'आज देश में बदल गया है जनहित याचिका का मतलब', CJI एनवी रमणा ने पीएम मोदी की उपस्थिति में कही यह बात
नई दिल्ली, अप्रैल 30। देश के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमणा ने देश की अदालतों में दायर की जाने वाली महत्वहीन याचिकाओं पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि आज देश में जनहित याचिकाओं की अवधारणा पूरी तरह से बदल चुकी है, अब जनहित याचिकाएं व्यक्तिगत हित याचिका में बदल गई हैं, लोग अपने निजी हित के लिए जनहित याचिकाओं को दायर करते हैं।
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पीएम मोदी की उपस्थिति में कही यह बातें
मुख्य न्यायाधीश एनवी रमणा शनिवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी की भी उपस्थिति थी। पीएम की उपस्थिति के दौरान ही उन्होंने यह बातें कहीं। इस कार्यक्रम में पीएम और सीजेआई के अलावा सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश और सभी राज्यों के मुख्यमंत्री भी उपस्थित थे।
हर किसी को अपने कर्तव्यों का करना होगा पालन- रमणा
इस कार्यक्रम में एनवी रमणा ने कहा कि संविधान में तीनों अंगों के बीच शक्तियों का बंटवारा किया गया है और इन तीनों के बीच सामंजस्य बिठाने से ही लोकतंत्र मजबूत होगा, इसीलिए हर किसी को अपने-अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए और एक लक्ष्मणरेखा को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायिक निर्देशों के बावजूद सरकारों द्वारा जानबूझकर निष्क्रियता दिखाना लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।
क्या कहा मुख्य न्यायाधीश ने?
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि देश की अदालतों में महत्वहीन मुकदमों का बढ़ना एक चिंता का विषय है। उदाहरण के लिए जनहित याचिका की अर्थपूर्ण अवधारणा कभी-कभी निजी हित याचिका में बदल जाती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि जनहित याचिका ने जनहित में बहुत काम किया है, लेकिन आजकल जनहित याचिका उन लोगों के लिए एक औजार बन गई है, जो राजनीतिक मामलों या कॉरपोरेट प्रतिद्वंद्विता को सुलझाना चाहते हैं। कभी-कभी परियोजनाओं को रोकने या सार्वजनिक प्राधिकरणों पर दबाव बनाने के लिए भी इसका दुरुपयोग किया जाता है।












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