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हैदराबाद डॉक्‍टर मर्डर: दिशा गैंगरेप के बाद जागी तेलंगाना पुलिस, महिला के लापता होने पर दर्ज हुई पहली ZERO FIR

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वारंगल। हैदराबाद डॉक्‍टर के गैंगरेप और निर्ममता से उनकी हत्‍या के बाद तेलंगाना पुलिस काफी अलर्ट है। इसका ही नतीजा है कि वारंगल में तेलंगाना राज्‍य पहली जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। यह एफआईआर उस समय दर्ज की गई जब वारंगल में एक महिला के लापता होने की खबर आई। वारंगल के सुबेदारी पुलिस स्‍टेशन में दर्ज की गई है। 16 दिसंबर 2012 में निर्भया के गैंगरेप और बेदर्दी से उसकी हत्‍या के बाद जस्टिस वर्मा कमेटी का गठन किया गया और इस कमेटी की तरफ से ही जीरो एफआईआर का प्रस्‍ताव दिया गया।

क्‍या है जीरो एफआईआर

क्‍या है जीरो एफआईआर

जीरो एफआईआर वह डॉक्‍यूमेंट है जो किसी भी पुलिस स्‍टेशन में रजिस्‍टर हो सकता है। इस एफआईआर को किसी भी पुलिस स्‍टेशन में बिना अधिकार क्षेत्र की परवाह किए दर्ज कराया जा सकता है। शनिवार की सुबह यह एफआईआर दर्ज की गई और फिर इसे श्‍यामपेट पुलिस स्‍टेशन में भेज दिया गया। पुलिस की ओर से बताया गया जीरो एफआईआर बूरा राजकुमार नामक शख्‍स की तदफ से सुबेदारी पुलिस के पास दर्ज कराई गई है।

24 साल की लड़की लापता

24 साल की लड़की लापता

राजकुमार के बड़े भाई की बेटी श्रीविद्या जिसकी उम्र 24 साल है वह लापता हो गई है। राजकुमार हनामकोंडा किसी काम से आए हुए थे। वह सुबेदारी पुलिस स्‍टेशन के करीब ही थे ज‍ब उन्‍हें अपनी भतीजी के गायब होने की खबर मिली थी। वह सुबेदारी पुलिस स्‍टेशन पहुंचे और यहां पर सब इंस्‍पेक्‍टर ने फौरन एफआईआर दर्ज की। फिर इसे श्‍यामपेट पुलिस स्‍टेशन को ट्रांसफर कर दिया गया जो कि वारंगल के ग्रामीण इलाके में है। इसी जगह पर राजकुमार और उसका परिवार रहता है। तेलंगाना पुलिस के इस कदम को काफी सराहना मिल रही है और दिशा रेप मर्डर के बाद इसे एक महत्‍वपूर्ण घटना माना जा रहा है।

दिशा के परिवार ने लगाए पुलिस पर आरोप

दिशा के परिवार ने लगाए पुलिस पर आरोप

दिशा के केस में पीड़‍िता के परिवार ने पुलिस पर आरोप लगाया था कि उन्‍हें एक पुलिस स्‍टेशन से दूसरे पुलिस स्‍टेशन तक दौड़ाया गया और बेटी के लापता होने की खबर को दर्ज करने में आनाकानी की गई। दिशा मर्डर केस में पीड़‍िता का परिवार सबसे पहले राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पुलिस स्‍टेशन पर पहुंचा था। इसके बाद उन्‍हें यहां से श्‍मशाबाद पुलिस स्‍टेशन भेज दिया गया। परिवार का कहना है कि पुलिस ने काफी समय बर्बाद किया। उनकी बेटी की जान बच सकती थी अगर पुलिस समय रहते एफआईआर दर्ज कर लेती।

निर्भया गैंगरेप के बाद बना नियम

निर्भया गैंगरेप के बाद बना नियम

जीरो एफआईआर का नियम साल 2013 जस्टिस वर्मा कमेटी की ओर से बनाया गया था। 16 दिसंबर 2012 में निर्भया के गैंगरेप और बेदर्दी से उसकी हत्‍या के बाद जस्टिस वर्मा कमेटी का गठन किया गया और इस कमेटी की तरफ से ही जीरो एफआईआर का प्रस्‍ताव दिया गया। साल 2013 और 2015 में गृह मंत्रालय की तरफ से सभी राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों के मुख्‍य सचिवों को एडवाइजरी जारी की गईं थी। इसमें उन्‍हें निर्देश दिए गए थे कि जो भी पुलिस ऑफिसर ड्यूटी पर है उसे संज्ञेय अपराध की जानकारी मिलने पर एफआईआर दर्ज करनी ही होगी।

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English summary
Police files first Zero FIR as woman goes missing in Warangal, Telangana.
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