One Nation One Election से चुनावी खर्च में कितनी होगी बचत? 2024 लोकसभा चुनाव में कितना हुआ था खर्चा

One Nation One Election: भारत में चुनावी प्रक्रिया लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यह एक अत्यंत महंगा और समय लेने वाला कार्य भी है। जब देश के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर चुनाव होते हैं, तो इससे सरकारी और प्रशासनिक संसाधनों पर काफी भारी बोझ पड़ता है।

इस स्थिति में 'One Nation One Election' यानी एक राष्ट्र-एक चुनाव की योजना न सिर्फ चुनावी प्रक्रिया को सरल बना सकती है, बल्कि वित्तीय दृष्टिकोण से भी बचत का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। वर्तमान समय में भारत में हर कुछ महीनों में किसी न किसी राज्य में चुनाव होते रहते हैं।

One Nation One Election

इससे चुनाव आयोग और सरकार पर बार-बार संसाधन खर्च करने की जरूरत पड़ती है। हर बार चुनाव कराने में लाखों कर्मचारियों की तैनाती, सुरक्षा इंतजाम, ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की व्यवस्था, और प्रचार के दौरान होने वाले खर्चों पर भारी वित्तीय दबाव पड़ता है।

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाते हैं, तो इससे सरकारी खर्चों में बड़ी मात्रा में कमी आ सकती है। एक अध्ययन के अनुसार, 2019 के लोकसभा चुनाव पर लगभग 60,000 करोड़ रुपये खर्च हुआ थे। तो वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में 1 लाख 35 हजार करोड़ रुपये तक खर्च हुए थे।

इसी तरह, विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों पर भी हजारों करोड़ रुपये खर्च हुए। यदि इन चुनावों को एक साथ कराया जाए, तो यह खर्च काफी हद तक कम हो सकता है। इतना ही नहीं, एक साथ चुनाव कराने से प्रशासनिक खर्चों में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। अभी हर चुनाव के दौरान लाखों सुरक्षा कर्मियों की तैनाती करनी पड़ती है।

बार-बार चुनाव होने से इस सुरक्षा बलों की तैनाती और खर्च दोनों ही बढ़ जाते हैं। "One Nation One Election" की योजना से इस खर्च को सीमित किया जा सकता है, क्योंकि एक ही बार चुनाव होने से सुरक्षा और प्रशासनिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सकता है।

प्रचार पर खर्च में कमी
राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए प्रचार एक बड़ा वित्तीय बोझ होता है। हर बार चुनाव प्रचार के दौरान दलों को बड़ी मात्रा में धनराशि खर्च करनी पड़ती है। अगर चुनाव एक साथ होंगे, तो राजनीतिक दलों को बार-बार प्रचार अभियान चलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनके खर्च में भी कमी आ सकती है।

एक साथ चुनाव कराने से न सिर्फ सरकारी बल्कि राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के निजी खर्चों में भी कमी आएगी। इसके अलावा, बार-बार चुनावी रैलियों और प्रचार कार्यक्रमों से भी संसाधनों की बर्बादी होती है, जिसे एक बार में निपटाया जा सकता है।

40 प्रतिशत की आ सकती है कमी
जानकारों की मानें तो "One Nation One Election" से चुनावी खर्चों में करीब 40% तक की कमी आ सकती है। भारतीय चुनाव आयोग के पूर्व प्रमुखों का भी मानना है कि इस योजना से प्रशासनिक और सुरक्षा खर्चों में भारी कटौती की जा सकती है। हालांकि, यह भी सच है कि इस योजना को लागू करने में कई संवैधानिक और कानूनी चुनौतियां हैं, जिनका समाधान करना जरूरी होगा।

एक साथ चुनाव करवाने में कितना पैसा होगा खर्च?
हालांकि, अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर एक साथ चुनाव करवाने में कितना पैसा खर्चा होगा? इस सवाल का जवाब भी सामने आ गया है। दरअसल, 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के लिए गठित पैनल ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी है। समिति की तरफ पेश रिपोर्ट में बताया गया है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ करवाने पर कितना खर्च आएगा।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि अगर 2029 में लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ करवाए जाएं, तो चुनाव आयोग को ईवीएम और वीवीपैट खरीदने के लिए कम से कम 8000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी।

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