फिर से लौटती घाटी में दहशत, युवाओं को रिझा रहे आतंकी संगठन
श्रीनगर। एक बार फिर से जम्मू कश्मीर में दहशत और डर का वह दौर लौटता नजर आ रहा है जिसे बड़ी मुश्किल से कम किया गया था। पिछले कुछ दिनों से यहां पर आतंकी वारदातों और घुसपैठ का सिलसिला जारी है। राज्य के पुलिस विभाग और भारतीय सेना की ओर से कहा गया है कि कश्मीर के ज्यादा से ज्यादा युवा अब बड़ी संख्या में आतंकी संगठनों का हिस्सा बन रहे हैं।

मिल रहा स्थानीय लोगों का समर्थन
पिछले हफ्ते जम्मू के उधमपुर में बीएसएफ की एक टुकड़ी पर पाकिस्तान का आतंकी मोहम्मद नावेद पकड़ गया था। इस सिलसिले में राज्य की पुलिस ने दो ऐसे व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है जिन्होंने नावेद को अपने घर में छिपाया था। इस घटना ने पुलिस और सेना की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। कहा जा रहा है कि मोहम्मद नावेद को बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों का समर्थन मिला था।
पुलिस और सेना को इस बात का डर है कि अगर युवा इसी तरह से मोहम्मद नावेद जैसे लोगों का समर्थन करते रहे तो फिर हालात बेकाबू हो सकते हैं। वहीं अब कहीं न कहीं इस बात की पुष्टि होने लगी है कि घाटी में जेहादी तत्व फिर से सक्रिय हो गए हैं।
राज्य सरकार भी है जिम्मेदारी
इंटेलीजेंस ब्यूरो के एक अनुमान के मुताबिक पिछले साल कश्मीर में सक्रिय आतंकियों की संख्या 105 के करीब थी, लेकिन इस साल यह तादाद बढ़ गई है। आतंकी लश्कर ए तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन तेजी से युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
पिछले दिनों जम्मू कश्मीर पुलिस के कॉन्स्टेबल नसीर अहमद पंडित फेसबुक पर पोस्ट की गई एक तस्वीर में देखा गया। तस्वीर में वह हिजबुल मुजाहिदीन के एक दर्जन आतंकियों के साथ नजर आ रहा है।
यह पोस्ट काफी तेजी से वायरल हुई थी। नसीर पंडित के अलावा ट्राल के बुरहान मुजफ्फर को भी इसी पोस्ट में देखा गया था। बुरहान इस समय हिजुबल की एक नई यूनिट का चीफ बन चुका है। पुलिस ने उस पर 10 लाख रुपए का ईनाम घोषित किया हुआ है।
साफ है कि अब राज्य में हालात बेकाबू हो रहे हैं और कहीं न कहीं राज्य सरकार पर भी इसकी पूरी जिम्मेदारी जाती है।












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