राजनीति के रुपहले पर्दे पर प्रियंका गांधी : फर्क बीजेपी ही नहीं, एसपी-बीएसपी पर भी पड़ेगा
नई दिल्ली। राजनीति के रुपहले पर्दे पर ये प्रियंका गांधी की धमाकेदार एन्ट्री है। क्या लाजवाब समय है। राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। उनके नेतृत्व में कांग्रेस तीन राज्यों में अपना परचम लहरा चुकी है। देश में नरेंद्र मोदी की सरकार के ख़िलाफ़ एक ज़बरदस्त एंटी इनकंबेंसी है। यूपी में एसपी-बीएसपी गठबंधन इसका फायदा उठाने के लिए एक हो चुकी हैं। बल्कि, कहें कि कांग्रेस को इसका फायदा नहीं होने देने के लिए इकट्ठी हो चुकी हैं। इसी लिहाज से कांग्रेस की दावेदारी को ज़िन्दा करने के लिहाज से प्रियंका गांधी राजनीति में यह एन्ट्री धमाकेदार है।

प्रियंका गांधी कांग्रेस के लिए कोई नया नाम नहीं है। वह अपनी मां सोनिया गांधी को राजनीति में खड़ी करने से लेकर राहुल गांधी की मदद 'दीदी' बनकर करती रही हैं। अमेठी और रायबरेली तो हर चुनाव में वही सम्भालती रही हैं। पिछले आम चुनाव में स्मृति ईरानी और कुमार विश्वास के बीच जो संघर्ष की हवा बनी थी, उसके बीच से राहुल को जीत दिलाने में प्रियंका का योगदान बड़ा रहा था।

उम्मीद की प्रियंका
प्रियंका गांधी से उम्मीद बड़ी है। मगर, प्रश्न ये है कि पूर्वी यूपी में कांग्रेस का उद्धार करने में वह कितना बड़ा योगदान दे सकेंगी। इस विषय पर विचार करने से पहले यह जरूरी है कि यह जान लिया जाए कि चुनौतियां क्या हैं। प्रियंका गांधी के समक्ष जो चुनौतियां हैं उनमें शामिल हैं-
· खोया हुआ जनाधार वापस पाना
· सोए हुए संगठन में जान फूंकना
· बीजेपी से आमने-सामने की फाइट
· एसपी-बीएसपी के गठबंधन से मुकाबला

समय कम, चुनौती बड़ी
समय कम है। मगर, प्रियंका खड़ी हुई हैं तो वह जनाधार जोड़कर ही रहेंगी। सवर्णों में खास तौर से ब्राह्मणों में वह कांग्रेस की पैठ मजबूत करेंगी जिनकी आबादी 11 फीसदी के करीब है। चूकि प्रियंका को किसी जाति से जोड़कर नहीं देख जाता, इस वजह से वह कांग्रेस को सभी वर्गों से जोड़ने का माद्दा रखती हैं। लोगों से कनेक्ट होने का उनका अपना तरीका है, उस तरीके से वह कांग्रेस को मजबूत करने में मदद करेंगी।
कांग्रेस को त्रिकोण में बनना होगा एक कोण
बीजेपी से मुकाबला करना प्रियंका गांधी के लिए आसान है, मगर एसपी-बीएसपी से मुकाबला करना कहीं ज्यादा मुश्किल है। मगर, ये भी साफ है कि बिना इस गठबंधन से टकराए, कांग्रेस को कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। कांग्रेस को अपने बूते खड़े होना है तो उसे एसपी-बीएसपी और बीजेपी के बीच त्रिकोण बनाना होगा।

कांग्रेस का मीडिया कवरेज बढ़ा
प्रियंका के चुनाव मैदान में कूदते ही बदलाव नज़र आने लगे हैं। देश भर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओँ में उत्साह है। ‘प्रियंका-प्रियंका' का नारा बुलन्द हो रहा है। कांग्रेसी अपने-अपने इलाके से प्रियंका को चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। इतना ही नहीं मीडिया कवरेज में प्रियंका पूरी तरह से छाई हुई हैं और इस तरह कांग्रेस का मीडिया कवरेज बढ़ गया है।
प्रियंका से इसलिए डरती है बीजेपी
प्रियंका के इसी रूप से बीजेपी को डर लगता है। ऐसा स्टारडम किसी और नेता के पास नहीं है। बीजेपी के पास सिर्फ नरेंद्र मोदी ही प्रियंका गांधी के स्टारडम का मुकाबला कर सकते हैं। वहीं एसपी-बीएसपी के नेता चाहे अखिलेश हों या मायावती, मीडिया में वो कवरेज नहीं हासिल कर पाते हैं जो प्रियंका गांधी को मिल जाता है। इसका फायदा कांग्रेस को जरूर होग।

कांग्रेस ने दिए स्पष्ट संकेत
कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को राजनीति में उतारकर कई संकेत स्पष्ट रूप से दे दिए हैं। उन संकेतों पर नज़र डालें तो वे हैं :
· कांग्रेस अब अपने दम पर उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने वाली है।
· एसपी-बीएसपी गठबंधन और बीजेपी के बीच खड़ी होने वाली है।
· छत्तीसगढ़ का संदेश देने के लिए कांग्रेस तत्पर नज़र आ रही है।
· त्रिकोणात्मक संघर्ष में भारी पड़ेगी कांग्रेस- ऐसा संकेत देने वाली है।
यूपी में कौन है कितना
OBC 34.7%
SC 20.5%
ब्राह्मण 11%
ठाकुर 7.6%
वैश्य 4.3%
मुसलमान 19%
अन्य 2.9%

एसपी-बीएसपी को बदलनी होगी सोच
एसपी-बीएसपी मानते रहे हैं कि कांग्रेस वोट काटेगी तो बीजेपी की। यानी वह कांग्रेस को वोट कटुआ मानती रही है जो उन्हें फायदा पहुंचाएगी। हो सकता है कि वह अब भी खुश हो कि अब बीजेपी का नुकसान ज्यादा होगा। मगर, यह सोच उन पर भारी पड़ सकती है। छत्तीसगढ़ का उदाहरण सामने है। मायावती और अजित जोगी ने वहां हाथ मिलाकर सोचा था कि वह कांग्रेस की जगह ले लेंगे, लेकिन हुआ उल्टा। उनका सफाया हो गया। कांग्रेस स्वीप करती हुई जबरदस्त बहुमत से सत्ता में आ गयी।
विकल्प बनने की कोशिश में कांग्रेस
सच्चाई ये है कि राष्ट्रीय राजनीति में जब वोट देने का वक्त आता है तो मतदाता क्षेत्रीय दलों को प्राथमिकता में नहीं रखते। अब बीजेपी के विकल्प के तौर पर कांग्रेस भी गम्भीरता के साथ दिख रही है तो मतदाताओं के तेवर में भी बदलाव होंगे। मगर, ये बदलाव एसपी-बीएसपी को कितना नुकसान पहुंचाएंगे, यह जरूर आकलन का विषय है क्योंकि छत्तीसगढ़ और यूपी में बहुत फर्क है। कांग्रेस की स्थिति में भी फर्क है और एसपी-बीएसपी यूपी में मजबूत रहे हैं। फिलहाल कांग्रेस बम-बम है। उसे प्रियंका के रूप में संजीवनी बूटी मिल गयी है। वह बीजेपी और एसपी-बीएसपी गठबंधन दोनों के लिए चुनौती बनने को तैयार दिख रही है।
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