'Operation Sindoor' के बाद बौखलाया पाकिस्तान! भारत के इन 15 शहरों को क्यों बनाया टारगेट? क्या थी प्लानिंग?
Pakistani Army Attack in India 15 Cities: रात के अंधेरे में जब सब सो रहे थे, सरहद पार से मौत ने दस्तक दी - लेकिन भारतीय सेना जाग रही थी। 'ऑपरेशन सिंदूर' के ज़रिए जैश-ए-मोहम्मद के अड्डों को तबाह करने के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट अब खुलकर सामने आ गई है। साजिश रची गई थी-एक साथ भारत के 15 सामरिक शहरों को तबाह करने की। लेकिन सवाल यह नहीं कि हमला क्यों हुआ। सवाल यह है-इन्हीं 15 शहरों को ही क्यों चुना गया?
दरअसल, ये 15 शहर पाकिस्तान की आंखों में चुभते हैं। ये शहर भारत की सैन्य रीढ़, खुफिया नेटवर्क, औद्योगिक शक्ति और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स की धमनियां हैं। अगर ये टूटते, तो भारत की प्रतिक्रिया की गति धीमी पड़ती - और पाकिस्तान को मिलती 'जिहादी बढ़त।'

चक्रव्यूह: वो 15 शहर, जिनका निशाना बनना तय था
कश्मीर की नसों पर वार
- श्रीनगर: जहां से कश्मीर की सड़कों पर तैनात हर जवान का आदेश निकलता है। कश्मीर घाटी का मुख्यालय; राजनीतिक और सुरक्षा का केंद्र। यहां राष्ट्रीय राइफल्स और CRPF की मजबूत मौजूदगी।
- अवंतीपुरा: भारतीय वायुसेना का प्रमुख एयरबेस। आतंकी गतिविधियों के खिलाफ संचालन के लिए अहम।
- जम्मू: नॉर्दर्न कमांड का गढ़ - भारत की रणनीति का मस्तिष्क। पाकिस्तान से सटे इलाकों की निगरानी यहीं से होती है।
पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के लिए सबसे बड़ा खतरा - ये क्षेत्र आतंकवाद के खिलाफ भारत की फ्रंटलाइन हैं।
पंजाब की बंदूकें खामोश करने की कोशिश
- पठानकोट: पहले भी आतंकियों का शिकार बना (2016)- भारत की तीनों सेनाओं का टर्निंग पॉइंट।
- अमृतसर: अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास- वाघा बॉर्डर, गोल्डन टेम्पल - सांस्कृतिक और कूटनीतिक दोनों दृष्टियों से अहम।
- कपूरथला: सेना का सिग्नल कोर सेंटर; सामरिक संचार का हब।
- जालंधर और लुधियाना: सैन्य छावनी और औद्योगिक केंद्र - युद्ध सामग्री और लॉजिस्टिक्स का मजबूत आधार।
- आदमपुर: वायुसेना का सक्रिय बेस; पश्चिमी फ्रंट पर लड़ाकू विमानों की तैनाती।
- भटिंडा: सेना की बड़ी टुकड़ी मौजूद; युद्धकाल में पंजाब सेक्टर की रीढ़।
इन शहरों पर हमला भारत की पश्चिमी सैन्य तैयारियों को पंगु बना सकता था।
हरियाणा और चंडीगढ़
- चंडीगढ़: वेस्टर्न कमांड का मुख्यालय-यहां हमला मतलब, भारतीय सेना की सैन्य रणनीति की नब्ज पर हमला।
यहां हमला उच्च सैन्य निर्णय क्षमता को प्रभावित करता।
राजस्थान की रणभूमि
- नल और फलौदी: भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयरबेस - खासकर रेगिस्तानी युद्ध रणनीति के लिए।
- उत्तरलाई: भारत-पाकिस्तान सीमा से नजदीक; मिसाइल और एयर डिफेंस इकाइयों की तैनाती।
- यहां से पाकिस्तान की किसी भी आक्रामक कार्रवाई पर तत्काल प्रतिक्रिया दी जा सकती है।
गुजरात की गश्त
भुज: 1971 युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाला एयरबेस। ये भारत की दक्षिण-पश्चिमी आंख है। आज भी रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील, कच्छ के रण के निकट।
इन शहरों की खासियत यही है कि- वे भारतीय सेना, वायुसेना और खुफिया तंत्र के मजबूत स्तंभ हैं, सीमा से निकटता उन्हें पहले लक्ष्य बनाती है, और इनमें से कई स्थान भारतीय प्रतिआतंकवादी अभियानों के लॉन्चपैड हैं। पाकिस्तान जानता है कि अगर भारत की यह सामरिक रीढ़ टूटती है, तो उसकी जवाबी कार्रवाई धीमी होगी - इसलिए इन शहरों को निशाना बनाना उसकी रणनीति का हिस्सा था।

ड्रोन, मिसाइल और Harpy का खेल
पाकिस्तान ने हमला किया - ड्रोन, क्रूज मिसाइलों और लॉन्ग-रेंज आर्टिलरी के जरिए। लेकिन भारत ने पलटवार किया - एस-400 डिफेंस सिस्टम और हार्पी ड्रोन स्ट्राइक से पाकिस्तानी रडार सिस्टम को भाप में उड़ा दिया। सरकार ने साफ कर दिया है-ये जवाब उसी स्तर और उसी तीव्रता का था, जिस तीव्रता से हमला हुआ था। 'आग का जवाब आग से' अब सिर्फ नारा नहीं, नीति बन चुकी है।
'ऑपरेशन सिंदूर' से 'ऑपरेशन चक्रव्यूह' तक?
'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत ने 9 टेरर ठिकानों को जमींदोज किया। और अब जब पाकिस्तान ने पलटवार की कोशिश की, तो उसकी योजना को नक्शे से पहले ही पढ़ लिया गया। भारत का खुफिया तंत्र पहले से जानता था - कौन-सा शहर कब निशाने पर आएगा। ये कोई साधारण जवाबी हमला नहीं था। यह भारत के न्यू एज वॉरफेयर का ट्रेलर था।












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