'ऑपरेशन सिंदूर' पर जवाबदेही की मांग, INDIA गठबंधन ने विशेष सत्र को लेकर केंद्र को घेरा, पढ़ें पूरी हाईलाइट
India Alliance Meeting Highlights: ऑपरेशन सिंदूर पर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमालावर है और जवाबदेही की मांग कर रहा है। I.N.D.I.A गठबंधन की ओर से केंद्र सरकार पर विशेष सत्र बुलाने का दबाव लगातार तेज होता जा रहा है।
मंगलवार,3 जून को दिल्ली के संविधान क्लब में इंडिया ब्लॉक ने एक बैठक का आयोजन किया। इस महत्वपूर्ण बैठक में 16 विपक्षी दलों ने हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की।

इस बैठक और प्रेस वार्ता के माध्यम से विपक्ष ने सरकार से सवाल पूछे कि "क्या लोकतंत्र में संसद से बड़ा कोई मंच हो सकता है?"
India Alliance: संसद के विशेष सत्र की मांग
इस बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, डीएमके, शिवसेना (उद्धव गुट), आरजेडी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, सीपीआई (एम), आईयूएमएल, आरएसपी, जेएमएम, वीसीके, केरल कांग्रेस, एमडीएमके और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन जैसे 16 दलों ने भाग लिया।
हालांकि, आम आदमी पार्टी (AAP) और एनसीपी (शरद पवार गुट) बैठक में शामिल नहीं हुए। AAP ने घोषणा की कि वह बुधवार को प्रधानमंत्री को अलग से पत्र सौंपेगी।
विपक्षी दलों ने पत्र में पहलगाम, पुंछ, उरी और राजौरी में हाल ही में हुए आतंकी हमलों और 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत-पाक संघर्ष को लेकर उठे सवालों के मद्देनज़र संसद में विस्तृत और स्वतंत्र चर्चा की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का पक्ष रखने के साथ-साथ संसद, जो कि जनता के प्रति जवाबदेह है, उसमें भी सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए।
CDS के बयान से उठा विवाद, विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया
इस मुद्दे को और बल तब मिला जब भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान ने सिंगापुर में एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान संघर्ष में असली मुद्दा यह नहीं है कि कितने फाइटर जेट गिरे, बल्कि यह है कि "वे क्यों गिरे?" इस बयान को लेकर कांग्रेस ने एक्स पर सरकार से सवाल पूछा - "अगर हमारे फाइटर जेट का नुकसान हुआ है, तो सरकार इसे क्यों छिपा रही है?"
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा, "क्या भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष खत्म हो गया है? सीजफायर की शर्तें क्या थीं? भारतीयों को यह जानने का पूरा हक है।"
राजद नेता मनोज झा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगातार दिए जा रहे बयानों को लेकर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा, "15 दिनों में 13 बयान आए। इससे किसी पार्टी की नहीं, पूरे देश की भावना आहत हुई है। यह सिर्फ राजनीतिक नहीं, राष्ट्रीय मसला है।"
Delhi: After the meeting of the INDIA alliance, RJD MP Manoj Jha (@manojkjhadu) says, "...US President Donald Trump made 13 statements in 15 days and those statements have hurt India's sentiments. As a community and a nation, we are hurt... If Parliament is called for this, we… pic.twitter.com/TBqits9Ki7
— Lok Poll (@LokPoll) June 3, 2025
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि, "हमने सरकार को आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए समर्थन दिया था। अब जब युद्धविराम की घोषणा अमेरिका करता है और पाकिस्तान से बातचीत होती है, तो देश की संसद को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है?"
टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, "जब भारत सरकार दुनिया के मंचों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर रही है, तो संसद से क्यों बच रही है? संसद सरकार की नहीं, जनता की होती है।"
संजय राउत (शिवसेना उद्धव गुट) ने कटाक्ष करते हुए कहा, "अगर ट्रंप के कहने पर युद्धविराम हो सकता है, तो क्या हमें संसद सत्र के लिए भी उनसे आग्रह करना होगा?"
मनोज झा ने 1962 में चीन युद्ध के दौरान बुलाई गई विशेष सत्र का हवाला देते हुए कहा, "तब देश के हालात को लेकर संसद को सूचना दी गई थी। आज जब 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं, तो वही पारदर्शिता फिर से ज़रूरी है।"
India Alliance: विदेश दौरे से लौट रहे हैं डेलिगेशन, सत्र की मांग और तेज होगी
सरकार ने भारत की स्थिति को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखने के लिए सात ऑल-पार्टी डेलिगेशन दुनिया के विभिन्न देशों में भेजे हैं। ये प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह के अंत तक लौट आएंगे। विपक्ष का कहना है कि उनके लौटने के बाद विशेष सत्र बुलाना और भी ज़रूरी हो जाएगा, ताकि देश को संघर्ष के पूरे घटनाक्रम और भविष्य की रणनीति के बारे में जानकारी दी जा सके।
I.N.D.I.A गठबंधन का साफ कहना है कि आतंकवाद और संघर्ष जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संसद से बचना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। जब दुनिया भारत की स्थिति जान रही है, तो संसद और देश की जनता को भी सच्चाई जानने का अधिकार है।
आने वाले दिनों में यह मांग और तेज हो सकती है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल अपनी यात्रा से लौटेगा। विपक्ष संसद के विशेष सत्र को न केवल जवाबदेही का मंच मानता है, बल्कि सेना को धन्यवाद देने और देश की रणनीतिक दिशा तय करने का अवसर भी।












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