One Nation One Election Timeline: जानिए कब से और क्यों हो रही है 'वन नेशन-वन इलेक्शन' की मांग?
One Nation One Election Timeline: गुरुवार को मोदी कैबिनेट ने बड़ा फैसला किया है, उसने 'वन नेशन-वन इलेक्शन' के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सूत्रों का कहना है कि अब सरकार इस बिल को सदन में पेश कर सकती है।
मालूम हो कि सितंबर 2024 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रिपोर्ट के बाद इस प्रस्ताव पर कैबिनेट ने ग्रीन सिग्नल दे दिया था और तब से ही ये कहा जा रहा था कि एनडीए सरकार शीतकालीन सत्र में यह बिल संसद में लेकर आएगी।

मालूम हो कि मोदी सरकार इसको लेकर शुरू से ही काफी प्रयासरत थी। खुद पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि 'बार-बार होने वाले चुनाव देश की प्रगति में बाधक बनते हैं।'
देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ होंगे चुनाव!
मालूम हो कि इसके लिए बनी कमेटी ने 18 हजार 626 पेज की अपनी रिपोर्ट को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को 14 मार्च को सौंपा था। इस प्रस्ताव के अंतर्गत देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों की राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना है।
आपको बता दें कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' (One Nation, One Election) की मांग अचानक नहीं उठी है बल्कि लंबे वक्त से इसकी मांग हो रही है। यह विचार पहली बार 1999 में विधि आयोग द्वारा उठाया गया था।
आइए एक नजर डालते हैं 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के अब तक के घटनाक्रम पर
- 1983 में भारत के चुनाव आयोग ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की बात कही थी।
- 1999 में विधि आयोग ने पहली बार सुझाव दिया कि भारत में एक राष्ट्र, एक चुनाव प्रणाली लागू होनी चाहिए।
- 2002 में संविधान के कामकाज की समीक्षा करने वाले राष्ट्रीय आयोग ने एक साथ चुनाव कराने की अपील की थी।
- साल 2014 में पीएम मोदी के के नेतृत्व वाली सरकार ने इस मुद्दे को वापस उठाया था।
- विधि आयोग ने लगातार साल 2015 और 2018 में फिर एक साथ चुनाव कराने की मांग की थी।
- साल 2020 में कोविड-19 महामारी के बाद देश में चुनाव प्रणाली में सुधार की मांग तेज हो गई।
- 2024 के लोकसभा चुनावों के पहले, यह मुद्दा फिर से गर्माया था।
- चुनाव के बाद आज मोदी कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
क्या है 'वन नेशन-वन इलेक्शन' के फायदे (Benefits of 'One Nation-One Election)
धन और संसाधनों की बचत: प्रत्येक चुनाव के आयोजन में बड़ी मात्रा में खर्च होता है, चाहे वह प्रशासनिक व्यवस्था हो, सुरक्षा व्यवस्था, या प्रचार अभियान। यदि एक बार में सभी चुनाव हो जाएं, तो चुनावी खर्च में बड़ी कटौती हो सकती है।
विकास कार्यों में मदद: लगातार हो रहे चुनाव सरकारों को विकास कार्यों रोकते हैं, क्योंकि आचार संहिता लागू हो जाती है। 'वन नेशन-वन इलेक्शन' से चुनावी प्रक्रिया कम होगी और सरकारों को विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने में अधिक समय मिलेगा।
सरकार को अधिक स्थिरता मिलेगी: जब सरकारें चुनावी दबाव में होती हैं, तो वे दीर्घकालिक योजनाओं पर ध्यान देने के बजाय अल्पकालिक लोकप्रिय नीतियों पर ज्यादा जोर देती हैं। यदि सभी चुनाव एक साथ हों, तो सरकार को अधिक स्थिरता मिलेगी।
मतदाताओं की जागरूकता और भागीदारी बढ़ेगी: अलग-अलग समय पर चुनाव होने से मतदाता कई बार भ्रमित हो सकते हैं। 'वन नेशन-वन इलेक्शन' से मतदाताओं के लिए चुनावी प्रक्रिया सरल होगी और एक बार में सभी स्तरों के नेताओं को चुनने का मौका मिलेगा
चुनाव प्रचार का खर्चा बचेगा: लगातार चुनावी माहौल राजनीतिक दलों को हर समय प्रचार और रैलियों में व्यस्त रखता है। बार-बार चुनाव प्रचार का खर्च बचाया जा सकता है।
संसाधनों का बोझ कम होगा: चुनावों के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ती है, जो कि संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ डालता है।












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