तो अमेरिका से जारी ट्रेड वॉर की वजह से पीएम मोदी को चीन बुलाया है जिनपिंग ने!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस हफ्ते चीन की यात्रा पर जाएंगे और चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। दुनिया के दो सबसे ज्‍यादा आबादी वाले देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्षों की मुलाकात के जरिए आपसी तनाव को कम करने की कोशिशें की जाएंगे।

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस हफ्ते चीन की यात्रा पर जाएंगे और चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। दुनिया के दो सबसे ज्‍यादा आबादी वाले देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्षों की मुलाकात के जरिए आपसी तनाव को कम करने की कोशिशें की जाएंगे। डोकलाम विवाद के बाद दोनों देशों के बीच तनाव एक नए स्‍तर पर पहुंच गया था। पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच मुलाकात शुक्रवार और शनिवार को हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान में होगी। इस मीटिंग के जरिए दोनों देशों के बीच वार्ता की प्रक्रिया और बढ़ाना है। सिर्फ इतना ही नहीं अगर मुलाकात कामयाब रही तो फिर भारत और चीन के बीच व्‍यापार को भी यह काफी आगे तक बढ़ा सकती है। आपको बता दें कि जिनपिंग और मोदी ऐसे समय में मिल रहे हैं जब अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर काफी गंभीर हो गया है। अमेरिकी मीडिया ब्‍लूमबर्ग की ओर से जारी एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है।

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    PM Modi की XI Jinping से मुलाकात के पीछे वजह है America से China का Trade war । वनइंडिया हिंदी
    दुनिया की जीडीपी का 18% हैं भारत-चीन

    दुनिया की जीडीपी का 18% हैं भारत-चीन

    भारत और चीन दोनों देश न सिर्फ दुनिया की एक तिहाई आबादी में योगदान करते हैं बल्कि इनकी जीडीपी दुनिया की कुल जीडीपी का 18% है। इसके अलावा दोनों की मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दोनों ही देश अपने-अपने देशों पर मंडरा रहे खतरों को कम करना चाहते हैं। एक तरफ चीन को अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की ओर से ट्रेड वॉर को लेकर दी गई धमकी का सामना करना है तो वहीं पीएम मोदी साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले देश की अर्थव्‍यवस्‍था को पटरी पर लाना है।

    दोनों देशों के लिए फायदेमंद है मुलाकात

    दोनों देशों के लिए फायदेमंद है मुलाकात

    बीजिंग में सिंगहुआ यूनविर्सिटी में अंतरराष्‍ट्रीय संबंधों पर रिसर्च कर रहे कियान फेंग कहते हैं कि चीन और भारत जैसे दो बड़े देशों के बीच जल्‍दी-जल्‍दी मुलाकात होना काफी असाधारण बात है। उनकी मानें तो एक शांतिपूर्ण बॉर्डर और आपस में फायदेमंद व्यापारिक साझेदारी निश्चित तौर पर दोनों देशों के हित में है। इस वजह से दोनों पक्षों को द्विपक्षीय संबंधों में तेजी से सुधार लाना होगा। पीएम मोदी और राष्‍ट्रपति जिनपिंग के बीच जून में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) समिट के लिए एक और मुलाकात होगी। यह मुलाकात चीन के पश्चिम में स्थित पोर्ट सिटी क्‍यूइंगदाओ में होगी। दोनों ही नेताओं के पास घरेलू स्‍तर पर काफी मजबूत वजहें हैं जो उन्‍हें कहीं न कहीं आपसी तनाव को कम करने के लिए मजबूर कर रही हैं।

    अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर ने किया जिनपिंग का मजबूर

    अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर ने किया जिनपिंग का मजबूर

    कियान फेंग कहते हैं कि अमेरिका के साथ जारी ट्रेड वॉर ने चीन को मजबूर कर दिया है कि वह भारत के लिए एक समझदारी भरा रवैया रखे। दूसरी ओर भारत में पीएम मोदी की ओर से आर्थिक और सामाजिक सुधारों की गति अब धीमी पड़ चुकी है। वैश्विक स्‍तर पर मौजूद आर्थिक हालातों ने भारत में आर्थिक खतरे को बढ़ा दिया है। पीएम मोदी की मुलाकात से पहले बीजिंग में एससीओ में शामिल देशों के विदेश मंत्रियों के बीच मीटिंग हुई है। चीन और भारत दोनों ही देशों ने अपने-अपने विदेश मंत्रियों की ओर से जोर देकर इस बात को कहा है कि मोदी और जिनपिंग की मुलाकात के पीछे सीमा विवाद से जुड़ा रणनीतिक पहलू है। चीन के विदेश मंत्री वांग ई ने कहा है कि जिनपिंग और मोदी दोनों ही मुलाकात के दौरान दुनिया भर में हो रहे बड़े बदलावों को लेकर बातचीत होगी। इसके साथ ही दोनों नेता भारत और चीन के रिश्‍तों से जुड़े रणनीतिक और दीर्घकालिक मसलों पर भी अपने विचार साझा करेंगे।

    मिल सकती है बड़ी सफलता

    मिल सकती है बड़ी सफलता

    पॉलिटिकल रिस्‍क फर्म यू‍रेशिया ग्रुप के एशिया डायरेक्‍टर शैलेश कुमार के मुताबिक दोनों पक्षों की ओर से सभी औपचारिकताओं को किनारे कर दिया गया है। इस एक बात ने उम्‍मीद जगाई है कि दोनों देश किसी और नए सीमा विवाद से पहले एक बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि इस मीटिंग को एक अनौपचारिक मुलाकात बताया जा रहा है। ऐसे में दोनों पक्ष एक आजाद माहौल में हर मुद्दे पर बिना किसी औपचारिकता के चर्चा कर पाएंगे। वहीं शैलेश ने इस तरफ भी ध्‍यान दिलाया है कि दोनों नेता ऐसे समय में मिल रहे हैं जब गर्मी का मौसम है और पहाड़ों पर फिर से सेनाओं का जमावड़ा बढ़ता है। वहीं पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर की मानें तो यह मुलाकात निश्चित तौर पर एक साहसिक कदम है।

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