पेगासस की मदद से भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का भी फोन किया हैक: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 20 जुलाई। दुनियाभर के खोजी पत्रकारों के संगठन ने हाल ही में सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसमे दावा किया गया है कि दुनियाभर के अलग-अलग देशों में लोगों के फोन टैप किए गए हैं। तकरीबन 50 हजार लोगों के फोन को इजराइल की कंपनी एनएसओ के सॉफ्टवेयर पेगसस के जरिए टैप किया गया है। इस लिस्ट में भारत भी है, जिसमे दावा किया गया है कि भारत में तकरीबन 300 लोगों के फोन को टैप किया गया, जिसमे पत्रकार, नेता, मंत्री, एक्टिविस्ट आदि शमिल हैं। लेकिन इस लिस्ट में जो सबसे बड़ा नाम अब सामने आ रहा है वह है पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का।

इमरान खान का ही फोन हुआ हैक!
पाकिस्तान के अखबार द डॉन ने भी इस बात का दावा किया है कि भारत ने इमरान खान के फोन को टैप किया और उनके फोन से किए जा रहे मैसेज और फोन कॉल को रिकॉर्ड कर रहा था। इमरान खान ने एक फोन नंबर जिसे इस्तेमाल किया था वो नंबर भारत द्वारा जासूसी कराए गई लिस्ट में शामिल है। बता दें कि दुनियाभर के 17 मीडिया संस्थानों ने मिलकर इस रिपोर्ट का खुलासा किया है कि पेगासस के जरिए लोगों के फोन को सरकारों ने टैप किया है। द पोस्ट की खबर के अनुसार भारत में तकरीबन 1000 फोन नंबर को रिकॉर्ड किया गया है, हालांकि द पोस्ट की रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि इमरान खान के फोन नंबर को टेप करने में भारत सफल हुआ या नहीं।

पाकिस्तान ने जताई चिंता
न्यूज पोर्टल द वायर की रिपोर्ट के अनुसार 300 मोबाइल नंबर को भारत में सर्विलांस की लिस्ट में रखा गया था। जिसमे सरकार के मंत्री, विपक्ष के नेता, वैज्ञानिक, एक्टिविस्ट शामिल हैं। इन तमाम लोगों के नाम इस लिस्ट में शामिल हैं, जिनके नंबर को सर्विलांस में रखने के लिए शामिल किया गया था। इमरान खान के फोन नंबर को सर्विलांस पर रखे जाने को लेकर पाकिस्तान के आईटी मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि यह बेहद चिंता का विषय है। मोदी सरकार की अनैतिक नीतियों के चलते भारत और इस क्षेत्र में खतरनाक ध्रुवीकरण हुआ है।

चार नंबर में सबसे अहम नंबर हुआ हैक
इमरान खान के कुल चार नंबर हैं, जिसमे से एक नंबर सबसे जरूरी है जिससे वह आईएसआई के चीफ और आर्मी चीफ से बात करते हैं। इसी नंबर को भारत ने लंबे समय तक हैक करके रखा था। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पाकिस्तान इस मुद्दे को यूएन में उठाने की तैयारी कर रहा है। लेकिन अहम बात यह है कि पाकिस्तान के लिए खुद में यह शर्मिंदगी भरी बात है कि उनके प्रधानमंत्री का नंबर हैक हो गया है और राष्ट्रीय सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक हुई।

धारा 370 को हटाने से पहले इस्तेमाल का शक
रिपोर्ट की माने तो संभव है कि भारत ने आर्टिकल 370 को जम्मू कश्मीर में हटाने से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की बातों को सुना ही और पाकिस्तान के रुख को देखने के बाद ही भारत ने यह फैसला लिया है। भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की बातों को उनके अहम लोगों से बातचीत को सुना हो और उनके रुख को देखने के बाद ही जम्मू कश्मीर में धारा 370 को हटाने का फैसला लिया हो।

कैसे होता है फोन हैक
पेगासस को इजराइल की कंपनी एनएसओ ने तैयार किया है, कंपनी का कहना है कि जासूसी करने के लिए यह स्पाइवेयर तैयार किया है। किस तरह से यह स्पाइवेयर फोन को हैक करता है, इसकी बात करें तो किसी के भी फोन पर सिर्फ एक मिस कॉल करने से यह स्पाइवेयर फोन को आसानी से हैक कर लेता है। इसके बाद यह स्पाइवेयर कॉल लॉग तक को भी डिलीट कर देता है, ऐसे में संभव है कि भारत ने इमरान खान के फोन पर मिस कॉल करने के बाद उसे डिलीट तक कर दिया हो और उन्हें पता भी नहीं चला हो कि उनका फोन हैक हो गया है।

तमाम चीनी और पाकिस्तानी राजनयिकों के फोन भी हैक
द गार्जियन, वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट का दावा है कि भारत सरकार ने ना सिर्फ अपने देश बल्कि दुनियाभर के अलग-अलग लोगों का फोन हैक किया है। चीन के कई राजनयिक, पाकिस्तान के राजयनिक के नंबर का भी नंबर इस लिस्ट में है। ऐसे में संभव है कि भारत ने इन तमाम राजनयिकों के फोन को हैक करके इनके द्वारा की गई अहम बातचीत को सुना हो। हालांकि सरकार लगातार इन रिपोर्ट को खारिज कर रही है और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि भारत ने कुछ भी गैर कानूनी नहीं किया है।

भारत ने पहले भी पाक में लगाई है सेंध!
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने पाकिस्तान के भीतर सेंध लगाई है। इससे पहले 2019 में भारत ने इजराइल की मदद के बिना ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के कार्यालय में सेंध लगा दी थी। रिपोर्ट के अनुसार एनटीआरओ ने 2019 में इमरान खान के ऑफिस की फोटो तक निकाल दी थी और उनके ऑफिस में किस तरह की फाइल हैं, वह किन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं आदि की जानकारी मिल गई थी। बता दें कि एनटीआरओ नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन है जोकि बहुत ही अहम तकनीक एजेंसी है, जिसे 2004 में स्थापित किया गया था। यह सीधे तौर पर प्रधानमंत्री की देखरेख में काम करती है।












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