पेट्रोल पंप पर कार्ड पेमेंट की फीस हो सकती है आधी, अहम बैठक आज
नई दिल्ली। तेल कंपनियां कार्ड से भुगतान के दौरान लिए जाने वाले चार्ज को कम करने की बैंकों से मांग कर रही है। इस बाबत आज होने वाली बैठक में तमाम तेल कंपनियां बैंकों से इस बात की मांग करेंगी कि कार्ड से भुगतान के दौरान ली जाने वाली फीस को आधा किया जाए। इन कंपनियों में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम बैंकों से इस बात की मांग करेंगी। एक उच्च अधिकारी ने बताया कि हम इस बाबत बैंकों से 8 जनवरी को बैठक करेंगे, क्योंकि हम पहले से किए जा रहे भुगतान से अधिक भुगतान नहीं करना चाहते हैं। नए नियमों के अनुसार फीस काफी ज्यादा है, हम चाहते हैं कि बैंक इसे आधा करें।

कितना है एमडीआर
कार्ड से भुगतान करने के बाद हर व्यापारी को मर्चेंट डिस्काउंट रेट देना होता है, यह तेल कंपनी को देना होता है, जोकि बैंक के खाते में जाता है जो पेट्रोल पंप में स्वाइप मशीन लगाती है। एमडीआर का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाता है। फरवरी 2017 से तेल कंपनियां ही इस पैसे का भुगतान बैंकों को करती हैं। 31 दिसंबर तक यह नियम था कि 1000 रुपए तक के भुगतान पर एमडीआर 0.25 फीसदी था, जबकि 1000 से 2000 रुपए के बीच एमडीआर 0.5 फीसदी था और इससे अधिक के भुगतान पर एमडीआर 1 फीसदी था। लेकिन रिजर्व बैंक ने इसे 6 दिसंबर से बदल दिया। जिन लोगों का वार्षिक राजस्व 20 लाख रुपए से कम है उन्हें 200 रुपए या उससे कम के भुगतान पर एमडीआर 0.4 फीसदी देना होगा। जबकि अन्य लोगों को 1000 रुपए पर एमडीआर 0.9 फीसदी देना होगा। यह नए रेट 1 जनवरी से लागू हो गए हैं। इसका मतलब यह है कि तेल कंपनियों को पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना होगा।

बैंक नहीं करेंगी खर्च को वहन
हालांकि यह मुमकिन है कि तेल कंपनियों की मांग को बैंक मानने से इनकार कर दे। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार और रेगुलेटरी निर्दश के चलते तेल कंपनियों को इस फीस का भुगतान करना पड़ रहा है। बैंकों का इसमे सीधा रुख है कि वह इस फीस को वहन नहीं करेंगे। उनका कहना है कि पेट्रोल कंपनियों को होने वाली कमाई का भुगतान हम क्यों करें, हालांकि बैंक इस बाबत बात करने के लिए तैयार हैं। बैंको का कहना है कि पेट्रोल कंपनियों को इस बोझ को वहन करना होगा क्योंकि उन्हें इस बाबत मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने का खर्च वहन करना होता है।

नोटबंदी के समय खत्म हो गया था एमडीआर
15 दिसंबर को सरकार ने फैसला लिया था कि डिजिटल पेमेंट के दौरान 2000 रुपए तक के भुगतान पर एमडीआर देना होगा। 2016-17 में डेबिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों की संख्या में तीन गुना की बढ़ोतरी हुई थी और यह 2.4 बिलियन तक पहुंच गया था, जोकि 2014-15 में 800 मिलियन था। इसके द्वारा कुल भुगतान 3.3 ट्रिलियन रुपए है, जोकि पहले 1.2 ट्रिलियन था। नोटबंदी के बाद सरकार ने एमडीआर को वापस ले लेयि था, इसे 31 दिसंबर 2016 तक के लिए खत्म कर दिया गया था ताकि लोग कैशलेश भुगतान की ओर आगे बढ़े। लेकिन जब बैंकों ने जनवरी 2017 में एमडीआर की मांग की तो पेट्रोल कंपनियों ने इस बात की धमकी दी कि अगर उनसे यह पैसा मांगा गया तो वह कार्ड के जरिए भुगतान लेना बंद कर देंगे।












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