Parliament Winter Session: राम मंदिर उद्घाटन को लेकर RJD का तंज, मनोज झा बोले- भगवान भी PM से करेंगे सवाल
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर बने राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) का उद्घाटन इस महीने की 22 तारीख होना है। पीएम मोदी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आमंत्रण पर रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान में शामिल होंगे। ऐसे में संसद के शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) के दौरान राजद सांसद मनोज झा (MP Manoj Jha) ने केंद्र की पीएम मोदी नेतृत्व वाली सरकार को निशाने पर लिया है। संसद के सदन में अपने वक्तव्य में आरजेडी सांसद ने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है। ऐसे में जब श्री राम जन्मभूमि पर रामलला को प्रतिष्ठित किया जाएगा तो भगवान भी पीएम से सवाल करेंगे।
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान आरजेडी सांसद ने महंगाई को लेकर बीजेपी पर तंज कसा। राजद सांसद मनोज झा ने सोमवार को 22 जनवरी के अयोध्या कार्यक्रम को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर भगवान राम इस भव्य कार्यक्रम के बाद धरती पर अवतरित होंगे तो बेरोजगारी और महंगाई पर मोदी से सवाल करेंगे।

सांसद मनोज झा ने कहा, "मेरी आस्था मेरा निजी विषय है, इसके सार्वजनिक प्रदर्शन से भगवान भी दुखी होंगे। अगर 22 जनवरी की प्राण प्रतिष्ठा के बाद 'मर्यादा पुरूषोत्तम' खुद धरती पर आएं तो वह पीएम मोदी से सवाल पूछेंगे। वह पूछेंगे कि मेरे युवाओं के लिए रोजगार कहां है, देश में इतनी महंगाई क्यों है?"
बता दें कि इससे पहले कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने कहा था कि राम मंदिर कोई सबसे बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा नहीं है। इससे पहले राजद नेता तेज प्रताप यादव ने कहा, "भगवान राम तभी घर आएंगे जब आगामी लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी जीतेगी।"
वहीं आईएनडीए में शामिल दल के नेता सीताराम येचुरी और यूबीटी शिव सेना नेता संजय राउत अयोध्या में मंदिर के प्रतिष्ठा समारोह के दौरान आयोध्या आने से इनकार कर दिया।
इसको को लेकर बीजेपी ने आईएमडीआईए में शामिल दलों को निशाने पर लिया। बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा, "ये INDI गठबंधन के लोग सनातन पर लगातार हमला कर रहे हैं और हिंदू धर्म का अपमान कर रहे हैं। इनमें ईसाई धर्म या इस्लाम के बारे में कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं है। इनके मन में जो आता है वो बोल देते हैं। आज जब करोड़ों देश के लोग राम मंदिर जाने की तैयारी कर रहे हैं, उस मंदिर को गुलामी का प्रतीक कहना गलत है, जबकि मंदिर इस देश में मौजूद सांस्कृतिक गुलामी से मुक्ति का प्रतीक है।"












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