Triple Talaq:सरकार राज्यसभा में भी जुटा सकती है बहुमत, ये है भाजपा का गुना-गणित

नई दिल्ली- राज्यसभा में इस हफ्ते ट्रिपल तलाक बिल पर सरकार और विपक्ष में एकबार फिर से जोर-आजमाइश हो सकती है। सरकार बहुमत के अभाव के बावजूद पिछले हफ्ते जिस तरह से आरटीआई बिल वहां पास कराने में कामयाब हो गई, उसने उसे उत्साह से भर दिया है। इसके कारण पिछले पांच साल से उच्च सदन में चली आ रही उसकी नाकामियों के सिलसिले पर विराम लग गया है। बीजेपी को उम्मीद है कि जिस तरह से उसने राज्यसभा से बहुमत नहीं होने के बावजूद भी आरटीआई बिल पास कराया है, उसी तरह अब सांसदों की गैर-हाजिरी, वॉकआउट और कुछ गैर-एनडीए एवं गैर-यूपीए दलों के सहयोग से इसबार तीन तलाक बिल भी पास करा सकती है। गौरतलब है कि आरटीआई बिल पास कराने में बीजेडी, टीआरएस और वाईएसआरसीपी जैसे दलों ने सरकार की मदद की थी।

मोदी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती

मोदी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती

आरटीआई बिल की तरह ट्रिपल तलाक बिल को राज्यसभा से पास कराने में फर्क ये है कि एनडीए की सहयोगी जेडीयू इसका विरोध कर रही है। इसी तरह कुछ और पार्टियां भी मौलानाओं और मुस्लिम नेताओं के विरोध को देखते हुए इसे समर्थन करने को लेकर आशंकित दिख रही हैं। मसलन आरटीआई विधेयक पर सरकार का साथ देने वाली वाईएसआरसीपी ने साफ कर दिया है कि उसके दो सांसद तीन तलाक बिल के विरोध में वोट डालेंगे।

राज्यसभा की क्या है मौजूदा स्थिति?

राज्यसभा की क्या है मौजूदा स्थिति?

कुल 245 सदस्यों वाले सदन में अभी सिर्फ 241 सांसद हैं। यानि बहुमत के लिए सरकार को कम से कम 121 सांसदों का समर्थन चाहिए। जबकि, एनडीए के पास अभी कुल 113 सांसद हैं। वहीं यूपीए के पास 68 और बीजेपी विरोधी बाकी विपक्षी दलों के पास 42 सांसद है। मतलब, बीजेडी के 7, टीआरएस के 6, वाईएसआरसीपी के 2, एनपीएफ के 1 और अन्य 2 सांसदों से बीजेपी उम्मीद लगा सकती है। हालांकि, जगनमोहन रेड्डी की पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने फिलहाल भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। लेकिन, अगर जेडीयू यहां भी वॉकआउट कर जाती है तो बहुमत का आंकड़ा 121 से घटकर 118 तक पहुंच सकता है, जिससे सरकार को परोक्ष मदद मिल सकती है।

सरकार के मैनेजरों को यहां से है उम्मीद

सरकार के मैनेजरों को यहां से है उम्मीद

कहते हैं कि निराशा में ही आशा की किरण भी छिपी होती है। बीजेपी के फ्लोर मैनेजरों को भी उसी पर उम्मीद टिकी है। मसलन, सरकार मानकर चल रही है कि जेडीयू ने जैसे लोकसभा में इस मुद्दे पर वॉकआउट किया, उसी तरह यहां भी करेगी तो उसका काम ज्यादा नहीं बिगड़ेगा। इसी तरह पार्टी एआईएडीएमके और टीआरएस के वोटिंग में हिस्सा नहीं लेने या वॉकआउट करने की परिस्थतियों का भी आकलन कर रही है। अगर ये पार्टियां भी वोटिंग से अलग रहती हैं तो जादुई आंकड़ा और ज्यादा गिरने की संभावना है। लेकिन, सरकार के लिए राहत की बात ये है कि इन दलों ने लोकसभा में इस विधेयक का विरोध नहीं किया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी को सबसे ज्यादा संभावना बीजेडी में नजर आ रही है। वैसे भी जबसे टीडीपी के चार सांसदों ने बीजेपी ज्वाइन की है, उपरी सदन में सत्ताधारी गठबंधन की स्थिति पहले से काफी मजबूत हो चुकी है।

ऐसे सरकार के पक्ष में झुक सकता है आंकड़ा

ऐसे सरकार के पक्ष में झुक सकता है आंकड़ा

भाजपा को सबसे ज्यादा उम्मीद बीजेडी के 7 और टीआरएस के 6 सांसदों पर है। अगर इन दलों के 13 सांसदों ने सरकार के पक्ष में वोटिंग कर दिया तो पासा आसानी से सरकार के पक्ष में पलट सकता है। सरकार इसी रणनीति के तहत इसबार ट्रिपल तलाक को हमेशा के लिए खत्म करने का दृढ़संकल्प लेकर चल रही है। लेकिन, यदि किसी वजह से सरकार को इसबार भी सफलता नहीं मिली, तब भी उसे इस बात का तो यकीन है ही कि वह अपना पॉलिटिकल प्वाइंट बनाने में तो कामयाब जरूर रहेगी, कि उसने मुस्लिम महिलाओं को उनका वाजिब हक दिलाने का गंभीर प्रयास किया है।

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