30 महीनों में कहां सफल, कहां असफल रही मोदी सरकार!

मोदी सरकार को सत्ता संभाले 30 महीने हो चुके हैं।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 500 और 1,000 की करेंसी को अवैध घोषित किए जाने वाली घोषणा पर मिली जुली प्रतिक्रिया है।

एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी और खुद सत्ता प्रतिष्ठान इसे सही और निर्णायक कदम बता रहे हैं वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस फैसले को गरीब और आम जनता का विरोधी बता रहा है।

हालांकि वैश्विक मीडिया की नजर में यह फैसला बेहतर है। वैश्विक मीडिया का मानना है कि सरकार का आधा कार्यकाल पूरा होने के वक्त यह बेहतर फैसला है और इसके साथ ही पॉलिसी रिफॉर्म्स को लेकर उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

narendra modi

आईए आपको बताते हैं कि सरकार का आधा कार्यकाल पूरा हो जाने पर ऐसे कौन से 5 बड़े क्षेत्र हैं जिन पर खास असर हुआ है।

आर्थिक विकास पर क्या हुआ?

गौरतलब है कि तमाम घोटालों और बढ़ती महंगाई के चलते जनता ने 2014 में पीएम मोदी को बीते 30 साल में सबसे बड़ा चुनावी जनादेश दिया। यह बात भी दीगर है कि नरेंद्र मोदी अब भी सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले नेता हैं।

नरेंद्र मोदी विकास और हर भारतीय के सम्मान की बात कह कर सत्ता में आए थे। उन्होंने इनमें से कुछ हासिल किया है।

मोदी ने मंदी की वृद्धि को पीछे किया जिसके कारण संयुक्त प्रगतिशील गंठबंधन (UPA) सत्ता से बाहर हो गई थी।

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भारत अब सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था में से एक है। वृद्धि 7 फीसदी से अधिक है हालांकि इस संख्या पर सकल घरेलू उत्पाद के नए नियम से गणना करने पर खुश हुआ जा सकता है।

वैश्विक फंड्स से देश के स्टॉक और बॉण्ड को नया बल मिला है साथ ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी बढ़ा। पीएम मोदी के कुर्सी संभालने के बाद औसतन साल-दर-साल सिर्फ 2 फीसदी बढ़ा। निर्यात 7.2 फीसदी तक गिर गया।

इन सबके बीच सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि भारत में प्रति माह 1 लाख लोगों के लिए नई नौकरियों का सृजन नहीं हो पाया।

विश्वास जीतने में असफल रहे मोदी!

नौकरियों के सृजन न हो पाने की एक वजह और है कि मोदी विश्व के सबसे ज्यादा कठिन भूमि और लेबर लॉ पर विधि निर्माताओं और विभिन्न संगठनों का विश्वास जीतने में असफल रहे।

मोदी के कार्यकाल के दौरान भारत व्यापार करने में आसानी के पायदान पर 142 से 130 पर पहुंच चुका है।

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इनका लक्ष्य है कि 2018 तक व्यापार करने में आसानी के मामले में टॉप-50 के देश की सूची में पहुंचना है। कुर्सी संभालने के बाद से अब तक सिर्फ 30 बड़े रिफॉर्म्स में से सिर्फ 7 ही पूरा कर पाए हैं।

इकट्ठा हो सकते हैं साढ़े चार खरब रुपए!

मोदी ने कहा था कि वो भारत के सबसे जटिल टैक्स और नियामक प्रणाली को खत्म करेंगे। यहां शुरूआत धीमी रही।

पीएम मोदी ने कहा था कि इस बात की संभवाना है कि देश की 125 करोड़ आबादी से प्रति व्यक्ति 2 लाख रुपए वसूल किए जा सकेंगे लेकिन अभी तक सिर्फ प्रति व्यक्ति 20 रुपए ही वसूल किए जा सके हैं।

इस मामले में घोषणा पत्र के जरिए घरेलू जमाखोरों से 600 करोड़ रुपए से ज्यादा वसूल पाना फायदेमंद रहा।

इसी मुद्दे पर बात अगर बीते दिनों अचानक से 500 और 1,000 की करेंसी को बंद करने की करें तो इससे वो 86 फीसदी नोट चलन में आ गए हैं जो बेकार पड़े हुए थे।

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अर्थशास्त्रियों की मानें तो इस फैसले से 4.6 खरब रुपए बाहर आ सकते हैं। विमुद्रीकरण के बाद पहले 4 दिनों में ऊपर बताई गई राशि का करीब 5वां हिस्सा बैंकों में जा किया जा चुका है।

सामाजिक प्रगति में मोदी सरकार

बीते ढाई साल में सामाजिक प्रगति की बात करें तो मोदी का लक्ष्य था कि गरीबों का बैंक एकाउंट खोला जाए देश की आर्थिक सुरक्षा को बढ़ाया जाए जहां 2 डॉलर प्रतिदिन से भी कम कमाने वाले लाखों लोग रहते हैं।

मोदी को उनकी पार्टी के कुछ लोगों की वजह से आलोचना झेलनी पड़ती है जो अपने भाषणों से संवैधानिक रूप से सेक्युलर देश में धार्मिक भावनाएं भड़काते हैं।

विदेश नीति पर क्या किया मोदी ने!

विदेश नीति के मामले में कार्यकाल के शुरूआती दिनों में मोदी प्रशासन अयोग्य सफलता के तौर पर देखा जाना चाहिए।

रेलवे और सुरक्षा में विदेशी निवेश को अधिक से अधिक आमंत्रित किया ताकि दुनिया में सबसे ज्यादा खुली अर्थव्यवस्था भारत की हो।

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हालांकि उनकी नीतियों पर सवालियां निशान उठते रहे हैं और पड़ोसी के साथ तमाम दिक्कतें और पाकिस्तान के साथ लगातार झगड़े का माहौल बना रहता है।

राष्ट्रवाद के बढ़ते माहौल में चीन और पाक के साथ रिश्ते और ज्यादा खराब होने के आसार हैं।

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