादियों के दो कैंप तबाह कर दिए। इस ऑपरेशन में करीब 100 उग्रवादियों को मार गिराया गया।
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