संसदीय समिति ने लगातार स्कूलों के बंद रहने पर जताई चिंता, कहा- ये बच्चों के लिए खतरनाक

नई दिल्ली, 9 जुलाई: पिछले साल फरवरी में जब कोरोना महामारी ने दस्तक दी, तो सबसे पहले देश में स्कूलों को बंद किया गया। फिर जब साल के अंत में हालात सुधरे तो उन्हें दोबारा खोल दिया गया, लेकिन दूसरी लहर की वजह से फिर से ऑफलाइन क्लास पूरी तरह बंद हो गई। जिस पर अब संसदीय समिति ने चिंता व्यक्त की है। साथ ही साफ तौर पर कहा कि स्कूलों को बंद रखने के परिणामों की अनदेखी करना बहुत गंभीर है। स्कूलों को फिर से खोलना छात्रों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

Parliament

समिति के मुताबिक जब से स्कूल बंद हुए हैं, तब से परिवारों के सामाजिक ताने-बाने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा घर के कामों में बच्चों की भागीदारी भी बढ़ी है। सबसे जरूरी मुद्दा बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य है, जिस पर स्कूल बंद होने की वजह से गहरा प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में स्कूल नहीं खोलने के खतरे की अनदेखी नहीं की जा सकती है। मौजूदा वक्त में छोटे बच्चे घर की चार दीवारी में कैद हैं, ऐसे में स्कूल ना जा पाने की वजह से माता-पिता और बच्चों के संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

आपको बता दें कि सांसद विनय पी. सहस्रबुद्धे शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं, जिन्होंने हाल ही में अपनी रिपोर्ट संसद में पेश की। जिसमें उन्होंने स्कूल को खोलने के कुछ अहम सुझाव भी दिए हैं।

  • सभी छात्रों, शिक्षकों और उनसे जुड़े कर्मचारियों को पूरी तरह से वैक्सीनेट कर दें, ताकि संक्रमण का खतरा कम रहे।
  • छात्रों की संख्या को दो भागों में बांटकर दो पालियों में क्लास चलवाना।
  • मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को अनिवार्य कर देना।
  • उपस्थिति के वक्त थर्मल स्क्रीनिंग, सेनेटाइजर की व्यवस्था करना। इसके अलावा जिनके अंदर लक्षण हों, उन्हें अलग कर देना।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+