One Nation, One Election: कांग्रेस बोली, 'अलोकतांत्रिक है आइडिया, भंग हो समिति', रामनाथ कोविंद से ये कहा
कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के विचार को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि यह विचार न सिर्फ अलोकतांत्रिक है, बल्कि संघवाद और संविधान के मूल ढांचे के भी खिलाफ है।
यही नहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अगुवाई वाली उस उच्च-स्तरीय समिति को भी भंग करने की मांग की है, जो देश में एक साथ चुनाव करवाए जाने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।

भंग हो वन नेशन, वन इलेक्शन समिति- कांग्रेस
इस समिति के सचिव नितेन चंद्रा को लिखे खत में कांग्रेस नेता ने कहा है, 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के विचार का सख्त विरोध करती है। एक सफल और मजबूत लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए, ये आवश्यक है कि पूरे विचार को छोड़ दिया जाए और उच्चाधिकार प्राप्त समिति भंग कर दी जाए।'
पूर्व राष्ट्रपति के पद का दुरुपयोग न होने दें- खड़गे
यही नहीं, खड़गे ने अपने खत में पूर्व राष्ट्रपति से कहा है, 'इस देश में संविधान और संसदीय लोकतंत्र को नष्ट करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से उनकी शख्सियत और भारत के पूर्व राष्ट्रपति के पद का दुरुपयोग न होने दें।'
इस समिति ने इस मसले पर 18 अक्टूबर, 2023 को जनता से सलाह भेजने को कहा था। इसकी ओर इशारा करते हुए खड़गे ने आरोप लगाया है कि लगता है कि समिति ने 'पहले ही अपना मन बना लिया है और सलाह मांगना दिखावा भर है।'
कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, 'सरकार, संसद और भारतीय चुनाव आयोग को एक साथ चुनाव की तरह के अलोकतांत्रिक विचारों के बारे में बात करके लोगों का ध्यान भटकाने की जगह लोगों के जनादेश का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।'
समिति की संरचना 'पक्षतापूर्ण'- कांग्रेस
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समिति की संरचना 'पक्षतापूर्ण' है। उनका दावा है कि इस समिति का गठन बिना विपक्षी दलों के साथ चर्चा के गई गई है। जबकि, कई राज्यों में वह सत्ता में हैं और इसके फैसले से वे राज्य भी प्रभावित होंगे।
कांग्रेस नेता ने कहा है, 'जब समिति के अध्यक्ष भारत के पूर्व राष्ट्रपति जैसे व्यक्ति हैं, तो यह परेशान करने वाली बात है कि आम मतदाताओं को भी लगता है कि समिति का परामर्श मांगना एक दिखावा होने की संभावना है, क्योंकि मन पहले ही बना लिया गया है।'
खड़गे ने एक साथ चुनाव करवाने पर कम खर्च होने की दलील की भी खिल्ली उड़ाने की कोशिश की है।












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