Pradyuman का कातिल कौन, 11वीं का छात्र या कंडक्टर? CBI Vs Police की कहानी में झूठ-सच की पूरी पड़ताल
नई दिल्ली। गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युम्न ठाकुर के मर्डर केस में ठीक 60 दिन बाद बुधवार को एक नया मोड़ आ गया। गुरुग्राम पुलिस की थ्योरी को पूरी तरह से पलटते हुए सीबीआई ने चौंकाने वाला खुलासा किया है और इसी स्कूल में पढ़ने वाले 11वीं के छात्र को गिरफ्तार किया है। सीबीआई का दावा है कि 11वीं का यह स्टूडेंट पढ़ने में कमजोर था और परीक्षा टालने के लिए उसने इस हत्याकांड को अंजाम दिया। सीबीआई के मुताबिक 11वीं के छात्र को इस बात का डर था कि पीटीएम में उसकी शिकायत होगी और वह परीक्षा में फेल भी हो सकता है। हालांकि सीबीआई की थ्योरी और गुरुग्राम पुलिस की थ्योरी में बहुत छेद हैं और दोनों पर ही सवालिया निशान उठ रहे हैं। आइए विस्तार से समझाते हैं सीबीआई और पुलिस की ''कहानी एक.. किरदार दो'' की पूरी थ्योरी को।

सबसे पहले जान लीजिए क्या कह रही है सीबीआई
सीबीआई ने कहा है कि CCTV में आरोपी छात्र चाकू ले जाते दिखाई दिया है। वो टॉयलेट गया और वहां मोबाइल पर पोर्न देख रहा था। उसी समय प्रद्युम्न भी वॉशरूम आया। प्रद्युम्न को देखकर आरोपी छात्र ने यौन शोषण की सोची और फिर चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी। सीबीआई ने यह भी दावा किया है कि आरोपी छात्र अपने दोस्तों से कह चुका था कि वो परीक्षा की तैयारी न करें क्योंकि स्कूल में लंबी छुट्टी होने वाली है।

अब जान लीजिए क्या कहा था पुलिस ने
प्रद्युम्न हत्या कांड में गुरुग्राम पुलिस ने बस कंडक्टर अशोक को आरोपी बनाया था। गुरुग्राम पुलिस की थ्योरी थी कि कंडक्टर अशोक ने प्रद्युम्न के साथ यौन शोषण करने की कोशिश की थी और बच्चे के विरोध के बाद उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक चाकू बस के टूल बॉक्स में था जो छह महीने से पड़ा हुआ था। हत्या का गिरफ्तार आरोपी बस कंडक्टर अशोक कुमार चाकू को बाथरुम में धोने ले गया था।

अब जानिए सीबीआई और पुलिस की थ्योरी में कितने है पेंच
- रायन इंटरनेशनल से हत्या के बाद कब्जे में लिए गए सीसीटीवी फुटेज को लेकर पुलिस ने कहा था कि वह बहुत ब्लर है जिसमें कुछ साफ नहीं है।
- सीबीआई ने इसी सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में लिया और हैदराबाद लैब भेजकर इसकी जांच कराई तो उसमें आरोपी बच्चा मौका-ए-वारदात से निकलता दिखाई दे रहा है।
- स्कूल के माली ने कहा था कि जब प्रद्युम्न को बाथरुम से उठाने की कोशिश की जा रही थी तब उसने अशोक को पास लगे कूलर के पीछे के गलियारे से आते देखा था। यह गलियारा मुख्य रास्ते की विपरीत दिशा में है।
- जबकि पुलिस ने कहा था कि कंडक्टर अशोक मुख्य रास्ते से होते हुए बच्चों के बाथरूम तक आया था।
- पुलिस ने यह भी कहा था कि जब अशोक को गिरफ्तार किया गया तो उसके कपड़ों पर खून के धब्बे थे।
- लेकिन उस वक्त माली ने अपने बयान में कहा था कि अशोक के कपड़ों पर खून के धब्बे नहीं थे।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह कहा गया था कि बच्चे के गले की एक नस काट दी गई जिससे वह बोल या चीख नहीं पाया। डॉक्टरों के मुताबिक इस इस नस के चलते इंसान बोलता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 11वीं का छात्र किसी पेशेवर अपराधी की तरह इस हत्याकांड को अंजाम दे सकता है।
- अशोक ने हरियाणा पुलिस के सामने शुरू में क्यों जुर्म कबूला था इस पर भी सीबीआई कुछ भी साफ तरीके से नहीं बता पाई है।
- सीसीटीवी फुटेज में बाकी लोग कौन थे इस पर भी कुछ नहीं बताया गया है।

कहानी एक पर सीबीआई और पुलिस के किरदार अलग-अलग
सीबीआई और हरियाणा पुलिस की थ्योरी पर नजर डालें, तो साफ दिखता है कि दोनों की कहानी लगभग एक जैसी है। दोनों में ही चाकू, टॉयलेट, पीड़ित और लगभग परिस्थिति एक जैसी है। बस बदला है, तो किरदार यानी हत्या का आरोपी। पुलिस हत्या का आरोपी बंस कंडक्टर को बता रही थी, तो अब सीबीआई स्कूल के 11वीं के छात्र को दोषी मान रही है।












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