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क्या Drone से हथियार-गोला बारूद भेजने वाला पाकिस्तान बम भी गिरा सकता है ? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

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    India में Drone के जरिए बम गिरा सकता है Pakistan ?, नहीं सुधरेंगे Imran Khan | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली- पंजाब में ड्रोन से गिराए गए हथियार और गोला-बारूद कोई सामान्य घटना नहीं है। इसने पुरे देश की सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सोचने वाली बात है कि जब पाकिस्तान ड्रोन के जरिए भारत के अंदर हथियारों की खेप पहुंचा सकता है तो क्या वह आतंकी संगठनों के जरिए अहम ठिकानों, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर बम नहीं गिरवा सकता? यह चिंता सिर्फ जम्मू-कश्मीर और पंजाब जैसे बॉर्डर से जुड़े राज्यों की ही नहीं है। इसका खतरा राजधानी दिल्ली तक मंडरा रहा है। खतरा कितना गंभीर है ये बात इसी से समझी जा सकती है कि खुफिया एजेंसियों ने भी आगाह किया है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे पाकिस्तानी आतंकी संगठन इसकी साजिशें रच भी रहे हैं। यानि पंजाब का वाक्या एक ट्रायल भर हो सकता है और आने वाले समय में हमारी सुरक्षा एजेंसियों को बहुत ज्यादा सतर्क रहने और इस तरह के खतरे पर पूरी तरह से रोकने की आवश्यकता है। आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं कि ये चुनौती कितनी बड़ी है।

    खुफिया एजेंसियों ने क्या कहा है?

    खुफिया एजेंसियों ने क्या कहा है?

    खबरों के मुताबिक खुफिया एजेंसियों ने सुरक्षा एजेंसियों को आगाह किया है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन ड्रोन या अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी) का इस्तेमाल सिर्फ आर्म्स ड्रॉपिंग के लिए ही नहीं, बल्कि दिल्ली जैसे शहरों के भीड़-भाड़ वाले बाजारों, वीवीआईपी और रक्षा ठिकानों एवं हवाई अड्डे जैसी जगहों पर बम गिराने के लिए भी कर सकते हैं। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने बताया है कि,'खुफिया एजेंसियों को आतंकियों के बीच हुए सूचना के आदान-प्रदान से पता चला है कि वे हमले के लिए यूएवी का इस्तेमाल कर सकते हैं। वॉट्सअप, ईमेल्स,फेसबुक और टेलाग्राम के जरिए हुए संवाद शहर में हवाई हमलों की योजना की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने हाल ही में ऑनलाइन बाजार से खरीदे गए एक ड्रोन के डीटेल्स का भी जिक्र किया है।'

    एयरपोर्ट पर पहले भी दिख चुके हैं ड्रोन और यूएफओ

    एयरपोर्ट पर पहले भी दिख चुके हैं ड्रोन और यूएफओ

    दिल्ली पुलिस ने इन सूचनाओं के आधार पर महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अलर्ट भी जारी कर दिया है। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक, 'जब भी ड्रोन दिखेगा, कंट्रोल रूम को तुरंत बताया जाएगा। तब हम उसका डीटेल्स जानते हैं कि उसका मालिक कौन है। जब कोई जानकारी नहीं मिलती तो हम उसे तत्काल मार गिराते हैं।' सीआईएसएफ ने भी ड्रोन से हमले की आशंका को खारिज नहीं किया है। इसके पास दिल्ली समेत देश के कई एयरपोर्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। सीआईएसएफ के प्रवक्ता हेमेंद्र सिंह ने कहा है कि, 'हमें सुनिश्चित करना होता है कि जब नजर पड़े कि किसी ड्रोन में गोला-बारूद है तो सुरक्षा एजेंसियां उस पर नियंत्रण करें।' पिछले साल अगस्त में एक पायलट ने एक यूएफओ (अन-आइडेनडिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट) देखा था, तब आईजीआई एयरपोर्ट के तीन में से एक रनवे को एक घंटे से ज्यादा वक्त तक बंद करना पड़ा था। दिल्ली पुलिस की रिकॉर्ड के मुताबिक 2010 से एयरपोर्ट के आसपास 9 ड्रोन और दो यूएफओ दिख चुके हैं। यही वजह है कि पंजाब की घटना के बाद से ज्यादा खतरा महसूस होने लगा है।

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    एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम जारी

    एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम जारी

    खबरें ये भी हैं कि एडवांस एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी तैयार करने और खासकर दिल्ली में सुरक्षा बलों को इन खतरों से निपटने में सक्षम बनाने के लिए कई एजेंसियां जुटी हुई हैं। इस साल जनवरी में ड्रोन की समस्या से निपटने के लिए सिविल एविएशन मंत्रालय ने एंटी-अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम तैयार करने के लिए कई कंपनियों को आमंत्रित भी किया था। इसके लिए जून में रूस, जर्मनी समेत पांच देशों की कंपनियों से भी संपर्क किया गया था। मंत्रालय ने फिर से दुनिया भर से टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी मंगवाई है। जब इस तरह की कोई पुख्ता टेक्नोलॉजी मिलेगी तो उसे सुरक्षा एजेंसियों को मुहैया कराया जाएगा। एक अधिकारी के मुताबिक, 'भारत के सिविल एयरपोर्ट को सुरक्षित करने और ड्रोन हमला रोकने के पूरे ब्लूप्रिंट का ये एक हिस्सा है। आईआईटी बॉम्बे जे जुड़ी कंपनी आइडियाफॉर्ज को सीआईएसएफ ने इस साल तक समाधान देने को कहा है। पिछले तीन महीने में दिल्ली के रोहिणी इलाके में कई तरह के फिल्ड ट्रायल भी किए गए हैं। '

    ड्रोन को मार गिराना भी खतरे से खाली नहीं

    ड्रोन को मार गिराना भी खतरे से खाली नहीं

    दरअसल, अभी जो भी एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी उपलब्ध है उसे इस्तेमाल करने में बहुत ज्यादा कठिनाई है। क्योंकि, अगर ड्रोन के सिग्नल को रोका जाता है तो इससे एयरपोर्ट जैसे इलाकों के पास एटीसी और पायलट के बीच के संचार नेटवर्क पर भी असर पड़ता है। यही नहीं, इससे सेलफोन के नेटवर्क में भी दिक्कत आने लगती है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ड्रोन्स के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर और फाउंडर लेफ्टिनेंट कमोडोर (रि ) जॉन लिविंग्स्टोन के मुताबिक, 'ड्रोन को हैक करने या उसके सिग्नल को जाम करने की कोशिश से सेलफोन नेटवर्क और एटीसी-पायलट के बीच संचार भी प्रभावित होगा।' परेशानी सिर्फ इतनी भर नहीं है। आईजीआई एयरपोर्ट के डीसीपी संजय भाटिया कहते हैं कि अगर कोई ड्रोन नो-फ्लाई जोन में दिख भी जाता है तो उसे फौरन मार गिराना आसान नहीं है। क्योंकि, उसमें धमाका हो सकता है और इससे विमान के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए, एक खास मेकेनिज्म को अपनाने की आवश्यकता है। वैसे जानकारी के मुताबिक अभी भी सीआईएफएस के पास वे साधन मौजूद हैं कि अगर उसे लगता है कि कोई ड्रोन या यूएफओ एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं तो वह 500 मीटर से 1.5 किलोमीटर तक दूर ड्रोन या यूएफओ को मार गिरा सकती है। लेकिन, सवाल है कि अगर वह विस्फोटको से भरा हो तब क्या ऐसा करना बहुत खतरनाक साबित नहीं होगा।

    बेहद खतरनाक साबित होते जा रहे हैं ड्रोन

    बेहद खतरनाक साबित होते जा रहे हैं ड्रोन

    एक्सपर्ट की राय में अभी तो ड्रोन का पता लगा लेना फिर भी ज्यादा आसान है, लेकिन नैनोटेक्नोलॉजी के चलते ड्रोन का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। एविएशन एक्सपर्ट हर्ष वर्धन ने इसके खतरे के बारे में कहा है कि, 'लो-फ्लाइंग ड्रोन का पता लगाना बहुत ही मुश्किल है। ड्रोन के पेलोड की क्षमता रोजाना बढ़ती जा रही है, जो कि एक खतरनाक संकेत है। ड्रोन को पूरी तरह से कंट्रोल करने के लिए कोई मेकेनिज्म नहीं है, लेकिन एजेंसियां इसपर लगातार काम कर रही हैं।' यानि मौजूदा समय में चौकसी ही सबसे बेहतर उपाय है और सुरक्षा एजेंसियां उसमें कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।

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    English summary
    Pakistan's origin Drones increases security threats,Know what experts say
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