प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जापान दौरे पर 7 ख़़ास बातें
जापान यात्रा- बड़े जोर-शोर से प्रधानमंत्री मोदी जापान के लिए रवाना हुए, शिंजो आबे के साथ बैठक कर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता को अंजाम दिया। अगर थोड़ा पीछे जाएं तो मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 2007 और 2012 में जापान की यात्रा कर चुके हैं।
आज के हालात को देखते हुए उनकी यह यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पहले वे नेपाल के साथ तालमेल बैठाने की पहल कर चुके हैं। अपनी पहली द्विपक्षीय वार्ता को लेकर मोदी सरकार बेहद सतर्क है।
निवेश, विकास जैसी नीतियों को जापान के साथ साझा कर देश की नीतियों को सफल बनाने की महत्वाकांक्षी योजना है। घुमाएं स्लाइडर और जानें किन-किन मायनों ने महत्वपर्ण बना दी है पीएम नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा-

परमाणु समझौता
जहां तक जापान के साथ परमाणु समझौते की बात है, इसे लेकर जापान में काफ़ी नापसंदगी है। जापान के गठबंधन वाली पार्टी कोमितो परमाणु ऊर्जा के सख्त ख़िलाफ़ है। जनधारणा पर गौर करें तो जापान के आम लोग परमाणु ऊर्जा नहीं चाहते। जापान में साल 2011 में फुकुशिमा में होने वाली परमाणु दुर्घटना अभी तक ज़ेहन में धधकती है। जापान-भारत के बीच बनी इस खाई को पाटना दोनों देशों के लिए ख़ासा मुश्किल होगा

चीन बेचैन?
पिछले आंकड़ों में जाएं तो 2012 में पद संभालने के बाद आबे ने चीन के राष्ट्रपति से औपचारिक वार्ता नहीं की है। माना जा रहा है कि मोदी और आबे के बीच अच्छे व्यक्तिगत संबंध हैं। चीन के लिए मोदी-आबे की दोस्ती माथे पर लकीरें खींच सकती है।

एक-दूसरे की जरूरत
यदि अर्थव्यवस्था पर बात करें तो इस समय जापानी अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छी नहीं है। भारत की अर्थव्यस्था भी बहुत बेहतर नहीं है। आर्थिक विश्लेषकों की मानें तो जापान उस स्थिति में नहीं है, जिस स्थिति में वह दस साल पहले हुआ करता था।

हार्ड कोर
जापान की कंपनियाँ बड़ी तादाद में भारत में कारोबार कर रही हैं, लेकिन शायद भारतीय कंपनियाँ जापान में कारोबार के लाभों का भरपूर मुनाफा नहीं उठा पा रही हैं। जापान में कई भारतीय तकनीकी कंपनियां हैं, यहां पर वो व्यवसाय नहीं कर पा रही हैं, क्योंकि वो हाई एंड कारोबार करना चाहते हैं और लो एंड कारोबार चीन को हस्तांतरित हो जाता है।

डिफेंस को डिफेंड
एक विज़न यह भी है कि नौसेना के आधुनिकीकरण में जापान, भारत की मदद कर सकता है। जापान में इस संबंध में क़ानून पास हो गया है तो जापान भारत को निर्यात भी कर सकता है। ऐसे में दोनों एक-दूसरे के पूरक साबित होंगे।

मददगार है जापान
स्टर्न फ्रेट कॉरिडोर हो या दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर या फिर दिल्ली और बेंगलुरु मेट्रो रेल प्रोजेक्ट। सभी जापान की मदद से बन रहे हैं।
माना जा रहा है कि जापान की ओर अगर फंड मिलता है तो स्मार्ट सिटी, रेलवे, सोलर और गंगा को साफ करने वाली याेजनाओं के साथ ही बुलेट ट्रेन के पहिए भी भारतीय सरज़मीं पर दौड़ सकते हैं।

भारत में है जापान
मौजूदा वक्त में कई जापानी कंपनियां जैसे डोकोमो, सुजुकी, दायची सैंको, टोयोटा ज्यादा मुनाफे में नहीं चल रही हैं। इन जापानी कंपनियों को अपना भविष्य भारत में उज्जवल दिखाई दे रहा है। इसी पहल के साथ भारतीय कंपनियों में भी जापान से लाभ की उम्मीद है।












Click it and Unblock the Notifications