विपक्षी एकता: बार-बार क्यों टल रही है बैठक? नीतीश कुमार की शर्त, कांग्रेस चीफ जरूर आएं

विपक्षी दलों की बैठक से पहले तारीखों पर ही तालमेल नहीं हो पा रहा है। 12 जून को पटना में होने वाली बैठक फिर से स्थगित किया गया है। इसके साथ नीतीश कुमार ने कांग्रेस से कहा है कि पार्टी चीफ को जरूर भेजें।

Opposition Unity

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने काफी कोशिशों के बाद पटना में 12 जून को होने वाली विपक्षी दलों की 'महाबैठक' की तारीख पक्की की थी। इससे पहले दो बार किसी न किसी वजह से यह बैठक पहले भी टाली जा चुकी है। तारीख पक्की करने से पहले नीतीश देशभर के नेताओं से जाकर मिल भी आए थे। लेकिन, एक बार फिर नेताओं के उस तारीख पर उलब्ध नहीं होने की वजह से इसे आगे के लिए टालना पड़ा है।

फिर टली विपक्षी दलों की बैठक
जेडीयू सुप्रीमो ने विपक्ष की इस बैठक की पक्की तारीख तो अभी नहीं बताई है, लेकिन जानकारी के मुताबिक यह कम से कम 10 दिनों के लिए जरूर टल गई है। दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी अभी विदेश दौरे पर हैं और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी किसी जरूरी कार्यक्रम में व्यस्त बताए जा रहे हैं।

तारीख पर क्यों हो रही है गफलत?
इनके अलावा जिन नेताओं के बारे में बताया जा रहा है कि वह 12 जून की बैठक में पहुंचने से असमर्थता जताने लगे थे, उनमें डीएमके नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और सीपीएम नेता सीताराम येचुरी शामिल हैं। इस तरह से विपक्षी एकता वाली बैठक की तारीख को लेकर जो गफलत हो रही है, उससे इन दलों के आपसी तालमेल को लेकर अभी से सवाल खड़े होने लगे हैं।

गौरतलब है कि जेडीयू सुप्रीमो की अध्यक्षता में होने वाली विपक्षी एकजुटता वाली यह बैठक पहले 19 मई को होने वाली थी, लेकिन तब कर्नाटक में सरकार गठन के चलते इसे टालना पड़ गया। फिर मई के आखिर में संभावना थी कि बैठक होने वाली है, लेकिन वह भी नहीं हुई। वैसे नीतीश ने 12 जून की तारीख तय करने से पहले राहुल और खड़गे से भी मुलाकात कर ली थी।

कांग्रेस के बयान से विपक्षी दलों का माथा ठनका था
लेकिन, बाद में कांग्रेस की तरफ से जो कुछ कहा गया उससे विपक्षी खेमे में मायूसी छाने लगी। पिछले हफ्ते कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने एक प्रेस कांफ्रेंस में जो कुछ कहा था, उससे लगा कि पार्टी नीतीश की अगुवाई वाली बैठक को बहुत ज्यादा भाव देने के मूड में नहीं है।

तब जयराम ने कहा था, '12 जून को पटना में होने वाली बैठक में कांग्रेस निश्चित तौर पर शामिल होगी। वैसे, इसमें कौन हिस्सा लेगा, यह तय नहीं किया गया है।' यही वजह है कि अब नीतीश को
अपनी बात स्पष्ट करनी पड़ी है कि विपक्षी एकता तभी संभव है, जब सभी दल इस बैठक को महत्त्व दें।

कोई दूसरा प्रतिनिधि आएगा तो यह ठीक नहीं है- नीतीश कुमार
बिहार के सीएम ने सोमवार को कहा, 'सबके हेड को आना है। कोई दूसरा प्रतिनिधि आएगा तो यह ठीक नहीं है। बाकी सब लोग, दूसरी पार्टियों की तरफ से भी कहने लगे कि मान लीजिए कि उसकी तरफ से कोई दूसरा आएगा ये अच्छा नहीं रहेगा। क्योंकि, कांग्रेस पार्टी में चर्चा होने लगी कि उनके हेड नहीं आएंगे।'

नीतीश ने कांग्रेस की दुविधा कम करने की कोशिश की है
नीतीश ने हेड कहकर कांग्रेस को इतनी छूट जरूर दे दी है कि वह खड़गे को भेजकर बैठक को अपना भरपूर समर्थन दिखा सकती है। क्योंकि कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षता अभी उन्हीं के पास है। क्योंकि, राहुल गांधी उस बैठक में शामिल होंगे, यह बहुत बड़ा सवाल है।

क्योंकि, एक तो इस बैठक की अध्यक्षता नीतीश करने वाले हैं। दूसरा, उन्होंने यह बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कहने पर बुलाई है, इसलिए उनकी उपस्थिति भी तय है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव की मौजूदगी को भी लगभग हरी झंडी मिल चुकी है। ऐसे में राहुल गांधी की उपस्थिति को लेकर बड़ा सवाल है।

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