Private Sector Salary Hike: प्राइवेट नौकरी वालों को मिलेगा DA! राघव चड्ढा ने संसद में उठाई बड़ी मांग
Private Sector Salary Hike: आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने संसद में देश के सैलरीड क्लास (Salaried Class) की एक बड़ी और गंभीर समस्या को उठाया है। उन्होंने बढ़ती महंगाई और स्थिर वेतन के बीच बढ़ते फासले को पाटने के लिए 'इन्फ्लेशन लिंक्ड सैलरी रिविजन एक्ट' (Inflation Linked Salary Revision Act) की वकालत की है। आइए जानतें हैं राघव चड्ढा ने निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए क्या मांग रखी है?
सांसद राघव चड्ढा ने संसद में डेटा पेश करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2018 से 2026 के बीच भारत के वेतनभोगी वर्ग की वास्तविक मजदूरी (Real Wages) में 16% की गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण यह है कि वेतन में होने वाली वृद्धि महंगाई की रफ्तार से मेल नहीं खा रही है। उन्होंने इस स्थिति को भारत का 'साइलेंट पे कट' (Silent Pay Cut) करार दिया है।

Salary Hike: 85% वर्कफोर्स के पास कोई सुरक्षा नहीं
राघव चड्ढा ने तर्क दिया कि सरकारी कर्मचारियों को तो महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) और समय-समय पर आने वाले 'पे कमीशन' से सुरक्षा मिल जाती है, लेकिन, भारत के फॉर्मल वर्कफोर्स का 85% हिस्सा ऐसा है, जिसे महंगाई के खिलाफ कोई वैधानिक सुरक्षा प्राप्त नहीं है। ये कर्मचारी पूरी तरह से नियोक्ता (Employer) की इच्छा और अपनी मोलभाव करने की शक्ति पर निर्भर हैं।
Private Sector Salary: दुनिया भर के देशों का दिया हवाला
भारत में एक अनिवार्य वेतन सूचकांक फॉर्मूला (Wage Indexation Formula) की मांग करते हुए उन्होंने अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं के उदाहरण दिए:
- अमेरिका: यहां COLA (Cost of Living Adjustment) के जरिए ऑटोमैटिक वेतन संशोधन होता है।
- जर्मनी: यहां हर 18-24 महीने में वेतन संशोधित किया जाता है।
- जापान: यहां वार्षिक 'शुंतो' (Shunto) सिस्टम का पालन होता है।
- बेल्जियम: यहां वैधानिक रूप से हर तिमाही में ऑटोमैटिक इंडेक्सेशन लागू है।












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