Oriya Language Conference: एक्सपर्स्टस बोले- उड़िया भाषा के संरक्षण के लिए आईटी का प्रयोग जरूरी
World Oriya Language Conference: प्रथम विश्व ओडिया भाषा सम्मेलन में शामिल हुए एक्सपर्ट्स ने भाषा को बढ़ावा देने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी कि इस्तेमाल पर जोर दिया। समिट में अपनी राय व्यक्त करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि उड़िया सबसे पुरानी भाषा है। ओडिशा की संस्कृति, विरासत और परंपरा ने आज दुनिया भर में एक अनूठी पहचान बनाई है। ऐसे में इसके संरक्षण जरूरी है। वर्तमान के परिवेश में आईटी के अधिकाधिक प्रयोग के जरिए इसे बचाया जा सकता है।
विश्व ओडिया भाषा सम्मेलन में शामिल चर्चा की अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात आईटी विशेषज्ञ सेंथिल शंकरसुब्रमण्यन ने सरला दास का उदाहरण देते हुए कहा कि उड़िया भाषा की महिमा इसके संरक्षण में है। उन्होंने उड़िया भाषा के प्रचार-प्रसार की दिशा में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि उड़िया सबसे पुरानी भाषा है। ओडिशा की संस्कृति, विरासत और परंपरा ने आज दुनिया भर में एक अनूठी पहचान बनाई है। अतः भाषा के संरक्षण के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग नितांत आवश्यक है। साथ ही, विभिन्न आधुनिक प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके दुनिया में ओडिया भाषा को फैलाने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है।
प्रथम विश्व ओडिया भाषा सम्मेलन 2024 में 'सूचना प्रौद्योगिकी के युग में ओडिया भाषा: अवसर और भविष्य' नामक सत्र के दौरान आईएसजी की प्रमुख रेखा आचार्य ने कहा कि वर्तमान युग 'एआई' का युग है। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से बहुत ही कम समय में उड़िया भाषा को अंग्रेजी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में बदला जा सकता है। ओडिया में डेटा और प्रौद्योगिकी में सुधार के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग की आवश्यकता है। आचार्य ने कहा, अगले कुछ वर्षों में, सभी बाधाओं को पार करते हुए, ओडिया भाषा सूचना प्रौद्योगिकी की भाषा बन जाएगी।
उन्होंने कहा कि इसी तरह रिलायंस जियो के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन एआई/एमएल के मुख्य डेटा वैज्ञानिक डॉ. शैलेश कुमार ने बताया कि भाषा छठी इंद्री है और भाषा के विकास के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की परिभाषा बदल रही है, आने वाले दिनों में क्रांतिकारी बदलाव होगा और उड़िया भाषा सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग कर शीर्ष स्तर पर पहुंचेगी।
वहीं केपीएमजी इंडिया के पार्टनर बिजेंद्र कुमार ने कहा कि चूंकि भारत में केवल 10 प्रतिशत लोगों के पास अंग्रेजी में संवाद करने की क्षमता है, इसलिए उड़िया भाषा में ज्ञान प्राप्त करने में कई बाधाएं हैं। अंग्रेजी भाषा पर अधिक निर्भरता उड़िया भाषा को प्रभावित कर रही है। इसलिए उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर क्षेत्रीय भाषाओं को और अधिक फैलाने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है।
जबकि रेवेरी लैंग्वेज टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक विवेकानंद पाणि ने कहा कि ऑनलाइन दुनिया में भाषा का अंतर लगातार देखा जा रहा है। साथ ही इंटरनेट पर ओडिया जानकारी का अभाव भी देखा जा रहा है। इसलिए उन्होंने कहा कि उड़िया भाषा के विकास के लिए इस पर ध्यान देना जरूरी है।
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