इजरायली कंपनी NSO से नहीं हुआ कोई लेन-देन, पेगासस के आरोप निराधार: रक्षा मंत्रालय
नई दिल्ली, 9 जुलाई: पिछले महीने कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने मिलकर पेगासस प्रोजेक्ट नाम से एक रिपोर्ट जारी की। जिसमें दावा किया गया कि भारत सरकार ने कई नेताओं, पत्रकारों, अधिकारियों आदि की जासूसी करवाई थी। जिसके बाद से देशभर में इसको लेकर राजनीति जारी है। संसद के मानसून सत्र में भी ये मुद्दा जोर-शोर से उठ रहा है। जिस पर सोमवार को रक्षा मंत्रालय ने संसद में जवाब दिया। साथ ही लंबे वक्त से लग रहे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

दरअसल राज्यसभा में सीपीआई (एम) के सदस्य के.वी. शिवदासन ने रक्षा मंत्रालय को लेकर कई सवाल पूछे। इसी में एक सवाल था कि क्या मंत्रालय ने इजरायली कंपनी के साथ कोई लेन-देन किया है। जिस पर लिखित उत्तर देते हुए रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने कहा कि रक्षा मंत्रालय का एनएसओ ग्रुप टेक्नोलॉजीज के साथ कोई लेन-देन नहीं है। हालांकि ये प्रतिक्रिया रक्षा मंत्रालय के लिए विशिष्ट है। इसमें अन्य मंत्रालयों और फर्म का जिक्र नहीं है, जो इस कंपनी से जुड़े हो सकते हैं।
इससे पहले संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सरकार की ओर से जासूसी के आरोपों को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि ये सारे आरोप भारतीय लोकतंत्र का बदनाम करने के लिए लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में सुरक्षा काफी सख्त है, ऐसे में अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा किसी भी प्रकार की अवैध निगरानी संभव नहीं है।
क्या थी रिपोर्ट?
पेगासस में सिर्फ भारत का ही डेटा नहीं था, बल्कि दुनियाभर के कई देशों का जिक्र था। रिपोर्ट के मुताबिक इजरायली सॉफ्टवेयर पेगासस में दुनियाभर के 50 हजार से ज्यादा लोगों के नंबर जासूसी के लिए डाले गए। हालांकि ये पुष्टि नहीं हुई कि उन लोगों के फोन हैक हुए थे या नहीं। इसमें नेता, मंत्री, पत्रकार, समाजसेवी, अधिकारियों आदि के नाम शामिल हैं।












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