पाकिस्तान में भी बम-बम भोले
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) पाकिस्तान में कल शिवरात्रि की गूंज कई जगहों पर सुनाई देगी। कराची तथा लाहौर के कुछ मंदिरों के अलावा पंजाब प्रांत के चकवाल क्षेत्र में ऐतिहासिक शिव मंदिर में भी शिवरात्रि मनेगी। इस मंदिर को कटासराज भी कहते हैं। आपको बता दें कि देश के बंटवारे के समय से ही चकवाल में स्थित कटासराज मंदिर बंद पड़ा था। कुछ साल पहले इस मंदिर में आरती की गूंज सुनाई दी थी। कटासराज मंदिर क्षेत्र में एक बौद्ध स्तूप भी है।

पर्यटन केन्द्र
दरअसल पाकिस्तान सरकार मंदिर की पुनर्स्थापना कर इससे दो मक़सद हल करना चाहती है। पहला तो वह एक ऐसी पुरातात्विक धरोहर को पुनर्स्थापित कर रही है जो पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बन सकती है।
शानदार कदम
पाकिस्तान के हिंदुओं का कहना है कि पाकिस्तान सरकार का यह कदम मुसलमान बहुल समाज में उनकी स्थिति को लेकर एक आश्वासन की तरह है।
भारत से जत्था
इस बीच, कटास राज मंदिर में होने वाले शिवरात्रि के त्योहार के लिए भारत से 21 हिंदू तीर्थयात्रियों का एक जत्था पाकिस्तान पहुंच गया।वाघा सीमा से पाकिस्तान में प्रवेश करने पर तीर्थयात्रियों की पाकिस्तान सिख गुरूद्वारा प्रबंधक समिति और एवेक्यु प्रापर्टी बोर्ड के अधिकारियों ने अगवानी की।
बोर्ड देश में अल्पसंख्यक समुदायों के धर्म स्थलों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। बोर्ड के एख अफसर ने कहा कि बोर्ड 100 से अधिक हिंदुओं के पहुंचने की उम्मीद कर रहा था इसी के मुताबिक बंदोबस्त किया लेकिन सिर्फ 21 तीर्थयात्री ही पहुंचे।
900 साल पुराना
900 साल पुराने हिंदू मंदिर में ये लोग तीन दिन ठहरेंगे। हिंदू सुधार सभा के अमरनाथ रंधावा कहते हैं, "हमारी बड़ी ख़ुशकिस्मती है कि इस मंदिर का फिर से निर्माण हो गया। यह जानकर बेहद ख़ुशी होती है कि अब हम यहां आकर पूजा कर सकते हैं।
शिवजी के आंसू
मान्यता है कि यहां स्थित तालाब शिवजी के आंसुओं से बना था। पहले हिंदू धर्मावलंबी इस विश्वास के साथ तालाब में डुबकी लगाते थे कि वे 'अपने पाप धो रहे हैं।
पाकिस्तान के पंजाब के पुरातत्व विभाग की महानिदेशक स्मत ताहिरा ने एक बार कहा था, "हमने मंदिर का इसके मूल स्वरूप में लौटाने की कोशिश की है। कुछ लोग इससे असहमत हो सकते हैं लेकिन सब कुछ ऐतिहासिक रूप से तथ्यों के अनुरूप है।"












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