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भारत रत्न प्रणब मुखर्जी: इंदिरा के सिपहसलार से संघ मुख्यालय तक जाने का सफर

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नई दिल्ली। 70वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी समेत देश की तीन महान हस्तियों को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न" से नवाजने की घोषणा की है। दो अन्य लोगों, महान गायक भूपेन हजारिका और सामाजसेवी और राजनेता नानाजी देशमुख को मरणोपरांत भारत रत्न दिया जाएगा।

प्रणब मुखर्जी देश के उन चुनिंदा नेताओं में एक हैं, जिन्‍हें न केवल सत्ता पक्ष बल्कि विपक्षी दलों के नेताओं से हमेशा सम्‍मान मिला। उनका पूरा राजनीतिक करियर कांग्रेस पार्टी में रहा जहां उन्होंने सांसद, कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों में मंत्री और फिर राष्ट्रपति तक का सफर तय किया। हालांकि राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद कांग्रेस के धुर वैचारिक विरोधी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सालाना समारोह में शामिल होकर उन्होंने कई लोगों को आश्चर्य में डाल दिया। भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में मुखर्जी के जाने और राष्ट्रवाद पर उनके संबोधन को देश के समकालीन इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना करार दिया। हालांकि कांग्रेस पार्टी शुरू में उनके संघ मुख्यालय जाने पर कुछ असहज नजर आई लेकिन बाद में राष्ट्रवाद पर प्रणब के भाषण को पार्टी ने संघ के लिए एक नसीहत बताया।

 मोदी और प्रणब की कैमिस्ट्री

मोदी और प्रणब की कैमिस्ट्री

13वें राष्‍ट्रपति के तौर उनका कार्यकाल 24 जुलाई को पूरा हुआ था। संसद के सेंट्रल हॉल में जब सांसदों ने प्रणब मुखर्जी को फेयरवेल दी थी। उस दौरान प्रणब मुखर्जी ने पीएम नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की और अपने राजनीतिक गुरु को भी याद किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस में अपना पूरा राजनीतिक करियर बिताने वाले प्रणब मुखर्जी कीराजनीतिक समझ और बुद्धिमत्ता की अक्सर तारीफ करते रहे हैं। और ऐसा पहले से माना जा रहा था कि 2019 के चुनाव से पहले सरकार इस तरह की कोई बड़ी घोषणा कर सकती है।

 परिवार और पढ़ाई

परिवार और पढ़ाई

प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 को पश्‍चिम बंगाल में हुआ। बीरभूम के सूरी विद्यासागर कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की बचपन में प्रणब दा को सब प्‍यार से पोलटू बुलाया करते थे। प्रणब दा ने बीरभूम के सूरी विद्यासागर कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की। प्रणब मुखर्जी ने कोलकाता यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में एमए और एलएलबी की डिग्री ली। करियर के शुरुआती दौर में मुखर्जी कोलकाता के डिप्टी अकाउंटेंट जनरल के ऑफिस में क्लर्क हुआ करते थे। इसके बाद वह 1963 में विद्यानगर कॉलेज में पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर भी रहे।

 राजनीतिक करियर

राजनीतिक करियर

1969 में वह अजय मुखर्जी की अध्यक्षता वाली बांग्ला कांगेस में शामिल हुए तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नजर उन पर पड़ी। इसके बाद प्रणब ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह जुलाई 1969 में पहली बार राज्य सभा में चुनकर आए। प्रणब मुखर्जी फरवरी 1973 में पहली बार केंद्रीय मंत्री बने थे। 13 नंबर से है प्रणब दा का खास नाता 13 नंबर से है प्रणब दा का खास नाता वह 13वें राष्ट्रपति हैं। 13 नंबर का बंगला है दिल्ली में। 13 तारीख को आती है शादी की सालगिरह। इतना ही नहीं 13 जून को ही राष्‍ट्रपति पद के लिए ममता ने प्रणब का नाम उछाला था 1996 से लेकर 2004 तक केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार रही। 2004 में यूपीए की सत्ता में वापसी हुई और प्रणब मुखर्जी केंद्रीय मंत्री बने।की। प्रणब मुखर्जी को पहली बार जुलाई 1969 में राज्य सभा के लिए चुना गया था। उसके बाद वे 1975, 1981, 1993 और 1999 में राज्य सभा के लिए चुने गए। वह 1980 से 1985 तक राज्य में सदन के नेता भी रहे। मुखर्जी ने मई 2004 में लोक सभा का चुनाव जीता। प्रणब दा ने कुछ समय पत्रकारिता भी की प्रणब दा ने कुछ समय के लिए पत्रकारिता भी की।

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English summary
profile of bharat ratna pranab mukherjee.
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