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मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए ओडिशा सरकार का मास्टर प्लान तैयार, जानें कैसे होगा कारगार?

ओडिशा में मजदूरों के पलायन की समस्या को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने इसका समाधान खोजने का निर्णय लिया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने कहा कि पलायन की समस्या का गहराई से अध्ययन किया जाएगा, ताकि मजदूरों को अपने ही राज्य में स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।

उन्होंने कहा कि सरकार ने इस उद्देश्य के लिए गरीबी मुक्त भारत की दिशा में काम करने वाली संस्था नज फाउंडेशन को शामिल करने का निर्णय लिया है। गंजम, बलांगीर, कालाहांडी, झारसुगुड़ा और बरगढ़ जैसे जिलों से अपेक्षाकृत बड़ी संख्या में लोग आजीविका और कमाई की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं। आइए जानते हैं पलायन के मुख्य कारण और कैसे होगा समस्या का समाधान? ...

Odisha government

क्या है पलायन के मुख्य कारण?
राज्य के गंजम, बलांगीर, कालाहांडी, झारसुगुड़ा और बरगढ़ जैसे जिलों से बड़ी संख्या में मजदूर अन्य राज्यों में पलायन करते हैं। इसके मुख्य कारण हैं...

  • उच्च आय की उम्मीद: मजदूर बेहतर कमाई की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं।
  • स्थानीय आजीविका का अभाव: मजदूरों को अपने जिलों में पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं मिलते।
  • कर्ज का बोझ: कर्ज चुकाने के लिए मजदूर मजबूर होकर पलायन करते हैं।

समस्या का समाधान कैसे होगा?
सरकार ने इस अध्ययन और समाधान के लिए नज फाउंडेशन को जिम्मेदारी दी है, जो पहले ही झारखंड और पश्चिम बंगाल में इस दिशा में काम कर चुकी है।

पलायन के कारणों की पहचान:

  • जिलों और ग्राम पंचायतों का गहन अध्ययन किया जाएगा।
  • स्थानीय जरूरतों, जलवायु और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखा जाएगा।

स्थायी आजीविका के उपाय:

  • खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
  • स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार के विकल्प तैयार किए जाएंगे।

परिणामों की निगरानी:

  • फाउंडेशन समय-समय पर मजदूरों की वित्तीय और सामाजिक स्थिति का आकलन करेगा।

पलायन को रोकने के लिए प्रमुख सुझाव

राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी के सुझाव:
क्लस्टर दृष्टिकोण:

  • पलायन-प्रभावित पंचायतों और ब्लॉकों में क्लस्टर आधारित योजनाएं लागू की जाएं।
  • छोटे-छोटे समूहों में आजीविका केंद्र स्थापित किए जाएं।

स्थायी समाधान के उपाय:

  • स्थानीय रोजगार के साधन: कृषि आधारित उद्योग, कुटीर उद्योग, और हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • आधारभूत ढांचे का विकास: पलायन-प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार केंद्र और प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
  • ऋण राहत:मजदूरों को कर्ज से राहत दिलाने के लिए सरकार विशेष योजनाएं लाएगी।

नज फाउंडेशन की भूमिका

  • नज फाउंडेशन ने झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में काम करके मजदूरों के पलायन को कम करने में सफलता पाई है।
  • यह संस्था स्थानीय समस्याओं का अध्ययन कर, सामुदायिक विकास योजनाएं तैयार करती है।
  • ओडिशा में यह संस्था स्थानीय पर्यावरण और आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से रोजगार के साधन विकसित करेगी।

अध्ययन के बाद क्या होगा?

  • नीति निर्माण:अध्ययन के आधार पर सरकार नई रोजगार नीतियां बनाएगी।
  • स्थायी समाधान: कृषि, छोटे उद्योग, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जाएगा।
  • नियमित मूल्यांकन: मजदूरों की वित्तीय और सामाजिक प्रगति पर नजर रखी जाएगी।

क्या बदल सकता है?
अगर, अध्ययन और योजनाएं सही दिशा में लागू होती हैं, तो ओडिशा में मजदूरों का पलायन कम होगा। स्थानीय रोजगार के साधन बढ़ने से मजदूरों को अपने ही राज्य में रोजगार मिलेगा। कर्ज और आर्थिक तंगी के कारण होने वाले पलायन को रोका जा सकेगा। मजदूरों और उनके परिवारों का जीवन स्तर सुधरेगा।

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