Indian Railways:44 वंदे भारत ट्रेनों को जल्द पटरी पर दौड़ाने की तैयारी, टाइमलाइन जानिए
नई दिल्ली- गौरतलब है कि पिछले साल 15 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े ही उत्साह के देश की पहली बिना इंजन वाली सेमी-हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस (ट्रेन 18) को हरी झंडी दिखाई थी। वह ट्रेन नई दिल्ली से वाराणासी के बीच चलाई गई थी। उसी वंदे भारत एक्सप्रेस की एक और सेट नई दिल्ली और कटरा के बीच शुरू की गई। अब देश में उसी तरह की और 44 वंदे भारत ट्रेनों को भी चलाने की तैयारी चल रही है। पहली दोनों ट्रेन चेन्नई की इंटिग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार हुई थी। लेकिन, उसके लिए 44 ट्रेनों के निर्माण पर एकसाथ काम करना आसान नहीं था। इसमें कई साल लगने का अनुमान था। इसलिए अब ये 44 ट्रेने देश की तीन रेल कोच फैक्ट्रियों में एक साथ बनाई जाएगी, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है।

तीन कोच फैक्ट्रियों में एकसाथ बनेंगी 44 'ट्रेन 18'
भारतीय रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने 44 वंदे भारत ट्रेनों को पटरी पर दौड़ाने को लेकर बड़ी जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि अब इन 44 वंदे भारत ट्रेनों का निर्माण अकेले चेन्नईकी इंटिग्रल कोच फैक्ट्री में न होकर रेलवे कोच फैक्ट्री, कपूरथला और मॉडर्न कोच फैक्ट्री, रायबरेली में भी होगा। यादव ने कहा है कि 'कुछ महीने पहले ही यह फैसला लिया गया कि रेलवे की तीन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में इन ट्रेनों का निर्माण किया जाएगा, जिससे कि ट्रेनों को पटरियों पर दौड़ाने में लगने वाला समय घटकर एक-तिहाई रह जाए।' गौरतलब है कि 14 जुलाई को भेजे खत में इंटिग्रल कोच फैक्ट्री (चेन्नई) ने रेलवे बोर्ड को सूचना दी थी कि उसे 44 वंदे भारत ट्रेनों को बनाने में 6.6 साल (78 महीने ) लग जाएंगे।
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18 महीने में बनी थी पहली 'ट्रेन 18'
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने इस खत को रेलवे के आंतरिक संचार का हिस्सा कहा है और बताया है कि जब तीन फैक्ट्रियों में एकसाथ ट्रेनों के डिब्बे तैयार होने शुरू हो जाएंगे तो वह जल्द से जल्द बनकर तैयार हो जाएंगे। बता दें कि इंटिग्रल कोच फैक्ट्री ने ही पहली वंदे भारत ट्रेन या ट्रेन 18 रेकॉर्ड 18 महीने में ही तैयार कर दी थी। हालांकि, तब भी उसको लेकर विवाद हुआ था। यह ट्रेन करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बनी थी और लॉकडाउन से पहले तक यह ट्रेन नई दिल्ली-वाराणसी और नई दिल्ली कटरा के बीच बेहतर तरीके से सेवाएं उपलब्ध करवा रही थी। हालांकि, इन ट्रेनों पर कुछ असमाजिक तत्वों की ओर से पत्थर फेंके जाने की खबरें आई हैं।

दो-तीन साल में दौड़ेंगी और 44 'वंदे भारत एक्सप्रेस'
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक पहली वंदे भारत ट्रेन में जो 100 करोड़ रुपये की लगता आई थी, उनमें से 35 करोड़ रुपये अकेले प्रोपल्सन सिस्टम (ट्रेन को चलाने वाले सिस्टम) पर खर्च हुए थे। मौजूदा 44 वंदे भारत ट्रेनों का टेंडर 1,500 करोड़ रुपये से ऊपर जाएगा। ये टेंडर पिछले साल 22 दिसंबर को इंटिग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई की ओर से जारी किया गया था, जो कि पिछले 11 जुलाई को खुला। इन ट्रेनों के लिए यह तीसरा टेंडर जारी किया गया है। इस बीच रेलवे बोर्ड के चेयरैमन वीके यादव के मुताबिक, '(ये)44 ट्रेनें अगले दो से तीन साल में चलनी शुरू हो जाएंगी। जैसे ही टेंडर फाइनल हो जाता है, निश्चित टाइमलाइन उपलब्ध करवा दी जाएगी।'

चाइनीज कंपनी को निकलना पड़ सकता है टेंडर से बाहर
हाल ही में चीन की सरकारी कंपनी सीआरआरसी कॉर्पोरेशन रेलवे के इन सेमी-हाई स्पीड 'ट्रेन 18' प्रोजेक्ट के ग्लोबल टेंडर के लिए बोली लगाने वाली अकेली विदेशी कपनी बनकर उभरी थी। यह कंपनी गुरुग्राम की एक कंपनी के साथ ज्वाइंट वेंचर में सीआआरसी पायनीयर इलेक्ट्रिक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के नाम से बोली प्रक्रिया में उतरी थी। लेकिन, लगता है कि चीन के खिलाफ माहौल के चलते इस कंपनी को इस प्रक्रिया से अलग होना पड़ेगा। यह कंपनी 44 वंदे भारत ट्रेनों के प्रोपल्सन सिस्टम (ट्रेन को चलाने वाले सिस्टम) या इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन किट्स के लिए बोली लगाने वाली 6 कंपनियों में से एक है।












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