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लाल किले पर सबसे ज्‍यादा बार तिरंगा फहराने वाले पहले गैर-कांग्रेसी पीएम बने मोदी, लगातार सांतवीं बार फहराया तिरंगा

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार और स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से देश की जनता को संबोधित किया। कोरोना वायरस महामारी के काल में देश अपना 74वां स्‍वतंत्रता दिवस मना रहा है। पीएम मोदी ने तिरंगा लहराया और देश के नाम अपना संबोधन दिया। वह अब देश के पहले ऐसे गैर- कांग्रेसी पीएम हैं जिनके नाम लाल किले पर सबसे ज्‍यादा बार तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड दर्ज है।

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    पूर्व पीएम वाजपेयी ने छह बार लहराया तिरंगा

    पूर्व पीएम वाजपेयी ने छह बार लहराया तिरंगा

    पीएम मोदी ने शनिवार को सांतवी बार लाल किले से तिरंगा फहराया है। ऐसा करते ही वह देश के पहले ऐसे पीएम बन गए जो कांग्रेस पार्टी से नहीं हैं। उनसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर यह रिकॉर्ड दर्ज था। वाजपेयी ने छह बार लाल तिरंगा लहराया था। पीएम मोदी का पहला कार्यकाल 26 मई 2014 को शुरू हुआ और उन्‍होंने देश के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। नरेंद्र मोदी का पीएम के रूप में पहला कार्यकाल 2019 में समाप्त हुआ। पिछले वर्ष आम चुनाव हुए और प्रचंड बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर सत्ता में वापसी की। 30 मई 2019 को उन्‍होंने दोबारा देश के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली।

    साल 2014 से तिरंगा फहरा रहे मोदी

    साल 2014 से तिरंगा फहरा रहे मोदी

    अब तक के उनके कार्यकालों को जोड़ देने पर वह सबसे लंबे समय तक देश की सेवा करने वाले चौथे पीएम भी बन गए हैं। पीएम मोदी अब तक साल 2014, 2015, ‍2016, 2017, 2018, 2019 और 2020 में सात बार तिरंगा फहरा चुके हैं। आजादी के बाद यानी साल 1947 से लेकर 2019 तक देश के 15 प्रधानमंत्री बने। शनिवार को पूरे समारोह के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया। लाल किले के आसपास पांच स्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया है, जिसमें एनएसजी के स्नाइपर, एलीट स्वाट कमांडो और काइट कैचर्स की टीम भी तैनात रहेगी।

    नेहरु ने दिया आजादी का पहला भाषण

    नेहरु ने दिया आजादी का पहला भाषण

    साल 1947 से लेकर आज तक लाल किला आजादी के जश्न का एक बड़ा गवाह बना हुआ है। सन् 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसी लाल किले से ऐतिहासिक भाषण दिया और तिरंगा फहराया। लाल किला साल 1648 में मुगल सम्राट शाहजहां के शासनकाल में बनाया गया था। इसे उस्ताद अहमद लाहौरी ने डिजाइन किया था। इसे बनाने वाले प्रमुख कारीगर हामिद और अहमद थे। इसमें बड़े पैमाने पर लाल रंग के पत्थरों का प्रयोग हुआ और इसी वजह से इसे लाल किला कहा जाता है। यमुना के किनारे बना यह ऐतिहासिक किला 35 फीट ऊंची दीवारों से घिरा है।

    लाहौरी गेट से संबोधन की जगह तक पहुंचते पीएम

    लाहौरी गेट से संबोधन की जगह तक पहुंचते पीएम

    लाहौरी गेट, लाल किले का मुख्‍य द्वार है और जब कभी भी प्रधानमंत्री तिरंगा फहराने जाते हैं तो इसी गेट का प्रयोग करते हैं। इस गेट के रास्‍ते ही वह उस जगह पहुंचते हैं जहां से वह देश के नाम संबोधन देते हैं। इस गेट का नाम लाहौरी गेट इसलिए पड़ा क्‍योंकि इसकी दिशा पाकिस्‍तान के लाहौर की तरफ है। इस किले का दूसरा मुख्‍य द्वार दिल्‍ली गेट है। कहते हैं कि जब शाहजहां को नजरबंद किया गया तो उन्‍होंने इस गेट की आलोचना करते हुए औरंगजेब को लिखा, 'तुमने किले को एक दुल्‍हन बनाया और फिर इस पर पर्दा लगा दिया।'

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