Pegasus spyware Row: SC से बोली सरकार- 'नहीं हुई किसी भी सॉफ्टवेयर से जासूसी, ये बहस का मुद्दा नहीं'

नई दिल्ली, 13 सितंबर। पेगासस जासूसी मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें केंद्र की ओर से अदालत में कहा गया है कि 'किसी भी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किसी की भी जासूसी के लिए नहीं हुआ है और ना ही ये बहस का विषय है।' जिस पर कोर्ट ने सरकार से प्रश्न किया कि अगर सरकार इस बारे में हलफनामा दाखिल नहीं करना चाहती है तो हमें आदेश पारित करना होगा।

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    पेगासस जासूसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट आज करेगा सुनवाई

    तो सरकार की ओर से कहा गया कि 'हमने इस बारे में पहले ही कहा है कि हमारे पास कुछ भी छिपाने के लिए नहीं है। अगर हलफनामा दायर किया जाएगा तो इस पर बहस नहीं कर सकते हैं। हमने इस बारे में विशेषज्ञों की समिति का गठन करने का फैसला किया है, जो इस मामले की निष्पक्ष जांच करेगी।' आपको बता दें कि इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच कर रही है। कोर्ट ने 9 याचिकाओं पर 7 सितंबर को इस मामले में सुनवाई करते हुए केंद्र को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया था, जिस पर आज सरकार ने उपरोक्त बातें कोर्ट में कहीं।

    गौरतलब है कि कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है उसमें कहा गया है कि पत्रकारों और नेताओं की जासूसी कराना बहुत बड़ा अपराध है, ये हमारी स्वतंत्रता पर प्रहार है। मालूम हो कि ये याचिकाएं पत्रकार एनराम और शशिकुमार, सीपीएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास और वकील एमएल शर्मा की ओर से दायर की गई हैं।

    'हमारे पास कुछ भी छुपाने को नहीं है'

    इससे पहले कोर्ट की सुनवाई में हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि स्पाइवेयर पेगासस जैसे सॉफ्टवेयर दूसरे देश के लोग खरीद रहे हैं। हमारे पास कुछ भी छुपाने को नहीं है, जो है सामने हैं लेकिन जिस तरह से याचिकाओं में बातें की गई है, उससे जरूर भारत की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

    क्या है मामला

    आपको बता दें कि फ्रांस की संस्था Forbidden Stories और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ये कहकर सनसनी पैदा कर दी है कि कई देश की सरकारें इजरायली कंपनी NSO के स्पाइवेयर पेगासस के जरिए पत्रकारों, कानूनविदों और नेताओं की जासूसी करा रही है, जिसमें इंडिया भी शामिल है। यहां भी कई पत्रकार और नेतागणों की जासूसी पेगासस के जरिए हुई है। जिसके बाद से कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है, हालांकि मोदी सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया है और कहा गया है कि सरकार ने किसी की भी जासूसी नहीं कराई है।

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