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भारत के सीमावर्ती इलाकों में तेजी से बढ़ रही है मुस्लिम आबादी, आंकड़े देख सुरक्षा बलों ने दी चेतावनी

उत्तर प्रदेश और असम में अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में बीते एक दशक में अप्रत्याशित जनसांख्यिकीय परिवर्तन दर्ज किया गया है। इसके साथ ही इन इलाकों में मस्जिदों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। ग्राम पंचायतों के ताजा रिकॉर्ड के आधार पर उत्तर प्रदेश और असम की पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को अपनी अलग-अलग रिपोर्ट भेजी हैं। यह रिपोर्ट मतदाता सूचियों, 2011 की जनगणना, स्थानीय पुलिस के पास उपलब्ध रिकॉर्ड और ग्राम पंचायतों द्वारा वर्तमान जनसंख्या डेटा से लिए गए आंकड़ों के आधार पर निकाली गई है।

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नई दिल्ली, 03 अगस्तः उत्तर प्रदेश और असम में अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में बीते एक दशक में अप्रत्याशित जनसांख्यिकीय परिवर्तन दर्ज किया गया है। इसके साथ ही इन इलाकों में मस्जिदों और मदरसों की संख्या में भी अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। ग्राम पंचायतों के ताजा रिकॉर्ड के आधार पर उत्तर प्रदेश और असम की पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को अपनी अलग-अलग रिपोर्ट भेजी हैं। यह रिपोर्ट मतदाता सूचियों, 2011 की जनगणना, स्थानीय पुलिस के पास उपलब्ध रिकॉर्ड और ग्राम पंचायतों द्वारा वर्तमान जनसंख्या डेटा से लिए गए आंकड़ों के आधार पर निकाली गई है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में 32 फीसदी बढ़ी मुस्लिम आबादी

सीमावर्ती क्षेत्रों में 32 फीसदी बढ़ी मुस्लिम आबादी

असम पुलिस द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से 2021 तक बीते एक दशक में सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन की दर 31.45% पहुंच गयी है। जबकि पूरे देश और राज्य में यह बदलाव क्रमशः 12.50% और 13.54% है। इस आधार पर सीमावर्ती इलाकों में मुस्लिम समुदाय की आबादी लगभग 20 फीसदी तक बढ़ चुकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनसंख्या वृद्धि के कारणों का पता लगाने के लिए व्यापक सामाजिक विश्लेषण किए जाने की जरूरत है।

मस्जिद और मदरसे की संख्या में भी बढोतरी

मस्जिद और मदरसे की संख्या में भी बढोतरी

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक भारत-नेपाल सीमा पर कुछ जिलों में हिंदुओं, मुसलमानों और सिखों की मिश्रित आबादी है। रिपोर्ट के मुताबिक सीमावर्ती क्षेत्रों में सामान्य रूप से जनसंख्या वृद्धि राष्ट्रीय औसत से अधिक थी और सीमावर्ती गांवों में मुस्लिम आबादी में लगातार वृद्धि हुई थी। रिपोर्ट में इनपुट बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में मस्जिदों और मदरसों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि सीमा के दोनों किनारों पर बदलती जनसांख्यिकी के नतीजे की पुष्टि करती है।

यूपी के सात जिलों में तेजी से बढ़ी आबादी

यूपी के सात जिलों में तेजी से बढ़ी आबादी

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वार भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल की सीमा से लगे महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, पीलीभीत और खीरी के 7 सीमावर्ती जिलों 1047 गांव बसे हुए हैं। इनमें से 116 गांवों में मुस्लिमों की आबादी 50 फीसदी से अधिक हो चुकी है। वहीं, 303 गांवों में मुस्लिम आबादी 30% -50% के बीच है। इन इलाकों में राष्ट्रीय औसत अनुमान के मुकाबले जनसंख्या 20 फीसदी से अधिक बढ़ी है।

महज 3 सालों में 25 फीसदी बढ़ गए मस्जिद और मदरसे

महज 3 सालों में 25 फीसदी बढ़ गए मस्जिद और मदरसे

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा भेजी गई इस रिपोर्ट के मुताबिक सीमावर्ती इलाकों में मात्र 3 सालों में मस्जिदों और मदरसों की संख्या 25% तक बढ़ चुकी है। फरवरी 2018 में सीमावर्ती जिलों में मस्जिदों और मदरसों की कुल संख्या 1,349 थी, जो सितंबर 2021 में बढ़कर 1,688 हो गई। सुरक्षा एजेंसियों और राज्यों की पुलिस ने इसे बेहद संवेदनशील माना है। पुलिस बलों ने सुझाव दिया कि जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का मुकाबला करने के लिए, मौजूदा इंटेलिजेंस ग्रिड को बढ़ाने की आवश्यकता है और अधिक पुलिस स्टेशन, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थापित किए जाने चाहिए।

 BSF के अधिकार क्षेत्र का दायरा बढ़ाने की सिफारिश

BSF के अधिकार क्षेत्र का दायरा बढ़ाने की सिफारिश

दोनों ही राज्यों की रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि BSF के अधिकार क्षेत्र का दायरा 50 किलोमीटर से बढ़ाकर 100 किलोमीटर कर दिया जाए। अगर ऐसा होता है तो BSF को सीमा से 100 किलोमीटर इलाके तक की रेंज में जांच और तलाशी करने का अधिकार मिल जाएगा। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 11 अक्टूबर, 2021 को असम, पश्चिम बंगाल और पंजाब राज्यों में अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किमी के भीतर "गिरफ्तारी, तलाशी और जब्त" करने के लिए BSF की शक्तियों को बढ़ाया था। इससे पहले असम, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और पंजाब में ये सीमा 15 किलोमीटर तक के दायरे तक सीमित थी। जबकि गुजरात में यह 80 किलोमीटर थी।

वैध-अवैध लोगों की पहचान हुई मुश्किल

वैध-अवैध लोगों की पहचान हुई मुश्किल

पुलिस रिपोर्ट में इस बात का भी इशारा किया गया है कि बॉर्डर इलाकों में कई सालों से घुसपैठ हो रही है। बाहर से आने वाले अधिकांश लोग मुस्लिम समुदाय के हैं। राज्यों की पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि जो लोग पंचायतों के रिकॉर्ड में नए दर्ज हुए हैं उनमें से कितने लोग वैध और कितने लोग अवैध हैं। सुरक्षा एजेंसियों को ये भी शक है कि कई लोग बाहर के इलाके से भी यहां आकर बस गए हैं। इन इलाकों में सामाजिक-सांस्कृतिक समानता के कारण सुरक्षा कर्मियों के लिए कानूनी और अवैध प्रवासियों के बीच अंतर करना मुश्किल हो चुका है। ऐसे में इनके कागजात की जांच करना बेहद कठिन है।

बंगाल और यूपी में बदल रहा जनसंख्या संतुलन

बंगाल और यूपी में बदल रहा जनसंख्या संतुलन

द हिन्दू की खबर के मुताबिक 30 नवंबर, 2021 को, सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक पंकज कुमार सिंह ने कहा था कि असम और पश्चिम बंगाल के कुछ सीमावर्ती जिलों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन 11 अक्टूबर की गृह मंत्रालय की अधिसूचना के कारण सीमा सुरक्षा के अधिकार क्षेत्र को बढ़ा सकते हैं। पंकज कुमार सिंह ने कहा कि 2011 की जनगणना ने जनसांख्यिकीय परिवर्तनों को दर्शाया है। इस दशक में बंगाल और असम में जनसांख्यिकीय संतुलन बदल गया है जिससे लोगों के बीच विद्रोह होने लगा है। इसके साथ ही पड़ोसी सीमावर्ती जिलों में मतदान पैटर्न बदल गया है।

हो सकता है घुसपैठ का नया डिजायन

हो सकता है घुसपैठ का नया डिजायन

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि इतना अधिक जनसाख्यिकीय परिवर्तन सिर्फ आबादी बढ़ने का मसला नहीं है। यह देश में घुसपैठ का नया डिजायन हो सकता है। इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमें अभी से पुख्ता तैयारी करनी होगी। इसलिए उत्तर प्रदेश और असम राज्यों में सुरक्षा एजेंसियों ने BSF का दायरा बढ़ाने की सिफारिश की है।

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English summary
Police in Assam, Uttar Pradesh concerns at demographic changes in districts bordering Bangladesh, Nepal
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