ओडिशा के 5T स्कूल की खुली पोल, हेडमास्टर नहीं, स्पोर्ट्स टीचर पढ़ा रहे विज्ञान और गणित
ओडिशा सरकार ने स्मार्ट कक्षाओं के जरिए सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को क्वालिटी एजुकेशन देने के लिए 5T पहल की गई थी, जिस पर राज्य सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए है लेकिन जमीनी हकीकत पूरी तरह से इससे अलग तस्वीर पेश कर रही है। ओडिशा के सरकारी स्कूल जबरदस्त शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, जिससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

हाल ही ओडिशा के एक स्कूल के बारे में ऐस खुलासा हुआ है कि जिसने सरकार की इस पहल की पोल खोल दी। दरअसल, बालासोर के भोगराई ब्लॉक के अंतर्गत पुतिनेश्वर सरकारी हाई स्कूल में कक्षा 9 और 10 में लगभग 129 छात्र पढ़ते हैं और स्कूल में कथित तौर पर शारीरिक शिक्षा शिक्षक (पीईटी) सहित केवल तीन शिक्षक हैं। विज्ञान, गणित, संस्कृत और हिंदी जैसे विषयों को पढ़ाने के लिए स्कूल में कोई शिक्षक नही हैं।
चूंकि स्कूल में इन अहम विषयों के शिक्षक नहीं हैं तो उनकी अनुपस्थिति में, खेल शिक्षक को कथित तौर पर कभी-कभी छात्रों को विज्ञान और गणित पढ़ाने के लिए मजबूर किया जाता है। इस सरकारी स्कूल जहां पर 5 T स्कूल के अंतर्गत आता है, स्कूल की इस असलियत ने सकरार की इस महत्वाकांक्षी योजना की पोल खोल कर रख दी है।
हाल ही में ऐसा ही खुलासा हुआ जिसने सरकार की इस पहल की पोल खोल दी। दरअसल, बालासोर के भोगराई ब्लॉक के अंतर्गत पुतिनेश्वर सरकारी हाई स्कूल में कक्षा 9 और 10 में लगभग 129 छात्र पढ़ते हैं। हालाँकि, स्कूल में कथित तौर पर शारीरिक शिक्षा शिक्षक (पीईटी) सहित केवल तीन शिक्षक हैं। विज्ञान, गणित, संस्कृत और हिंदी जैसे विषयों को पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं हैं।
शिक्षकों की अनुपस्थिति में, खेल शिक्षक को कथित तौर पर कभी-कभी छात्रों को विज्ञान और गणित पढ़ाने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे क्षेत्र में शिक्षा प्रणाली की गंभीर स्थिति उजागर होती है।
इतना ही नहीं इस स्कूली में प्रधानाध्यापक का पद रिक्त पड़ा हुआ है। कथित तौर पर 20 किमी दूर स्थित एक अन्य सरकारी हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक अपने स्कूल के साथ इस स्कूल का भी अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं।
रश्मिरेखा महापात्र नाम की एक छात्रा ने बताया कि
हमारी क्लास में पीईटी सहित केवल कुल तीन शिक्षक हैं। हम स्कूल में विज्ञान और गणित नहीं पढ़ सकते। अगर हम इसके कारण परीक्षा में कम अंक प्राप्त करते हैं तो कौन जिम्मेदार होगा।
टीचरों की कमी को लेकर अब तक कई बार संबंधित विभाग को सूचित किया जा चुका है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई, नजीजा शून्य ही रहा। स्कूल में टीचर की कमी को लेकर कई छात्र-छात्राओं के अभिभावकों में नाराजगी भी है।
बांका बिहारी महापात्र नाम के अभिभावक ने इस बारे में बात की। उन्होंने बताया
इस स्कूल में पिछले 20 साल से कोई हेडमास्टर नहीं है। इस विद्यालय की देखरेख के लिए दूसरे विद्यालय के प्रधानाध्यापक को प्रभार दिया गया था। वह भी नहीं आता. यहां वर्षों से शिक्षकों के पांच पद रिक्त हैं। केवल स्मार्ट क्लासरूम बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा। छात्रों को सबसे पहले शिक्षकों की जरूरत है।












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