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अब सही मायनों में आजादी का जश्‍न मनाएगा कश्मीर

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बेंगलुरु। जम्मू कश्मीर जश्न-ए-आजादी के रंग में डूबा हुआ है। अपने मूलभूत अधिकार मिलने के बाद 15 अगस्त को बाकी हिन्दुस्तानियों की तरह जम्मू कश्‍मीर के लोग भी हाथ में तिरंगा लहराते हुए शान से राष्ट्र-गान जन-गण-मन अधिनायक गाएंंगे। पिछले 70 वर्षों से जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग होने के बावजूद यहां के लोग देश की आाजादी का जश्न मनाने की बात तो दूर मूलभूत अधिकारों से भी वंचित थे। वह वर्षों से अनुच्छेद 370 के प्रवाधानों जिन बेवजह नियमों से जकड़े हुए थे उसने मुक्ति पाकर कश्मीर की जनता सही मायनें में आजाद हुई है। भारत का संविधान लागू होने के बाद अब जम्मू-कश्मीर के लोग भी शिक्षा के अधिकार, सूचना समेत अन्य मूलभूत अधिकार पाकर प्रसन्न हैं।

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जम्मू-कश्मीर की महिलाओं को सबसे बड़ी आजादी मिली है। ये आजादी उनकी व्यक्तिगत आजादी से जुड़ी हुई है।अब यहां की बेटी भी देश की अन्य बेटियों की तरह दूसरे राज्य के लड़के से शादी करने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्रत हैं। अगर वह दूसरे राज्य के पुरुष से शादी करती हैं तो उनकी नागरिकता खत्म नहीं होगी। अब यहां की महिलाओं पर पर्सनल कानून लागू नहीं होगा।

यहां के लोग प्रसन्न हैं क्योंकि अब शिक्षा के अधिकार, सूचना के अधिकार जैसे भारत के हर कानून का लाभ उठा सकेंगे।अनुच्छेद-370 समाप्त होने के साथ ही जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान भी इतिहास बन चुका है। भारत का संविधान लागू होने के बाद कश्मीर का अब अलग झंडा नहीं होगा वहां भी अब तिरंगा शान से लहराएगा।

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी मतलब जम्मू-कश्मीर में राज्य सरकार बनेगी। यहां के लोग अन्य राज्यों के लोगों की तरह अपने पसंद की राज्य सरकार चुन सकेंगें। अन्य राज्यों से जम्मू-कश्मीर जाकर रहने वाले लोगों को भी वहां मतदान करने का अधिकार मिल सकेगा। साथ ही अन्य राज्यों के लोग भी अब वहां से चुनाव लड़ सकेंगे।अन्य राज्यों से जम्मू-कश्मीर जाकर रहने वाले लोगों को भी वहां मतदान करने का अधिकार मिल सकेगा।

केंद्र सरकार की कैग जैसी संस्था अब जम्मू-कश्मीर में भी भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए ऑडिट कर सकेगी। इससे वहां भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।अब जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में भी सुप्रीम कोर्ट का हर फैसला लागू होगा। पहले जनहित में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले वहां लागू नहीं होते थे। अब तक यहां की कानून व्यवस्था मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी थी।

अब दिल्ली की तरह जम्मू-कश्मीर व लद्दाख की कानून-व्यवस्था भी सीधे केंद्र के हाथ में होगी। गृहमंत्री, उपराज्यपाल के जरिये इसे संभालेंगे। प्रशासनिक कार्य के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार को अब केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर वहां तैनात उपराज्यपाल से मंजूरी लेनी होगी।

बाते दें 15 अगस्त के दिन स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए कश्मीर में धूमधाम से तैयारी की जा रही है। श्रीनगर का शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम देशभक्ति के रंग में रंगा हुआ हैं। वहां बडें आयोजन की तैयारी की जा रही है।

जम्मू-कश्मीर से जुड़े तथ्य

इतिहास में जायें तो पता चलता है कि कश्मीर पर हमले की योजना पाकिस्तानी सेना ने बनाई थी जिसका नेतृत्व पाकिस्तान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी अकबर खान ने किया था। पाकिस्तान ने कबायलियों को कश्मीर पर हमले के लिए उकसाया। इस उकसावे में आकर करीब 5,000 कबायली घुसपैठियों ने अक्टूबर, 1947 में हमला किया था।पाकिस्तानी घुसपैठियों का सामना डोगरा रेजिमेंट के सैनिकों से मुजफ्फराबाद में हुआ। वहां उन्होंने मुजफ्फराबाद और डोमेल के बीच के पुल पर कब्जा कर लिया। अगले दो दिनों में उन लोगों ने गढ़ी और चिनारी पर कब्जा कर लिया। हमलावरों का मुख्य समुदाय उरी की ओर बढ़ा।

जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह के आग्रह पर भारत ने कब श्रीनगर में सैनिक भेजने का फैसला किया। 24 अक्टूबर को महाराजा हरि सिंह ने भारत सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की। 25 अक्टूबर को वी.पी.मेनन श्रीनगर पहुंचे। 26 अक्टूबर को कैबिनेट की रक्षा कमिटी की मीटिंग हुई जिसके बाद सैनिकों की दो टुकड़ियों को भेजने का फैसला लिया गया। 27 अक्टूबर को प्रशासकीय प्रमुख और राज्य विभाग के सचिव वी.पी. मेनन विलय का पत्र लेकर दिल्ली लौटे।

जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय करना ज्यादा जरूरी था। इसलिए उस समय जम्मू-कश्मीर को धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार दिए गए थे। 35ए को 1954 में इसे राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से संविधान में जोड़ा गया था। आर्टिकल 35ए जम्मू-कश्मीर विधानसभा को राज्य के 'स्थायी निवासी' की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है। इसके तहत जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को कुछ खास अधिकार दिए गए थे।

nirmal singh

5 अगस्त को हुआ यह ऐतिहासिक फैसला

5 अगस्त, 2019 को देश के गृह मंत्री ने संसद में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को खत्म करने का प्रस्ताव रखा जिसे मंजूरी मिल गई। साथ ही जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी रखा गया जिसे भी संसद की मंजूरी मिली। जम्मू-कश्मीर को अब दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटा गया। जम्मू-कश्मीर को एक केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर भारत का सबसे बड़ा केन्द्र शासित प्रदेश बन गया।अब जम्मू-कश्मीर विधानसभा की अवधि पहले के 6 साल की बजाय 5 साल होगी।

परिसीमन के बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों की संख्या 107 से बढ़ाकर 114 किए जाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश के उपराज्यपाल को अगर लगेगा कि विधानसभा में महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है तो वह विधानसभा में दो सदस्यों को नामित कर सकेंगे। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 में जम्मू-कश्मीर में पांच लोक सभा सीट और लद्दाख में एक लोकसभा सीट का प्रस्ताव है।

भारत में पहले से 7 केंद्रशासित प्रदेश हैं। उनके नाम अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, दादर और नगर हवेली, लक्षद्वीप, पुडुचेरी, चंडीगढ़, दमन एवं दीव और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली है। जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के रूप में 2 केंद्रशासित प्रदेश बढ़ने के साथ इसकी संख्या 9 हो जाएगी। जम्मू-कश्मीर के दो केंद्रशासित प्रदेश बन जाने से राज्यों की संख्या एक कम हो जाएगी। यानी अब राज्यों की संख्या 28 रह जाएगी।

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English summary
After the deletion of Article 370 from the Constitution the people of Kashmir will be rejoicing freedom.They can now hoist the national flag with pride and can also sing the national anthem.Not just that they will now be part of economical and social growth along with other States of India.
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