किसान आंदोलन: ओडिशा की मांग, MSP पर स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करे केंद्र सरकार
किसान आंदोलन: ओडिशा की मांग, MSP पर स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करे केंद्र सरकार
Odisha to move Centre for implementation of Swaminathan: कृषि कानून के खिलाफ देश में जारी किसान आंदोलन के बीच ओडिशा सरकार ने मंगलवार को सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के बारे में एमएस स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करने की मांग की है। जिसके लिए ओडिशा सरकार ने इसे केंद्र सरकार को स्थानांतरित करने का फैसला किया है। इस संबंध में फैसला मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अध्यक्षता में की गई एक बैठक में लिया गया। ओडिशा की सरकार ने कहा है कि वो किसानों के विकास की दिशा में काम कर रही है और किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है। देश में पिछले कुछ महीनों से किसान आंदोलन के बीच स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की बात कही जा रही है।
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संसदीय कार्य मंत्री बीके अरुखा और मुख्य सचिव एससी महापात्र ने कहा, राज्य मंत्रिमंडल ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सभी फसलों के एमएसपी के बारे में एमएस स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करने के अपने पहले के रुख को कायम है।
संसदीय कार्य मंत्री बीके अरुखा ने कहा, राज्य सरकार किसानों की आय सृजन के लिए एमएसपी को एक महत्वपूर्ण उपकरण मानती है। किसानों की आय को अन्य क्षेत्रों में आय की वृद्धि और खेती की लागत में वृद्धि के साथ तालमेल रखने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी फसल उपज का एमएसपी समग्र रूप से तय किया जाना चाहिए। ताकि खेती के संचालन को और भी ज्यादा फायदेमंद बनाया जा सके और किसानों को हर तरह जोखिमों से बचाया जा सके।
संसदीय कार्य मंत्री बीके अरुखा ने कहा कि ओडिशा विधानसभा ने 2017 और 2018 में इस संबंध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। बीके अरुखा ने कहा कि स्वामीनाथन ने किसानों पर राष्ट्रीय आयोग की अध्यक्षता की थी और सिफारिश की थी कि एमएसपी खेती की औसत लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक होना चाहिए।
प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन को देश में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है। किसानों की तमाम समस्याओं के लिए नवंबर 2004 में एक कमेटी बनी, जिसे राष्ट्रीय किसान आयोग के नाम से भी जाना जाता है। स्वामीनाथन कमेटी ने अक्टूबर 2006 में अपनी रिपोर्ट दी, जिसमें खेती-किसानी में सुधार के लिए तमाम बातें कही गई थीं। किन अब तक कोई भी सरकार इसे पूरे तरीके से लागू नहीं कर सकी है।












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