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पंजाब की ऐसी जेल, जहाँ क़ैदी अपने जीवनसाथी के साथ बिता सकेंगे निजी पल

पंजाब पुलिस
Getty Images
पंजाब पुलिस

  • पंजाब जेल के अंदर एकांत में पति-पत्नी को मिलने की सुविधा देने वाला पहला राज्य बना
  • इससे पहले क़ैदियों को पति या पत्नी से शारीरिक संबंध की इजाज़त नहीं थी
  • पहले ही सप्ताह में क़ैदियों ने 385 अर्ज़ियां दीं
  • उसी कै़दी को मिलेगी सुविधा जिसका आचरण होगा अच्छा
  • अमेरिका, फिलीपींस, कनाडा, सऊदी अरब, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में है ये सुविधा

गुरजीत सिंह हत्या के अभियुक्त हैं. उनकी उम्र 60 साल है और वो पंजाब के तरन तारन ज़िले की गोइंदवाल जेल में बंद हैं. तरन तारन ज़िला पाकिस्तान की सीमा से सटा है.

पिछले दिनों पंजाब के क़ैदियों को एक ऐसी सुविधा दी गई , जिसकी ख़ासी चर्चा है.

इस सुविधा को लेने वाले सबसे पहले कैदी गुरजीत सिंह ने कहा, ''जेल तो जेल है. कोई भी जेल हो कैदी वहाँ अकेलापन महसूस करता है. अवसाद में रहता है. लेकिन पिछले दिनों जब मेरी पत्नी मुझसे जेल में मिलने आई और हमें यहीं एकांत में कुछ घंटे बिताने दिए गए. ये मेरे लिए बड़ी राहत की बात थी.''

गुरदासपुर के रहने वाले गुरजीत इस सुविधा के लिए पंजाब सरकार के अहसानमंद हैं. दरअसल पंजाब जेल के अंदर एकांत में पति-पत्नी को मिलने की सुविधा देने वाला पहला राज्य बन गया है.

इस नियम के बाद जेल में क़ैदी अपने पति या पत्नी से एकांत में मिल सकेंगे. इस अंतरंग मुलाक़ात के दौरान वो शारीरिक संबंध भी बना सकते हैं.

गुरजीत सिंह
BBC
गुरजीत सिंह

अब शारीरिक संपर्क की इजाज़त

गुरजीत कहते हैं- एक जोड़े को काफ़ी कुछ करना होता है. हम विवाहित हैं. शादी प्रेम का पवित्र बंधन है. इसलिए अब सरकार जब शादी-शुदा जोड़ों को जेल में निजी मुलाक़ात का मौक़ा दे रही है तो हमें इसका लाभ लेना चाहिए.

पंजाब में पहले क़ैदियों को किसी आगंतुक या मिलने आने वाले से शारीरिक संपर्क की इजाज़त नहीं थी. उन्हें फ़ोन से बात करने या एक दूरी रखते हुए बात करने की अनुमति थी. इस दौरान उनके बीच शीशे की दीवार होती थी.

पंजाब के विशेष महानिदेशक (जेल) हरप्रीत सिद्धू बीबीसी से कहते हैं, ''जो पति या पत्नी जेल में नहीं हैं उन्हें सज़ा देने का कोई तुक नहीं है. हम चाहते हैं कि क़ैदियों का तनाव काबू रहे और समाज में उनकी वापसी सुनिश्चित हो. लिहाजा हमने पंजाब की जेलों में क़ैदियों को उनके जीवनसाथी से एकांत में मिलने देने का फ़ैसला किया. यह देश में अपनी तरह का पहला पायलट प्रोजेक्ट है."

उन्होंने कहा, ''20 सितंबर को यह सुविधा पहले तीन जेलों में शुरू की गई. तीन अक्तूबर तक राज्य की 25 जेलों में से 17 में ये सुविधा बहाल कर दी गई. ''

उन्होंने बताया, ''जोड़ों का मिलन या उनके बीच यौन संबंध एक ज़रूरत है. कई देशों की जेलों में इसकी अनुमति है. हमने ये भी महसूस किया कि अदालतों के कई ऐसे आदेश हैं, जो इस तरह के क़दम का समर्थन करते हैं. ''

अधिकारियों का कहना है कि ये योजना हिट रही. पहले ही सप्ताह में क़ैदियों की ओर से अपने पति या पत्नी से मिलने की अनुमति के लिए 385 आवेदन मिले.

37 साल के जोगा सिंह धोखाधड़ी के अभियुक्त हैं और जेल में बंद हैं.

उन्होंने बीबीसी बातचीत में कहा, ''मैं अपने परिवार से महीनों से नहीं मिला था. ये चीज़ मुझे अंदर से परेशान कर रही थी. लेकिन इस योजना की वजह से मुझे जेल के अंदर पत्नी से अकेले से मिलने दिया गया. इसने मुझे ऊर्जा से भर दिया.''

अमृतसर के रहने वाले इस विचाराधीन क़ैदी ने कहा कि पहले उन्हें शक था कि जेल का स्टाफ जोड़ों से कैसे बर्ताव करेगा, लेकिन सब कुछ अच्छा रहा.

जोगा सिंह
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जोगा सिंह

मिलने के लिए कमरे का इंतजाम

हमने गोइंदवाल साहिब की एक जेल का दौरा किया. हर जेल की तरह यहाँ भी डबल क्लीयरेंस सिक्योरिटी सिस्टम है. मतलब मेन गेट के बाद एक और गेट से गुज़रना होता है.

अंदर जाकर देखा, तो पाया कि क़ैदियों को पति या पत्नी से मिलने की सुविधा के तहत पहली मंज़िल पर कमरा बनाया गया है. कमरे में डबल बेड है और वॉशरूम भी. एक मेज, दो कुर्सी, एक छोटा स्टूल, पानी से भरा जग और दो गिलास भी रखे गए हैं.

जेल वार्डन ललित कोहली ने बीबीसी से कहा कि जब पति-पत्नी की मुलाक़ात होती है तो कमरा बाहर से बंद रहता है. जोड़े को दो घंटे तक अंदर रहने की अनुमति होती है.

इस दौरान अगर उन्हें कोई ज़रूरत महसूस हुई, तो वहाँ लगी बेल बजा सकते हैं. किसी भी अन्य जेल सुपरिटेंडेंट की तरह ही कोहली को भी पति-पत्नी को इस तरह मिलने की अनुमति देने या इसे ख़ारिज करने का अधिकार है.

इस मुलाक़ात के दौरान जोड़ों को कंडोम भी मुहैया कराया जाता है.

कोहली कहते हैं कि इस तरह की मुलाक़ात की अनुमति देने में क़ैदी के अच्छे आचरण का रिकार्ड सबसे ज़्यादा मायने रखता है. फिलहाल इस तरह की मुलाक़ात की अनुमति सिर्फ़ पति-पत्नी को ही है.

नियम के मुताबिक़ इस दौरान सारे एग्जिट प्वाइंट और खिड़कियाँ बंद कर दी जाती हैं.

ललित कोहली
BBC
ललित कोहली

'सिर्फ सेक्स के लिए नहीं'

इस तरह की मुलाक़ात क़ैदियों को सिर्फ़ एक दूसरे के साथ कुछ अंतरंग लम्हे बिताने का मौक़ा देती है.

पंजाब सरकार ने अपनी नोटिंग में कॉन्ज्यूगल का मतलब समझाने के लिए शब्दकोष का हवाला दिया है और कहा है कि विवाहित जोड़े जेल में मुलाक़ात के दौरान यौन संबंध बना सकते हैं.

जेल अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की मुलाक़ात का मक़सद पारिवारिक रिश्तों को और मज़बूत बनाना है.

ये क़ैदियों के बेहतर चाल-चलन को बढ़ावा देगा और उन्हें जेल के नकारात्मक असर से भी बचाएगा.

इससे क़ैदियों के पुनर्वास की संभावना बढ़ जाती है.

सरकार की नोटिंग में कहा गया इस तरह की मुलाक़ात की अनुमति कई देशों में हैं.

इनमें अमेरिका, फिलीपींस, कनाडा, सऊदी अरब, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, फ़्रांस समेत कई देश शामिल हैं.

इन देशों में इस तरह की मुलाक़ात के लिए ख़ास नियम हैं. हरप्रीत सिंह कहते हैं कि भारत में अभी ऐसा कोई नियम नहीं है.

अक्सर क़ैदी और उनके परिवार वाले शादी-शुदा लोगों के रिश्तों को बरकरार रखने के लिए उन्हें पैरोल पर छोड़ने की अर्जी लेकर अदालत जाते रहे हैं.

इस साल अदालत ने एक महिला की इस तरह की अर्जी ख़ारिज कर दी थी. इस महिला ने जेल में बंद अपने पति को पैरोल पर रिहा करने की मांग की थी. हत्या के अभियुक्त उनके पति जेल में बंद थे.

हरियाणा सरकार ने भी 2021 में क़ैदियों को इस तरह की सुविधा देने के नियम बनाने के लिए जस्टिस एचएस भल्ला की अगुआई में जेल सुधार कमेटी बनाई थी.

गोइंदवाल जेल
BBC
गोइंदवाल जेल

क्या गैंगस्टर को ये सुविधा मिलेगी?

जेल अधिकारियों ने कहा कि सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के सभी 18 अभियुक्त गोइंदवाल साहिब जेल में बंद हैं. ये सबसे नया जेल है. ये राज्य का सबसे सुरक्षित जेल माना जाता है.

हालाँकि इन अधिकारियों ने कहा कि गैंगस्टर्स और ज़्यादा ख़तरनाक क़ैदियों को इस तरह की मुलाक़ात में अपने पति या पतियों से मिलने की अनुमति नहीं है.

नियमों के मुताबिक़ हाई रिस्क क़ैदी, गैंगस्टर्स और आतंकवादियों को ये सुविधा नहीं मिलेगी. बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार करने वालों, यौन अपराधी और घरेलू हिंसा के अभियुक्तों को भी ये सुविधा नहीं मिलेगी.

ऐसे क़ैदी जिन्हें टीबी, एचआईवी, यौन संक्रमित रोग हों, उन्हें भी ये अनुमति नहीं मिलेगी. ऐसे मामलों में जेल के डॉक्टर से क्लीयरेंस लेनी होगी.

पिछले तीन महीने के दौरान जेल में किसी अपराध को अंजाम देने वालों को भी ये सुविधा नहीं मिलेगी. जो क़ैदी तीन महीने से अपनी ड्यूटी नहीं कर रहे हैं, उन्हें भी इस सुविधा से महरूम रखा गया है. अच्छा आचरण न करने वालों और जेल का अनुशासन तोड़ने वालों को भी इसकी सुविधा नहीं मिलेगी.

इस नियम के मुताबिक़ ऐसे क़ैदियों को प्राथमिकता मिलेगी, जो सबसे ज़्यादा लंबे समय से जेल में हैं. जिसका एक बच्चा है उसे भी प्राथमिकता मिलेगी. जो लोग पैरोल के हकदार हैं उन्हें प्राथमिकता सूची में सबसे नीचे रखा गया है. क्योंकि ऐसे क़ैदियों को हर छह महीने में एक बार घर जाने का मौक़ा मिलता है.

जेलों में सुविधाओं की आलोचना

पंजाब सरकार की ओर से क़ैदियों को दी जा रही सुविधाओं की आलोचना भी शुरू हो गई है.

क़ैदियों को दी जा रही ''इतनी सुविधाओं'' के मुखर आलोचकों में सिद्धू मूसेवाला की माँ चरण कौर भी शामिल हैं.

इस हत्याकांड के एक अभियुक्त दीपक टीनू के जेल से फरार होने के बाद उन्होंने कहा,'' पंजाब सरकार गैंगस्टर्स को जेलों में सुविधाएँ मुहैया करा रही हैं.''

दीपक मूसेवाला मर्डर केस के अभियुक्त गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई का नज़दीकी साथी था. चरण कौर ने जेलों में बंद क़ैदियों की मुलाक़ात के दौरान 'बिस्तर' के इंतजाम की ओर उंगली उठाई थी.

लेकिन क़ैदियों और उनके परिवारों में पंजाब सरकार के इस नए क़दम से ख़ुशी का माहौल है.

इस सुविधा को सबसे पहले हासिल करने वाले गुरजीत सिंह ने कहा कि इस तरह इसे न सिर्फ़ पंजाब की सभी जेलों, बल्कि दूसरे राज्यों की जेलों में भी बहाल करना चाहिए.

ये जेलों में सुधार की दिशा में एक बड़ा क़दम होगा.

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