देश के सबसे लंबे डबल डेकर पुल का पीएम मोदी ने किया उद्घाटन, अर्जुन टैंक का वजन झेलने में भी सक्षम
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम के डिब्रूगढ़ में देश के सबसे लंबे रेल-रोड पुल बोगीबील का उद्घाटन किया। बोगीबील पुल असम से अरुणाचल को जोड़ेगा। ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगीबील पुल इंडो-चीन सीमा के लिए भी काफी महत्व रखता है। ये पुल भारतीय सेना के सबसे वजनी अर्जुन टैंक का वजन झेलने में भी सक्षम है। बोगीबील पुल असम और अरुणाचल प्रदेश के लोगों के लिए एक प्रकार से वरदान साबित होगा। बोगीबील उत्तरी असम से डिब्रूगढ़ को सड़क मार्ग से जोड़ने का काम भी करेगा।

इस पुल के शुरू होने के बाद तिनसुकिया-नाहरलगुन इंटरसिटी एक्सप्रेस सप्ताह में पांच दिन इससे गुजरेगी। 4.9 किलोमीटर लंबे इस पुल की मदद से तिनसुकिया से अरुणाचल प्रदेश के नाहरलगुन तक की रेलयात्रा में 10 घंटे कम लगेंगे।

तीन लेन की सड़कों और दोहरे ब्रॉड गेज ट्रैक के साथ किया गया है निर्माण
चीन के साथ भारत की 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा अरुणाचल प्रदेश में है। बोगीबील पुल असम में डिब्रूगढ़ शहर से 17 किमी दूर स्थित है और इसका निर्माण तीन लेन की सड़कों और दोहरे ब्रॉड गेज ट्रैक के साथ किया गया है। ये देश का सबसे लंबा डबल डेकर पुल है। इस परियोजना के महत्व को ध्यान में रखते हुए साल 2007 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था।

1997 में रखी गई थी आधारशीला
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने 22 जनवरी, 1997 को इस पुल की आधारशिला रखी थी। लेकिन कुछ दिक्कतों के कारण इसका कार्य शुरू होने में देरी हुई। इस पर काम 21 अप्रैल, 2002 को तत्कालीन वाजपेयी सरकार के समय में शुरू हुआ सका। पुल का शुभारंभ 25 दिसम्बर यानी पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर किया जा रहा है।

सुरक्षा के नजरिए से पुल का बहुत महत्व
इस पुल के शुरू होने के बाद तिनसुकिया-नाहरलगुन इंटरसिटी एक्सप्रेस सप्ताह में पांच दिन इससे गुजरेगी। 4.9 किलोमीटर लंबे इस पुल की मदद से तिनसुकिया से अरुणाचल प्रदेश के नाहरलगुन तक की रेलयात्रा में 10 घंटे कम लगेंगे। ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी किनारे पर रहने वालों की असुविधा इस पुल के शुरू होने से काफी हद तक कम हो जाएगी। इसकी लागत को 3230.02 करोड़ रूपए से बढ़ाकर 5,960 करोड़ रूपए कर दिया गया था। पुल की लंबाई पहले की निर्धारित 4.31 किलोमीटर थी जिसे बढ़ाकर 4.94 किलोमीटर किया गया था। इस पुल का सेवा काल 120 साल तक होने का दावा किया जा रहा है।

लड़ाकू विमान भी आपात स्थिति में उतर सकता है
ये पुल रक्षा बलों और उनके उपकरणों के आवागमन के नजरिए से भी काफी फायदेमंद साबित होगा। इस तरह पूर्वी क्षेत्र की राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाने का काम भी करेगा। इस पुल का निर्माण इस तरह से किया गया है कि आपात स्थिति में एक लड़ाकू विमान भी इस पर उतारा जा सके। अर्जुन टैंक के वजन को भी झेलने में ये पुल सक्षम बताया जा रहा है।












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