भारत की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या नीदरलैंड की आबादी से भी अधिक

नई दिल्ली। भारत में कानून व्यवस्था का हाल किस कदर हाशिये पर चला गया है आप इस बात का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि भारत की अदालतों में जितने मामले लंबित उनकी संख्या नीदरलैंड और कजाकिस्तान की आबादी के बराबर पहुंच गयी है।

supreme court

वहीं जिस तरह से सलमान खान के हिट एंड रन केस में 13 साल बाद फैसला आया है उससे यह भी साफ हो गया कि भारत में न्याय करने के लिए आपकों एक दशक से भी ज्यादा का इंतजार करना पड़ सकता है।

भारत में अदालत, सरकारी वकील और न्यायाधीशों की कमी के चलते पीड़ितों को सालों इंसाफ के लिए इंतजार करना पड़ता है। 2013 के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों पर नजर डालें तो 85 फीसदी मुकदमें लंबित पड़े हैं।

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कितने मामले हैं अदालतों में लंबित

दंगों के मामले- 254918
जख्मी किये जाने के मामले- 2201315
चोरी के मामले- 1158500
हत्या के मामले- 400981
अपहरण के मामले- 211900
डकैती के मामले- 157039
बलात्कार के मामले- 125147
दहेज के चलते मौत के मामले- 87673
आगजनी के मामले- 64670

सबसे ज्यादा मामले हत्या के हैं लंबित

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वहीं अगर देश की अदालतों में लंबित मामलों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा मामले हाई कोर्ट में हत्या और सिविल के विवाद के हैं। जबकि जिला अदालतों में भी 86.3 फीसदी मामले लंबित पड़े हैं। वहीं क्राइम के भी सबसे ज्यादा माले हाई कोर्ट में 56.1 फीसदी लंबित हैं।

अदालतों में है जजों का अकाल

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देश में न्याय व्यवस्था को सुधारने के लिए देश की अदालतों की संख्या और जजों की संख्या में इजाफे की सख्त जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट में आज भी 6 जजों की कमी है, जबकि देश के उच्च न्यायालय में 265 जजों की की है। वहीं जिला और सत्र न्यायालयों में 4288 जजों की कमी है।

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