TDP के दोनों मंत्रियों का इस्तीफा, पर NDA में बनी रहेगी नायडू की पार्टी
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नई दिल्ली। बीजेपी और टीडीपी के बीच का खटास खत्म नहीं हुई है। पीएम मोदी से मिलने के बाद टीडीपी कोटे के दो नों केद्रीय मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। एनडीए सरकार में टीडीपी के कोटे से बने दोनों मंत्री अशोक गजपति राजू और वाई एस चौधरी ने इस्तीफा दे दिया है। हालांकि पार्टी ने साफ कर दिया है कि वो NDA में बनी रहेगी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू से फोन पर बात की। खबर है कि दोनों लोगों के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई है। बातचीत के दौरान चंद्रबाबू नायडू ने मंत्रियों के इस्तीफे के फैसले के पीछे की वजह पीएम को बताई। PM मोदी से मुलाकात के बाद CM नायडू ने बुलाई उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। आपको बता दें कि आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा ना दिए जाने से टीडीपी केंद्र सरकार से नाराज चल रहे थे।

पीएम मोदी से बात के फौरन बाद चंद्रबाबू नायडू ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। माना जा रहा कि 2019 से ठीक पहले अगर एनडीए में बिखराव हुआ तो इससे न सिर्फ पीएम मोदी की साख पर बट्टा लगेगा, बल्कि चुनाव में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

'29 बार दिल्ली गए लेकिन फायदा नहीं मिला'
चंद्रबाबू का दावा है कि वे 29 बार दिल्ली गए लेकिन उन्हें इसका फायदा नहीं मिला। राज्य ने निर्माण कार्यों और पोलावरम योजना पर 13054 करोड़ रु. खर्च किए लेकिन केंद्र से सिर्फ 5,349.7 करोड़ की मदद मिली। हमने समय-समय पर पोलावरम प्रोजेक्ट पर खर्च हुए पैसे का हिसाब दिया। अभी भी केंद्र से हमें 4,932 करोड़ मिलने बाकी हैं।
आखिर क्या है टीडीपी की मांग?
आंध्रप्रदेश की दलील है कि हैदराबाद को तेलंगाना की राजधानी बनाने से रेवेन्यू का काफी नुकसान हुआ है। बदले में राज्य को मदद दी जानी थी। इसके लिए विशेष दर्जे का वादा किया गया था। अब केंद्र का दावा है कि उस वक्त विशेष राज्य के दर्जे का विचार अस्तित्व में था। 14वें वित्त आयोग के तहत यह दर्जा सिर्फ पूर्वोत्तर और तीन पहाड़ी राज्यों तक सीमित हो गया।












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