Omicron:क्‍या जिन्‍हें कोरोना वैक्‍सीन लग चुकी है वो ओमिक्रॉन से पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं? जानें डॉ सुरेश से

नई दिल्‍ली, 05 नवंबर। कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के शनिवार को दो और नए केस भारत में सामने आए। वहीं दिल्‍ली के लोक नायक अस्‍पताल में ओमिक्रॉन के 8 संदिग्‍ध मरीजों को शुक्रवार अस्‍पताल में भर्ती किया गया है। उनके सैंपल जीनोम सीक्वेंसिग के लिए भेजे जा चुके हैं। भारत में ओमिक्रॉन की एंट्री के बाद लोग भयभीत हैं। ऐसे में ओमिक्रॉन से बचाव के उपाय क्‍या हैं, उसके लक्षण और इलाज क्‍या है, इसके लिए कौन सी जांच करवाई जानी चाहिए? क्‍या जिन्‍हें कोरोना वैक्‍सीन लग चुकी है वो इस वेरिएंट से पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं? इन सभी सवालों के जवाब जानिए दिल्‍ली के लोकनायक अस्‍पताल के मेडिकल डॉयरेक्‍टर डॉक्‍टर सुरेश कुमार से।

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क्‍या ओमिक्रॉन वेरिएंट भारत में तीसरी लहर का संकेत है?
एलएनजेपी अस्‍पताल के मेडिकल डॉयरेक्‍टर ने कहा लोगों को इतना पैनिक होने की आवश्‍यकता नहीं है। ओमिक्रॉन के पहले जो वेरिएंट आए उसमें डेल्‍टा सबसे अधिक देशों में फैला वहीं ओमिक्रॉन इतने कम दिनों में 30 से अधिक देशों में फैल चुका है, ऐसे में हमें जागरूक और अधिक सावधानी बरते की जरूरत है। पिछले दिनों कोरोना के केस ना के बराबर थे। लेकिन कुछ दिनों में कोरोना के वो केस सामने आए हैं जो ओमिक्रॉन प्रभावित देशों से दिल्‍ली आए हैं। तो अभी ये कहना बहुत जल्‍दी होगी कि ये ओमिक्रॉन के कारण तीसरी लहर आएगी। हालांकि तीसरी लहर को लेकर हमारी सरकारें सतर्क हैं, अगर ऐसी स्थि‍ति आती है तो हम उससे निपटने के लिए तैयार हैं।

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ओमिक्रॉन के लक्षण क्‍या हैं?

डॉक्‍टर सुरेश कुमार ने बताया ओमिक्रॉन के मरीज को हल्‍का बुखार, आंख का लाल होना, शरीर में कमजोरी, गले में खराश समेत अन्‍य लक्षण नजर आ रहे हैं। जो कि सामान्‍य है कोरोना के कुछ लक्षणों जैसे ही हैं। वहीं ओमिक्रॉन के जो अब तक केस आए उन मरीजों में मुंह का स्‍वाद जाने और नाक की स्‍मेल जाने जैसी शिकायत नहीं देखी गई है।

दिल्‍ली में ओमिक्रॉन को लेकर क्‍या तैयारी है?

एलएनजेपी अस्‍पताल के मेडिकल डॉयरेक्‍टर डॉक्‍टर सुरेश कुमार ने बताया दिल्‍ली में हमारे एलएनजेपी अस्‍पताल को इसके लिए सेंटर बनाया गया है। जहां अभी तक 8 ओमिक्रॉन के संदिग्‍ध मरीज भर्ती हुए हैं। उनकी रिपोर्ट आने पर ही पुष्टि होगी। अभी फिलहाल ऐसे मरीजों के लिए 40 बेड तैयार किए गए है। आईसीयू बेड का भी इंतजाम किया गया है। अगर भविष्‍य में जरूरत पड़ी तो हमारे अस्‍पताल और दिल्‍ली के रामलीला मैदान समेत हमारे अस्‍पताल में 500 मरीजों के इलाज लिए तुरंत सेवाएं शुरू हो सकती है। हमारे पास वैटीलेटर, ऑक्‍सीजन समेत पर्याप्‍त स्‍टाफ है।

क्‍या जिनको कोरोना वैक्‍सीन लग चुकी है वो ओमिक्रॉन से पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं?

डॉक्‍टर सुरेश ने कहा जिन्‍होंने दोनों वैक्‍सीन ली है या एक वैक्‍सीन ली है उन्‍हें ऐसा नहीं है कि ओमिक्रॉन का खतरा नहीं है। हां ये जरूर है कि जिन्‍हें वैक्‍सीन लगी है उन्‍हें मामूली रूप से ही ये प्रभावित करेगा। लेकिन जिन्‍होंने वैक्‍सीन नहीं लगवाई है उन्‍हें जान का खतरा तक हो सकता है। इसलिए जिन लोगों ने कोरोना से बचाव के लिए एक भी वैक्‍सीन अभी तक नहीं लगवाई है या केवल एक ही डोज लगवाई है कृपया वो जल्‍द से जल्‍द वैक्‍सीन लगवा कर स्‍वयं को सुरक्षित कर लें।

ओमिक्रॉन से बचने के लिए क्‍या बूस्‍टर डोज लगवानी चाहिए?

डॉक्‍टर सुरेश कुमार ने कहा फुल वैक्‍सीनेटेड लोगों को बूस्‍टर डोज लेने की जल्‍दी नहीं करना चाहिए। वैक्‍सीन ओमिक्रॉन से भी सुरक्षा प्रदान करती है। इसलिए बूस्‍टर डोज के लिए जब तक कोई सरकार की ओर से गाइडलाइन नहीं आ जाती है तब तक ऐसा कोई भी कदम उठाना नहीं चाहिए।

कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से कैसे बचा जा सकता है ?

डॉक्‍टर सुरेश कुमार ने कहा कि अभी शादी-ब्याह के सीजन में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। जरूरत ना हो तो पब्लिक प्‍लेस और भीड़ भाड़ वाली जगहों पर जानें से बचे। इसके अलावा कोरोना संबंधी गाइडलाइन का सख्‍ती से पालन करने की आवश्‍यकता है। मुंह पर मास्‍क और दो गज की दूरी बनाकर ही हम अपने आप को इस कोरोना के नए वेरिएंट से सुरक्षित रह सकते हैं।

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