मैं माफी नहीं मागूंगा, मुझे दया नहीं चाहिए...दोषी करार दिए जाने के बाद जज से बोले राहुल गांधी
मानहानि के जिस मामले में राहुल गांधी को दोषी ठहराया गया है वो 2019 का है। कर्नाटक में उन्होंने आम चुनाव के दौरान एक जनसभा में पीएम मोदी के सरनेम को लेकर टिप्पणी की थी।

सूरत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट (Surat Court) ने गुरुवार को पीएम मोदी (PM Modi) से जुड़े मानहानि के मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को दोषी ठहराया है। अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) 499 और 500 के तहत तय आरोपों को सही मानते हुए 2 साल की सजा सुनाई है। वहीं मामले में राहुल गांधी ने जमानत याचिका दायर कर दी है। इस बीच गुजरात जिला एवं सत्र न्यायालय के एक वकील ने अदालत में राहुल गांधी के मामले को लेकर कार्रवाही की जानकारी दी है।
वकील बीएम मांग्युक्या ने इंटरव्यू में बताया कि आज ज्यादा आर्गूय्मेंट के लिए गुंजाइश नहीं थी। राहुल गांधी ने जैसे ही कोर्ट में प्रवेश किया तो अगले दो मिनट में ही कोर्ट ने कहा कि अदालत उन्हें आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत दोषी मानती है। आगे कोर्ट ने सजा क्या होनी चाहिए इस पर बात की। अधिवक्ता ने बताया कि अदालत में राहुल गांधी ने कहा, "मैं राजकीय नेता हूं। इस दृष्टि से देश में भ्रष्टाचार को खिलाफ उठाना हमारा कर्त्तव्य है और हमने यही किया"। कांग्रेस नेता जब कठघरे में खड़े हुए तो राहुल गांधी की ओर से कहा गया कि हमें दया नहीं चाहिए। राहुल गांधी के कोर्ट से माफी मांगने को लेकर सवाल पर उन्होंने कहा कि कोर्ट में इस बात का सवाल ही उठता।
मामला 2019 का है जब राहुल गांधी कर्नाटक के कोलार में आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी के सरनेम को लेकर टिप्प्णी की थी। इस बयान को लेकर विवाद हुआ। मामले में गुजरात डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में मुकदमा दायर हुआ। जिसमें राहुल गांधी पर पीएम मोदी की मानहानि के आरोप लगे।
कोर्ट में दायर मुकदमें कहा गया कि केरल के वायनाड की जनसभा में राहुल गांधी ने पीएम पर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, 'क्यों सभी चोरों का समान उपनाम मोदी ही होता है?' कोर्ट में ये याचिका भाजपा विधायक व गुजरात के पूर्व मंत्री पुरनेश मोदी की ओर से दायर की गई थी।
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