मुजफ्फरनगर की जनता के दर्द को भुनाने में जुटी बसपा

Muzaffarnagar
लखनऊ। 2014 की दस्तक आम लोगों के लिये जितनी खास है, उससे कहीं ज्यादा खास देश के राजनीतिक दलों के लिये है, क्योंकि इस साल लोकसभा चुनाव होंगे। देश एक नई करवट लेगा, लेकिन शर्मनाक यह है कि देश के कई राजनीतिक दल विकास के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाये मुजफ्फरनगर दंगों के पीड़ितों के दर्द को भुनाने में जुटे हैं। कांग्रेस, राजद के बाद अब बसपा ने शामली और पड़ोसी जिले के घावों पर मगरमच्छ वाले आंसू बहाये हैं।

मुजफ्फरनगर में दंगे अगस्त में हुए जो सितंबर तक खिंचे। अब छह महीने बाद जाकर अचानक कई दलों के नेताओं ने राहत शिविरों के दौरे शुरू कर दिये। पहले राहुल गांधी, उसके बाद लालू यादव और अब बसपा के नेता दंगा पीड़ितों के घावों पर राजनीति करने जा रहे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष राजभर के अलावा राष्ट्रीय महासचिव और विधानसभा में विपक्ष के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य, नसीमुददीन सिद्दिकी और सांसद मुनकाद अली सहित कई अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। हिंसा के बाद पहली बार वहां के राहत शिविरों के दौरा पर निकले बसपा के प्रतिनिधिमंडल ने वहां रह रहे लोगों की हालत पर काफी चिंता जताई है। बसपा का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को पूरे दिन राहत शिविरों का दौरा करेगा।

बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर ने कहा, "अभी तक हम दो राहत शिविरों-कांकड़ा और सहजन-का दौरा कर चुके हैं। यहां से शाहपुर के लिए निकल चुके हैं, लेकिन राहत शिविरों में रह रहे लोगों की हालत देख कर काफी दुख हुआ। शिविरों में रह रहे लोगों को जाड़े के समय पर्याप्त सामान मुहैया कराने की बजाए सरकार उनके खिलाफ ही आरोप लगा रही है। लोगों की हालत काफी दयनीय है। लोगों के पास दैनिक उपयोग का सामान भी नहीं है, जिससे हालत और चिंताजनक बनी हुई है।"

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, "मायावती पहले ही राज्य सरकार को बर्खास्त करने की मांग कर चुकी हैं। यह सरकार शासन करने लायक नहीं है। लोगों की जरूरत पूरी करने के बजाए उन पर राजनीति की जा रही है और उन्हें षड़यंत्रकारी बताया जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"

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