31 साल का वो वकील जिसकी वजह से केजरीवाल के 20 विधायकों की जाएगी कुर्सी
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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की दिल्ली विधानसभा की सदस्यता पर खतरा मंडरा रहा है, जिस तरह से चुनाव आयोग ने लाभ के पद पर इन विधायकों की नियुक्ति के मामले में इन्हें दोषी करार पाया है और इस बाबत राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट भेजी है उसके बाद अब यह तय माना जा रहा है कि इन विधायकों की सदस्यता जाना लगभग तय है। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है लेकिन सूत्रों की मानें तो चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इन विधायकों को उनके पद पर बने रहने के लिए अयोग्य करार दिया है। लेकिन इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश के 31 वर्षीय वकील की भूमिका काफी अहम है, जिन्होंने इन विधायकों के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर करके उन्हे लाभ का पद दिए जाने को चुनौती दी थी।

2015 में दायर की थी याचिका
केजरीवाल के 21 विधायकों के खिलाफ प्रशांत पटेल ने 19 जून 2015 को चुनाव आयोग व राष्ट्रपति को 100 पन्नों की एक रिपोर्ट भेजी थी जिसमे उन्होंने इन सभी आप विधायकों को लाभ का पद लेने की बात कही थी, जोकि गैर कानूनी है। अरविंद केजरीवाल की सरकार ने जब 21 विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त करने का आदेश पास किया उसके 98 दिनों बाद प्रशांत पटेल ने यह नोटिस चुनाव आयोग व राष्ट्रपति को भेजी थी। प्रशांत पटेल ने जब अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह सभी पद लाभ के पद हैं और इसलिए इन विधायकों की सदस्यता रद्द की जानी चाहिए, उसके बाद केजरीवाल सरकार ने रिमूवल ऑफ डिसक्वालिफेकशन संशोधन बिल पेश किया, लेकिन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने इस बिल को पास नहीं किया और इसे चुनाव आयोग के पास भेज दिया।

मैं राजनीतिक दल से नहीं हूं
प्रशांत पटेल कहते हैं कि मैंने यह याचिका इसलिए दायर नहीं की थी कि मैं किसी राजनीतिक दल से हूं, मैंने इस याचिका को बतौर साधारण नागरिक के तौर पर दायर की थी। दिल्ली में अगर कोई भी जो राजनीति में रुचि रखता है उसके लिए इस मामले को नजरअंदाज करना नामुमकिन था, मुझे इस बात का अंदाजा था कि कुछ गलत हो रहा है, मैंने इसकी खोजबीन करना शुरू किया, जिसके बाद मुझे पता चला कि यह फैसला असंवैधानिक है, जिसके बाद मैंने राष्ट्पति के सचिव के पास यह याचिका दायर की।

कई मामलों में कर चुके हैं याचिका
यूपी के फतेहपुर में जन्म लेने वाले प्रशांत पटेल लगातार मीडिया की सुर्खियों में बने हुए हैं, उन्होने जहानाबाद के सरस्वती विद्या मंदिर से अपनी पढ़ाई पूरी की और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लिकेशन व भौतिकि से स्नातक की पढ़ाई पूरी की, इसके बाद उन्होंने नोएडा के एफडीडीआई से पीजी की पढ़ाई की और फिर ग्रेटर नोएडा के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की। उन्होंने अपना पहला मामला हिंदू लीगल सेल की ओर से 2014 में लड़ा जिसमे प्रोटेक्शन ऑफ हिंदू राइट के संबंधित मामले लिए जाते थे। यह संस्था एक एनजीओ चलाती है, जिसमे तकरीबन 100 वकील है। इस एनजीओ ने पीके फिल्मे के खिलाफ याचिका दायर की और आरोप लगाया कि हिंदू धर्म को इसमे गलत तरीके से दिखाया गया है, इसके अलावा उन्होंने जेएनयू छात्र कन्हैया कुमार के खिलाफ भी याचिका दायर की थी, जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से जमानत मांगी थी।

सोशल मीडिया पर सक्रिय
प्रशांत पटेल सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं और उनकी खुद की वेबसाइट है, वह कई मुद्दों को उठाने के लिए जाने जाते हैं, जिसका समाज पर असर पड़ता है। जब उनपर यह आरोप लगा कि वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं तो उन्होंने कहा कि मैं एक साधारण व्यक्ति हूं और बतौर आम नागरिक ही मैंने यह याचिका दायर की थी, यह आरोप नए नहीं हैं, बात ही कानून के उल्लंघन का और आज यह साबित हो गया है, मैं बतौर वकील अपनी प्रैक्टिस कर रहा हूं और आगे भी इसे जारी रखुंगा।












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