NEP से पुनर्जीवित होगी शिक्षा प्रणाली, भारत हासिल करेगा नया मुकाम: राष्ट्रपति कोविंद
नई दिल्ली: हाल ही में मोदी सरकार ने देश में नई शिक्षा नीति लागू की थी। सरकार का दावा था कि ये नीति पूरी तरह से 21वीं शताब्दी के हिसाब से बनाई गई है। इसके बाद से लगातार इस पर शिक्षा मंत्रालय की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। शनिवार को आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी हिस्सा लिया। साथ ही नई शिक्षा नीति पर विस्तार से बात की और इसके कई फायदे बताए।
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राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 12500 से अधिक स्थानीय निकायों और लगभग 675 जिलों की व्यापक भागीदारी और 2 लाख से अधिक सुझावों पर विचार के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार की गई है। हमारी परंपराओं में जिज्ञासा को हमेशा प्रोत्साहित किया जाता रहा है। जिज्ञासा को जिगीषा (बहस या तर्क से जीतने की इच्छा) से अधिक महत्व दिया गया है। ऐसे में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य 21वीं सदी की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में हमारी शैक्षिक प्रणाली को पुनर्जीवित करना है। साथ ही इससे भारत नया मुकाम हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भारत विश्व स्तर का सम्मानित शिक्षा केंद्र था, यहां पर तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्याल से प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान थे, लेकिन आज ग्लोबल रैकिंग में भारत की एक भी यूनिवर्सिटी टॉप पर नहीं है। नई शिक्षा नीति से इस दिशा में भी सुधार होने की उम्मीद है।
राष्ट्रपति कोविंद ने आगे कहा कि मुझे खुशी है कि 2018-19 के ऑल इंडिया सर्वे ऑफ हायर एजुकेशन में महिलाओं का GER पुरुषों से थोड़ा अधिक है। हालांकि राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों और तकनीकी शिक्षा में महिला छात्रों की हिस्सेदारी विशेष रूप से कम है। इसे दुरुस्त करने की आवश्यकता है। उनके मुताबिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमारे देश के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। यह न केवल हमारे युवाओं के भविष्य को मजबूत बल्कि हमारे देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तैयार करेगी।












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