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ऑफिस से छुट्टी ली और बदल दी लोगों की ज़िंदगी

By Bbc Hindi

ऑफिस से छुट्टी ली और बदल दी लोगों की ज़िंदगी

समाज के तय मानकों के हिसाब से एक अच्छी नौकरी, अच्छी लाइफ़स्टाइल और मंहगे सामान होना ही हमें भ्रम देता है कि यह सब 'खुशी' है. लेकिन कभी-कभी सब कुछ होना भी काफ़ी नहीं होता.

आईआईटी बॉम्बे से पढ़े 30 साल के जयदीप बंसल एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पद और वेतन पर काम कर रहे थे लेकिन उनकी तलाश क्या थी, ये उन्हें भी नहीं पता था.

2013 में एक दिन ऑफ़िस से दो हफ़्ते की छुट्टी ली और उन छुट्टियों ने उनके साथ-साथ कई और ज़िंदगियां बदल दीं.

जयदीप ये कहानी इस तरह बताते हैं:

"मेरे दोस्त पारस ने 'ग्लोबल हिमालयन एक्सपीडिशन' शुरू किया था जिसका मकसद हिमालय के दूर-दराज इलाकों में बिजली और शिक्षा पहुंचाना था."

"इन छुट्टियों में मैंने इसी ग्रुप के साथ हिमालय जाने का इरादा किया. वहां कई लोगों से मिला जिन्होंने मुझे काफ़ी प्रभावित किया. रॉबर्ट स्वान से मिला जो धरती के दोनों ध्रुवों पर चल कर जा चुके हैं.

"ऐसे लोगों से मिला जिन्होंने पानी को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए दो साल के अंदर उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव तक साइक्लिंग की. पहाड़ों में जब आप ऐसे लोगों के करीब हों और जहां मोबाइल, इंटरनेट आपसे दूर हों तो बहुत सीखने को मिलता है."

"मुझे पता नहीं था कि आज भी ऐसे इलाके हैं लोग बिना बिजली के रहते होंगे. वहां से वापस लौटा तो इतना पता था कि इस प्रोग्राम से जुड़े रहना है."

"2014 में जब दूसरी बार जाने का मौका मिला तो इस बार इरादा किया कि हिमालय के किसी गांव में बिजली पहुंचाएंगे."

"15 दिन की छुट्टी लेकर जब हम फिर से हिमालय पहुंचे तो तीन दिन में लद्दाख के एक सुदूर गांव सुमदा चेन्मो में बिजली पहुंचाई. हमने सोलर पैनल और बैट्री के इस्तेमाल से वहां बिजली मुहैया करवाई."

"इस काम के बाद जो मुझे मिला वो शायद किसी और'अनुभव से बहुत ज़्यादा था."

"इसके बाद 2015 में मैंने 3 महीने की छुट्टी ली. फिर वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भी हम शामिल हुए और सुदूर गांवों में बिजली पहु्ंचाने के प्रोजेक्ट के बारे में बताया तो कुछ कॉर्पोरेट कंपनियों ने हमें पांच गांवों के लिए फंडिंग दे दी.

फिर हमने तीन महीने में दस गांवों में बिजली पहुंचाई. चीन और पाकिस्तान की सीमा पर बसे 30 गांवों का सर्वे किया. हमने गांव के लोगों को शामिल किया क्योंकि बिना उनके सहयोग के हमारा काम स्थायी नहीं हो सकता था."

"हम लोग ट्रैक करके गांवों में जाते थे. एक-दो बार मरते मरते बचा. ऐसा नहीं है कि आप बस उठकर आ गए और हो जाएगा. पहाड़ों में ख़तरा भी होता है. लेकिन जब ऐसा कुछ होता है तभी आप खुद से पूछते हैं कि इस जोख़िम का कोई महत्व है या नहीं."

"इसका महत्व पता चलता है जब आप लोगों के चेहरे पर खुशी देखते हैं. आपने उनके लिए बस इतना किया और वो आपको राजा बना देते हैं, भगवान की तरह देखने लगते हैं."

"एक गांव में लोगों ने 200 साल पुराने खास कपड़े मुझे पहनाए, जो वो अपने किसी गुरु को ही पहनाते हैं."

"बिजली देखते ही लोग नाचने लगते थे. कभी कोई रोने लगता था. कोई पूछ रहा था कि इस बल्ब में केरोसीन कहां से डलता है. आप बस तार लगाना शुरु करते हैं और रसोई में बैठी महिला शुक्रिया कहते नहीं थकती. उनका प्यार इतना था कि शहरों में तो कभी नहीं मिल सकता."

"2016 में मैंने अपनी नौकरी को अलविदा कह दिया. जानता था कि मैं इसमें ज़्यादा पैसा नहीं कमा पाऊंगा लेकिन अब तक मुझे पता चल गया था कि मेरी मोटिवेशन क्या है."

"इन 3 महीनों में मैंने देखा कि असल खुशी क्या होती है. एक बल्ब कैसे लोगों की ज़िंदगी बदल सकता है, कैसे बल्ब का स्विच ऑन होते ही लोग खुशी से नाचने लगते हैं, हंसने लगते हैं और खुशी से रोने लगते हैं."

"मैंने ज़मीन पर लोगों के साथ मिलकर काम करना सीखा, अलग-अलग परिस्थितियों में क्या करना है, कैसे सब्र रखना है सीखा, क्योंकि पहाड़ों से ज़्यादा आपको कोई नहीं सिखा सकता."

BBC Hindi
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English summary
Off the office and changed the lives of the people
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