पाकिस्तान की उल्टी गिनती शुरू, टेरर फंडिंग केस में FATF के शिकंजे में फंसा
नई दिल्ली- आतंकियों को संरक्षण देने के चलते पाकिस्तान अब अपने ही बुने जाल में बुरी तरह फंस चुका है। टेरर फंडिंग केस में ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने उसे 27 प्वाइंट ऐक्शन प्लान पर ठोस कदम उठाने के लिए मोहलत दी थी। अब उसकी भी मियाद पूरी हो रही है, लेकिन पाकिस्तान 27 में से बमुश्किल 6 पर ही ऐक्शन ले पाया है। 21 बिंदू अभी भी जस के तस पड़े हुए हैं। जबकि, अगले महीने ही पेरिस में इसपर अहम फैसला लेने के लिए एफएटीएफ की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। गौरतलब है कि फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स ने अभी पाकिस्तान को कई चेतावनियों के बाद 'ग्रे लिस्ट' में डाल रखा है, लेकिन अगले महीने अगर पाकिस्तान ने अपना वादा नहीं निभाया तो उसे ब्लैकलिस्ट घोषित किया जा सकता है। इसके बाद पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय लोन का आसरा भी खत्म हो जाएगा और उसकी बची-खुची अर्थव्यवस्था भी धाराशाही हो सकती है।

27 में से सिर्फ 6 प्वाइंट पर उठाया कदम
अगर अगले महीने पेरिस में होने वाली बैठक में फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) पाकिस्तान को काली सूची में डाल देता है तो इसके बाद उसे मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद पर पूरी तरह से रुक जाएगी। एफएटीएफ सूत्रों के मुताबिक उसे इस स्थिति से बचने के लिए जो 27 प्वाइंट ऐक्शन प्लान तैयार करके दिया गया था, वह फिलहाल उससे कोसों दूर नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद को आतंकी फंडिंग के लिए इस्तेमाल होने से रोकने के लिए बने इस टास्क फोर्स के सामने पाकिस्तान सिर्फ 6 प्वाइंट पर ही ऐक्शन लेकर दिखा पाया है। एफएटीएफ का उद्देश्य इंटरनेशनल फाइनेंशियल सिस्टम को आतंकी संगठनों, मनी लाउंड्रिंग और दूसरे खतरों से बचाते हुए उसके कानूनी तौर पर प्रभावी इस्तेमाल को सुनिश्चित करना है।

100 में से सिर्फ 5 आतंकियों को ही खोज पाया
खबरों के मुताबिक पाकिस्तान की ओर से एफएटीएफ ऐक्शन प्लान को लागू करने पर नजर रखने वाले सूत्रों ने बताया है कि संयुक्त राष्ट्र से आतंकी घोषित हो चुके पाकिस्तान में सक्रिय 100 से ज्यादा आतंकियों में से वह अबतक सिर्फ 5 का ही पता लगा पाया है। इन पांचों में से लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा और फलह-ए-इंसानियत का सरगना मोहम्मद हाफिज सईद भी शामिल है। सईद को पिछले जुलाई में टेरर फाइनेंसिंग केस में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह कथित तौर पर हिरासत में है।

क्या इस बार एफएटीएफ की आंखों में धूल झोंक पाएंगे इमरान?
पाकिस्तान से मिली खबरों के मुताबिक आतंकी फंडिंग से जुड़े होने के आधार पर वहां 900 से ज्यादा संपत्तिया सीज की गई हैं, जिनमें मदरसा और डिस्पेंसरी भी शामिल हैं। इन संपत्तियों में 750 तो हाफिज के संगठन फलह-ए-इंसानियत से जुड़े हैं, जबकि 150 जैश-ए-मोहम्मद के बताए जा रहे हैं। लेकिन, इसमें भी बड़ा घालमेल है। पाकिस्तान अभी इन अवैध संपत्तियों के फंडिंग सोर्स का पता लगाने में नाकाम रहा है और न ही इनके मालिकों के खिलाफ कोई केस ही किया गया है। यही नहीं इन ठिकानों से आतंक से जुड़े कोई साजो-सामान मसलन, हथियार, गोला-बारूद या ट्रेनिंग कैंपों में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजें भी बरामद नहीं की गई हैं। इसलिए ये भी सिर्फ एफएटीएफ की आंखों में धूल झोंकने का हथकंडा ही लग रहा है।

आतंकियों को बचाने के लिए लीपापोती का खेल जारी
पाकिस्तान में आतंकी संगठनों और आतंकी सरगनाओं को अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचाने के लिए चल रहे लीपापोती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने पिछले जुलाई महीने में ही टेरर फंडिंग से जुड़े 23 केस रजिस्टर्ड किए हैं। जबकि, एफएटीएफ इस सिलसिले में उसे एक साल पहले ही 'ग्रे लिस्ट' में डाल चुका है और उसे ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए 27 सूत्री एंटी-टेरर फाइनेंसिंग प्लान थमा रखा है। जुलाई में दर्ज टेरर फंडिंग केस में उसने अपने यहां सक्रिय 65 आतंकियों के नाम भी दर्ज किए हैं।

अगले महीने ब्लैकलिस्ट में जाएगा पाकिस्तान?
जैसे-जैसे टेरर फंडिंग के मामले में पाकिस्तान के एफएटीएफ से ब्लैकलिस्ट होने का समय नजदीक आ रहा है, उसने दिखावे के लिए ऐक्शन में तेजी लाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। मसलन, अभी-अभी वहां के गुजरांवाला कोर्ट ने टेरर फाइनेंसिंग के एक केस में मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई है। वह ऐसे ही चार मामलों में आरोपी बनाया गया है। हालांकि, इसके बावजूद पाकिस्तान का ब्लैकलिस्ट होने से बचना बहुत ही मुश्किल है। उसने एफएटीएफ से मिले 15 महीने के आखिरी मौके को भी झूठे ऐक्शन में गंवा दिया है। ऐसे में जो स्थिति बनकर उभर रही है, उससे लगता है कि इस बार उसका ब्लैकलिस्ट में जाना तय है।
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