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पटना: पानी निकलने तक की सुविधा नहीं फिर ज़मीन इतनी महंगी क्यों?

By नीरज सहाय

NIRAJ SAHAI /BBC

देश में सबसे तेज़ी से बढ़ती आबादी वाले राज्य बिहार की राजधानी पटना में ज़मीन की मांग ज़्यादा होने की वजह से यहां फ़्लैट और मकानों की कीमतें आसमान छू रही हैं. हालांकि यह शहर अपने लोगों के लिए मूलभूत सुविधायें तक उपलब्ध कराने में भी नाकाम साबित होता रहा है.

ग़ैर योजनाबद्ध तरीके से बसे पटना में ज़मीन अति सीमित है और प्रदेश की आबादी के बढ़ने की रफ़्तार भी सबसे तेज है.

करीब 12 करोड़ की आबादी वाले राज्य बिहार में लगभग हर साल बारिश से जानलेवा जलजमाव, बाढ़ सूखा और आपराधिक मामलों में बढ़ोतरी होती रहती है.

व्यवस्थित और स्वच्छ शहर के मापदंड से कोसों दूर रहने के बावजूद इस राज्य के हर व्यक्ति के मन में यह इच्छा होती है कि राजधानी पटना में उसका आशियाना हो.

वरिष्ठ वास्तुविद जेके लाल का मानना है कि बिहार के लोग पटना में इसलिए बसना चाहते हैं क्योंकि यहां रहने के बावजूद वह अपनी मूल जगह से ज़्यादा जुड़ा रहते हैं और उन्हें अपने मूल स्थान से अधिक सुविधा भी उपलब्ध होती है.

यहां ज़मीन- मकान खरीदने से लोगों का उनके मूल स्थान से भौगौलिक और भावनात्मक जुड़ाव बना रहता है.

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पटना
Niraj Sahai/ BBC
पटना

बाकी बिहार से बेहतर है पटना

वो कहते हैं, "पटना एक पुराना शहर है और नए पटना के लिए टाउन प्लानिंग को लेकर सम्बन्धित विभाग संवेदनशील नहीं रहे हैं. अतिक्रमण की समस्या स्मार्ट सिटी बनाने में बड़ा रोड़ा रहा है."

थोड़ी सी बारिश में शहर के कुछ हिस्से डूब जाते हैं और यह समस्या कई दशक से बनी हुई है. सरकार को यह मालूम है, लेकिन इस मोर्चे पर सरकार विफल रही है.

राज्य के अन्य जिला मुख्यालयों की तुलना में पटना में सुविधाएं ज्यादा हैं. यहां बेहतर स्कूल-कॉलेज और अस्पताल हैं इसलिए राज्य के अन्य हिस्सों के लोग यहां आकर बसते हैं. पटना में महंगी ज़मीन रहने का एक कारण यह है.

दूसरा कारण सर्कल रेट (सरकारी दर) और बाज़ार भाव में भारी अंतर रहना है. ज़मीन का सरकारी भाव कम रहना और बाज़ार मूल्य अधिक रहने से एक ख़ास तबके के लिए जमीन में निवेश करना आसान होता है.

इस कारण भी यहां ज़मीन महंगी है.

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पटना
Niraj Sahai/BBC
पटना

जनसंख्या और जनसंख्या घनत्व का मसला

जेके लाल की बातों से स्पष्ट है कि बाज़ार और सरकारी भाव में भारी अंतर पटना में ज़मीन-मकान में काले धन को निवेश करने के रास्ते आसान बना रहे हैं.

वहीं वरिष्ठ पत्रकार एसए शाद के अनुसार पटना में आसमान छूते ज़मीन के दाम के दो कारण गिनाते हैं.

वो कहते हैं, "अन्य राज्यों की तुलना में बिहार का जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है. यहां करीब 1100 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर में लोग रहते-बसते हैं जबकि राष्ट्रीय औसत 350 का है. वहीं पटना में 1850 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर में हैं. ऐसे में आवासीय भूमि की भारी कमी है.''

पिछले एक दशक से अधिक की अवधि में बिहार का बजट 4,000 करोड़ से बढ़कर दो लाख करोड़ का हो गया है.

इस दौरान ख़ासा निर्माण कार्य हुआ है जिसके लिए बनने वाले डीपीआर में 10 से 11 प्रतिशत की राशि बतौर मुनाफ़ा मिलती है. इससे एक बहुत बड़ी राशि बाजार में आती है.

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पटना
Niraj Sahai/BBC
पटना

ज़मीन सीमित, लोग असीमित

वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने 90 के दशक में एक रिपोर्ट दिया था जिसमें कहा गया था कि सरकारी योजनाओं से जुड़ी राशि का 30 प्रतिशत भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है.

अगर इसे 20 प्रतिशत भी मान लिया जाए तो इस बात का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है कि इतने दिनों में कितना काला धन बाजार में आया होगा.

पटना में ज़मीन महंगी होने का यह मुख्य कारण है, जिसे लोग खरीदने को तैयार हैं, जबकि भूमि की उपलब्धता अति-सीमित है.

इनकी बातों से जाहिर है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भले ही यह दावा करते हैं कि भ्रष्टाचार पर उनका 'ज़ीरो टोलरेंस' रहता है, लेकिन वास्तविकता तो यह है कि भ्रष्टाचार को रोकने में यहां की सरकारें लगातार विफल रही हैं.

इससे लगातार अकूत काला धन पैदा होता रहा है और इस काले धन को निवेश करने का सबसे सुगम रास्ता लोगों को ज़मीन-मकान में नजर आता है.

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NIRAJ SAHAI /BBC

'भ्रष्टाचार और काला धन भी वजहें'

वरिष्ठ पत्रकार कुमार दिनेश पटना में ज़मीन और फ़्लैट के दाम बेतहाशा बढ़ने के तीन बड़े कारण गिनाते हैं.

उनके अनुसार,"पहला कारण देश में दूसरी सबसे आबादी वाले राज्य बिहार में जनसंख्या वृद्धि की तेज रफ़्तार, दूसरा सरकारी योजनाओं में बेलगाम भ्रष्टाचार और तीसरा राजधानी पटना में ज़मीन या मकान को सामाजिक हैसियत से जोड़ना.

इनमें से पहली दो बातें यानी जनसंख्या नियंत्रण और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में लगभग हर सरकार का विफल होना एक ऐसी परिस्थिति बनाता है जिसमें लोगों का काला धन पटना के सीमित आवासीय भू-भाग के दाम को आसमान पर पहुंचाने में सहायक रही हैं.

रही बात जनसंख्या नियत्रंण की तो ये लगभग सभी दलों के राजनीतिक एजेंडों से बाहर है.

पूर्व मुख्य सचिव वीएस दुबे का मानना है कि सरकार ने एकाध अपवादों जैसे राजेन्द्र नगर-कंकड़बाग के कुछ हिस्से को छोड़ कर पटना शहर को विकसित नहीं किया है.

पटना में शहरी विकास को लेकर सरकार ने कुछ नहीं किया है. यह शहर निजी लोगों के प्रयास से विकसित हुआ है और ज्यादातर हिस्सों में पटना का योजनाबद्ध तरीके से विकास नहीं हो पाया है.

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NIRAJ SAHAI /BBC

'इतनी महंगी ज़मीन तार्किक नहीं'

दुबे कहते हैं, "यहां बेहतर स्वास्थ्य-शिक्षा की व्यवस्था है और कुछ हद तक व्यापार भी है. जब बिहार का हर एक आदमी पटना में बसना चाहेगा तो उतनी जमीन उपलब्ध कहां से होगी? ज़ाहिर है, इससे जमीन की कीमत बढ़ेगी.

उनका मानना है कि पटना में इतनी महंगी जमीन कहीं से तार्किक नहीं है.

चूंकि सरकार की ओर से शहर को विकसित करने और मुहल्ले बसाने के लिए कोई योजना नहीं है इसलिए सड़क, बिजली और नाले हों या न हों लोग इसकी चिंता किये बगैर जमीन खरीदते हैं.

यह सब अत्यधिक मांग और न्यूनतम आपूर्ति क्षमता पर ही आधारित है. इस कारण भी ज़मीन के दर आसमान छू रहे हैं.

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पटना
Saroj Kumar/BBC
पटना

पलायन: एक बड़ी समस्या

एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टिट्यूट (आद्री) के निदेशक प्रोफ़ेसर पीपी घोष का मानना है कि पटना के शहरीकरण की समस्या जनसंख्या से सम्बन्धित है.

वो कहते हैं, "अतिरिक्त जनसंख्या को समाहित करने के लिए अतिरिक्त साधन चाहिये. इसके लिए आर्थिक साधन और ज़मीन चाहिये, लेकिन दुर्भाग्यवश पटना के संदर्भ में ज़मीन की समस्या बहुत गंभीर है.''

पीपी घोष के मुताबिक़, "पटना शहर को पूरब की ओर विस्तारित नहीं किया जा सकता क्योंकि उधर पुराना पटना है. पश्चिम में मिलिट्री कैंटोनमेंट है, उत्तर दिशा में गंगा नदी है और दक्षिण की ओर की ज़मीन काफी नीचे है.''

"रही बात आर्थिक संसाधनों की तो वह दूसरी समस्या है. पटना के शहरीकरण की समस्या जनसंख्या और यहां पर आर्थिक गतिविधि और जमीन का अतिसीमित रहना है. यहां फ़्लाईओवर बनाने के लिए काफ़ी खर्च किया गया, लेकिन उस तुलना में ड्रेनेज पर ध्यान नहीं दिया गया. प्राथमिकता ही गलत है."

पटना में दिल्ली के स्तर का एम्स अस्पताल नहीं है. जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय नहीं हैं, दिल्ली विश्वविद्यालय नहीं है. बेंगलुरु-हैदराबाद शहरों जैसे आईटी हब नहीं है और न ही मुंबई जैसी आर्थिक गतिविधि है. फिर भी यहां ज़मीन-मकान काफ़ी महंगे हैं. ऐसा क्यों है?

इसपर प्रोफ़ेसर घोष कहते हैं कि किसी भी पिछड़े राज्य में जहां इंडस्ट्री नहीं है, वहां ग़ैर कृषि गतिविधि सेवा क्षेत्र में ही होती है. सेवा क्षेत्र शुरूआती दौर में वहीँ विकसित होता है जहां प्रशासनिक मुख्यालय हो. पटना के संदर्भ में भी यही हो रहा है.

यहां बैंक, अस्पताल और यूनिवर्सिटी हैं जिसका फ़ायदा लेने के लिए राज्य के दूसरे शहरों से लोग पटना में पलायन कर रहे हैं. उस तुलना में ज़मीन की आपूर्ति नहीं हो पा रही जबकि पलायन हर दिन हो रहा है. इसलिए जमीन की कीमत बढ़ रही है.

BBC Hindi
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English summary
Patna: There is no facility to relese water despite this why is land so expensive?
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