Odisha: नुआगांव में तहसील की मांग बनेगा चुनावी मुद्दा, BJP जोर- शोर से उठाएगी
ओडिशा में नुआगांव एक ऐसा अकेला विधानसभा क्षेत्र है, जहां तहसील कार्यालय अब तक स्थापित नहीं किया जा सका। रिपोर्ट्स के मुताबिक ओडिशा के कुल 314 ब्लॉकों में से नुआगांव को छोड़कर बाकी 313 ब्लॉक में तहसील कार्यालय हैं। जबकि 2003 में सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर कहा कि सभी ब्लॉकों में तहसील कार्यालय होंगे। ऐसे में इस बार के विधानसभा चुनाव के दौरान नुआगांव में तहसील की मांग का मुद्दा हावी रहने वाला है।
आदिवासी बहुल सुंदरगढ़ जिले के नुआगांव ब्लॉक में रहने वाली लगभग 1.10 लाख आबादी को तहसील कार्यालय की कमी के कारण राजस्व संबंधी सेवाओं का लाभ उठाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ओडिशा के कुल 314 ब्लॉकों में से नुआगांव को छोड़कर, जो उनके निर्वाचन क्षेत्र में आता है, 313 में अपने स्वयं के तहसील कार्यालय हैं।

भाजपा के बीरमित्रपुर विधायक शंकर ओराम ने कहा कि 2003 में सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर कहा कि सभी ब्लॉकों में तहसील कार्यालय होंगे। इसके बावजूद कई नए तहसील कार्यालय चालू किए गए, लेकिन केवल नुगांव को नजरअंदाज किया जा रहा है।
विधायक शंकर ओराम ने बीजद सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, "नुआगांव के निवासियों को राजस्व संबंधी मामलों के लिए या बीरमित्रपुर शहर के तहसील कार्यालय में आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए 40-50 किमी की यात्रा करनी पड़ती है, जो एक ब्लॉक भी नहीं है। इसके अलावा, कुआंरमुंडा और बिसरा के निवासियों को जमीन की बिक्री, हस्तांतरण या पट्टे के लिए बीरमित्रपुर तहसील कार्यालय जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है क्योंकि इन दो ब्लॉकों में तहसील कार्यालयों में कोई उप-रजिस्ट्रार नहीं है।"
बीजेपी विधायक ने कहा कि आजादी के बाद से अब तक नुआगांव ब्लॉक के लोगों के लिए तहसील की व्यवस्था ना हो पाना राज्य सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। भाजपा आगामी चुनावों में इस मुद्दे को अपना चुनावी मुद्दा बनाएगी।












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