फतेहपुरः ‘अब्बू’ पर जिताने और ‘चच्चू’ पर हराने की जिम्मेदारी!

Political equations of BSP, SP in Fatehpur
फतेहपुर (रामलाल जयन)। उत्तर प्रदेश की फतेहपुर लोकसभा सीट पर दिलचस्प राजनीतिक लड़ाई देखने को मिल रही है। इस सीट से चुनाव लड़ रहे बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उम्मीदवार अफजल को घेरने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) ने उनके सगे चाचा को लगाया है। मतलब, बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी अपने बेटे को हरहाल में जिताने की कोशिश कर रहे हैं तो उनके सगे भाई और सपा प्रदेश सचिव हसनुद्दीन सिद्दीकी भतीजे को हराने की कमान संभाले हुए हैं।

उत्तर प्रदेश की फतेहपुर लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने साध्वी निरंजन ज्योति, कांग्रेस ने ऊषा मौर्या, समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने निवर्तमान सांसद राकेश सचान और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपने राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बेटे अफजल सिद्दीकी को चुनाव मैदान में उतारा है। भाजपा उम्मीदवार कथित ‘मोदी लहर'के भरोसे अपनी चुनावी वैतरणी पार करना चाहती हैं तो कांग्रेस की ऊषा अपने को स्थानीय बता कर चुनाव जीतना चाहती हैं। लेकिन, बसपा को पटखनी देने के लिए सपा ने नसीम के सगे भाई हसन को जिस तरह की जिम्मेदारी सौंपी है, उससे उम्मीदवार ही नहीं, बसपा भी सकते है।

सपा के प्रदेश सचिव हसनुद्दीन सिद्दीकी दलित और मुस्लिम बहुल्य इलाके में बसपा की कम मायावती सरकार में कद्दावर मंत्री रहे अपने बड़े भाई पर ज्यादा इल्जाम लगाते हैं। इस घेराबंदी से परेशान नसीमुद्दीन की साख को बट्टा लग सकता है। रविवार को प्रचार के दौरान हसन के साथ पांच लोगों ने अभद्रता भी की थी, जिसकी प्राथमिकी शहर कोतवाली में हसन की ओर से दर्ज कराई गई है।

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सपा फतेहपुर के जिलाध्यक्ष दलजीत निषाद कहते हैं कि नेता जी (मुलायम) ने अफजल को हराने की जिम्मेदारी उनके ही ‘चच्चू' हसन को सौंपा है, उनके द्वारा पूरे इलाके में नसीमुद्दीन की असिलियत बताने से बसपाई तिलमिला गए हैं और बेजा हरकत कर रहे हैं।' वह कहते हैं कि ‘हसन की घेराबंदी इतनी तगड़ी है कि बसपा उम्मीदवार का उबर पाना बड़ा मुश्किल होगा।

बकौल हसनुद्दीन ‘मैं कांग्रेस व बसपा सरकार द्वारा किए गए भ्रष्टाचार और भाजपा की सांप्रदायिकता के खिलाफ फतेहपुर सीट में सपा के पक्ष में चुनाव प्रचार करने आया हूं।' ‘आईएएनएस' के एक सवाल के जवाब में वह कहते हैं कि ‘भतीजा (अफजल) कद्दावर नेता (नसीमुद्दीन) का बेटा है, उसने चुनाव लड़ कर गलती की है और इस चुनाव में हार निश्चित है।'

हालांकि बसपा उम्मीदवार अफजल सिद्दीकी का कहना है कि वह ‘बहन जी' और ‘अब्बू' द्वारा कराए गए विकास कार्यों की बदौलत चुनाव जीत जाएंगे, ‘चच्चू' का विरोध निरर्थक साबित होगा। वहीं बसपा जिलाध्यक्ष सुनील कुमार का कहना है कि सपा की ब्यूह रचना से बसपा उम्मीदवार को कोई नुकसान होने वाला नहीं है, जिले में ध्वस्त कानून व्यवस्था और गुंड़ागर्दी से यहां के मतदाता आजिज आ चुके हैं। अब देखना यह होगा कि 30 अप्रैल को होने जा रहे मतदान में यहां के मतदाता ‘दों भाई' में से किसको तवज्जो देते हैं?

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