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2025 तक दुनिया भर के समुद्र में जमा हो जाएगा 250 मिलियन टन प्लास्टिक

By Vikashraj Tiwari
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    नई दिल्ली। प्लास्टिक कचड़े को लेकर हैरान करने वाला आकड़ा सामने आया है जिसके मुताबिक 2025 तक दुनिया भर के समुद्र में 250 मिलियन टन प्लास्टिक जमा हो जाएगा। एक विश्लेषण के मुताबिकहर साल महासागरों में लगभग आठ मिलियन टन प्लास्टिक पहुंचता है। 2025 तक इसकी वैश्विक मात्रा लगभग 250 मिलियन टन हो जाएगी। हाल ही में जारी किए गए इंटरनेशनल यूनियन फॉर कन्वर्सेशन ऑफ नेचर (IUCN) के विश्लेषण पत्र में चेतावनी दी गई है कि 'प्लास्टिक सूप' में जहरीले रसायनहोते हैं, जो समुद्री प्रजातियों और मनुष्यों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।

    समुद्र में तेजी से प्लास्टिक कचरा का स्तर बढ़ रहा है

    समुद्र में तेजी से प्लास्टिक कचरा का स्तर बढ़ रहा है

    हर साल समुद्र में तेजी से प्लास्टिक कचरा का स्तर बढ़ रहा है और यह इसी तरह जारी रहा तो यह समुद्री जीवों के लिए खतरा पैदा कर सकती है। खासतौर से मछलियों के लिए यह सबसे बड़ा संकट है। विश्लेषण में कहा गया है कि समुद्री प्रजातियां प्रदूषित प्लास्टिक को सीधे खाती हैं, और प्रदूषित शिकार खाने से कई समस्याए पैदा हो सकती हैं। समुद्र में प्लास्टिक जैसे दूषित पदार्थों की मात्रा को कम करने के लिए, लेखकों ने प्लास्टिक उत्पादों के जीवन-चक्र डिजाइन में मुद्दों को संबोधित करने और उन उत्पादों को बनाने की सिफारिश की है जो खतरनाक पदार्थों के उपयोग को कम करते हैं, जिसे 'हरित रसायन शास्त्र' कहा जाता है।

    समुद्री खाद्य श्रृंखला के लिए एक गंभीर खतरा है

    समुद्री खाद्य श्रृंखला के लिए एक गंभीर खतरा है

    सूक्ष्म-प्लास्टिक समुद्री खाद्य श्रृंखला के लिए एक गंभीर खतरा है। भारतीय उपमहाद्वीप के समुद्र में जैसे-जैसे प्लास्टिक मलबे का स्तर बढ़ रहा है, उसका असर मछलियों के साथ-साथ समुद्री पक्षियों पर देखने को मिल रहा है। समुद्री मछली जैसे कि सार्डिन से लेकर ट्यूना तक कई किस्म की मछलियों और समुद्री पक्षियों में प्लास्टिक के स्तर में वृद्धि पाया गया है।

    प्लास्टिक का सही इस्तेमाल हो सकता है

    प्लास्टिक का सही इस्तेमाल हो सकता है

    प्लास्टिक का इस्तेमाल अच्छी चीजों के लिए किया जा सकता है। विकास में इसका भरपूर उपयोग होना चाहिए। लेकिन प्लास्टिक का लापरवाह प्रबंधन ऐसी समस्याएं पैदा कर रहा है जो भूमि और सागर दोनों में संसाधनों के क्षरण को बढ़ावा दे रहा है। यदि व्यवस्थित और वैज्ञानिक रूप से इसका इस्तेमाल किया जाए, तो प्लास्टिक को एक अच्छा ऊर्जा-बचत संसाधन बनाया जा सकता है। अगर देश के सभी सड़कों का निर्माण प्लास्टिक से शुरू कर दें तो भारत को प्लास्टिक बाहर के देशों से आयात करना पड़ेगा। टार के साथ प्लास्टिक को मिक्स करना कोई बड़ी चीज नहीं है। यह बेहद आसान है। इस तरह प्लास्टिक का इस्तेमाल भी हो जाएगा और हमारा समुद्री जल जीवन भी प्रभावित नहीं होगा।

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    English summary
    Plastic In Oceans,global quantity will nearly double to 250 million tonnes by 2025

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