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बलात्कारियों से बचने के लिए 1 महीने तक जंगल में छिपी रहीं दो महिलाएं, जब पुलिस को मिलीं तो बयां किया दर्द

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस संकट में एक तरफ जहां देश में लॉकडाउन लागू है वहीं, दूसरी ओर दो आदिवासी महिलाओं के साथ हुई एक शर्मनाक घटना सामने आई है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में लॉकडाउन के दौरान उनको बंधक बनाकर रखा गया, इस दौरान उनके साथ गैंगरेप और हिंसा भी की गई। किसी तरह दोनों महिलाओं ने खुद को बचाया और करीब एक महीने तक जंगल में छिपी रहीं, जहां से उन्हें अब रेस्क्यू कर लिया गया है।

एक महीने तक जंगल में लिया शरण

एक महीने तक जंगल में लिया शरण

प्राप्त जानकारी के मुताबिक दोनों महिलाएं झारखंड के दुमका की रहने वाली थीं और बेंगलुरु में मजदूरी करती थीं। बेंगलुरु पुलिस ने बताया कि दोनों महिलाओं को कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था, उनके साथ गैंगरेप व मारपीट की गई है। इस दौरान उन्हें अपनी जान बचाने के लिए लगभग एक महीने तक जंगल में छिपना पड़ा। इस मामले में पुलिस ने 3 आरोपिरयों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना संकट में लॉकडाउन से पहले महिलाओं को फैक्ट्री से निकाल दिया गया था।

लॉकडाउन होने के बाद कर्नाटक में फंस गईं

लॉकडाउन होने के बाद कर्नाटक में फंस गईं

लॉकडाउन लागू होने के कारण दोनों अपने घर दुमका भी नहीं जा सकीं, उनके छोटे बच्चे हैं और वह आमदनी ना होने के कारण पैसों के लिए मोहताज हो गईं। उनकी हालत देखते हुए बेंगलुरु में एक ठेकेदार ने दोनों को एक निर्माणाधीन मकान में रखा। आरोप है कि ठेकेदार ने मदद के बहाने अन्य दो लोगों के साथ महिलाओं का गैंगरेप किया और मारपीट भी की। यह मामला बेंगलुरु की कर्नाटक जनशक्ति और स्टेंडर्ड वर्कर्स एक्शन नेटवर्क (स्वान) संगठन की पहल से सामने आया है।

2019 में हुईं थीं मानव तस्करी की शिकार

2019 में हुईं थीं मानव तस्करी की शिकार

रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला मजदूर साल 2019 में मानव तस्करी की भी शिकार हुई थीं। अक्टूबर 2019 में दुमका से पहले वह दिल्ली लाई गईं फिर यहां से उन्हें दूसरा व्यक्ति 9000 रुपये प्रति माह पगार पर नौकरी दिलाने के नाम पर बेंगलुरु ले गए। वहां उन्होंने एक केमिकल फैक्ट्री में काम करना शुरू किया। आरोप है कि इस फैक्ट्री में दोनों से बंधुआ मजदूर की तरह काम लिया जाता था।

सीएम हेमंत सोरेन ने लिया एक्शन

सीएम हेमंत सोरेन ने लिया एक्शन

खबरों के मुताबिक 15 घंट काम करने के बाद उन्हें वेतन के रूप में सिर्फ 200 रुपये प्रति सप्ताह दिए जाते थे। मामला सामने आने के बाद झारखंड जनाधिकार महासभा नामक संगठन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इन महिलाओं के बारे में जानकारी दी। साथ ही इनके साथ हो रहे शोषण की भी जानकारी दी है। इस मामले में अब सीएम हेमंत सोरेन के झारखंड पुलिस को हस्तक्षेप करने का आदेश दिया है। अभी तक इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।

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English summary
Karnataka police rescues two women hiding in the forest for a month after physical assualt during lockdown
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